WHERE IS GOD? – ROAR OF A REBELLIOUS SOUL

परमात्मा कहाँ है ?


(Answer From A Rebellious Soul That Is The  Only Hope Of  This Century)

जिस व्यक्ति का भी यह सवाल हो , वह व्यक्ति निश्चित रूप से अंधा है , मैं यह दावे के साथ कह सकता हूँ | उसे अपने आँख की ईलाज करवानी चाहिए | उसकी आँख जन्मों – जन्मों  से बंद पड़ी है | उसके आँख की सर्जरी की जरूरत  है |

यदि वह व्यक्ति सचमुच में प्यासा हो  ,मुमुक्षु हो उसके  हृदय में धधकती आग (Burning Desire ) हो तो मैं उसके आँख की सर्जरी करने के लिए तैयार हूँ | क्योंकि मैंने अपने आँख की सर्जरी एक बहुत बड़े और सधे  हुए मानव मस्तिष्क तथा आँखों के सर्जन की देख- रेख में खुद की है |

परमात्मा कहीं आकाश में नहीं बैठा है | आकाश में बताने वाले लोग अच्छी तरह समझ लें | उनका परमात्मा से कभी साक्षात्कार नहीं हो सकता | वह कोरी कल्पना  (Imagination )  है | उनका  सिर्फ अनुमान (Inference ) है ,अनुभव(Experience , Self Realization  )नहीं  है | वह उनके मन की चालबाजियां हैं |

हम सभी लोग जानते हैं कि परमात्मा के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा मन (Mind) है | इससे क्या  अंतर पड़ता है कि मन अच्छी बातें (Positive) सोचता  है या बुरी (Negative) बातें | दोनों अवस्थाओं में मन तो रहता हीं है |

हाँ अच्छी बातें सोंचने से आपको इस संसार में थोडा सुख -शांति का अनुभव जरुर हो जाएगा | लेकिन इससे परमात्मा कि प्राप्ति हो जाएगी ,यह कोरा झूठ ,मिथ्या है| यह मात्र तर्क (Philosophy ) है

“पिछले पच्चास साल का इतिहास पलटकर  देखें तो आपको पता चलेगा कि इस संसार में सफलता के मात्र दो सूत्र हैं :एक मानवीय सम्बन्धों (Human Relation ) कि कला सीखना और  दूसरा सकरात्मक  नजरिया (Positive Attitude )  रखना | जैसे आपका नजरिया आपकी सफलता निर्धारित करती है |चीखने चिल्लाने और नाराज होने के बजाए मुस्कुराने से अधिक लाभ  होता है | एक व्यक्ति अपने मस्तिष्क में जिस चीज कि कल्पना कर सकता है और विश्वाश कर सकता है ,उसे वह प्राप्त भी कर सकता है “:-स्टीफन आर कवी      (Writer ‘ The 7 Habits of Highly Effective People’)

मैं यह नहीं कहता कि ये ऊपर के कथन गलत हैं | लेकिन मैं दावे के साथ कह सकता हूँ  कि ये बुनियादी तत्व (Primary ) नहीं हैं  बल्कि गौंड (Secondary ) हैं |

“यदि मैं बातचीत  की   कला में पारंगत  हो जाऊं और सही तकनीकों का उपयोग करना  सिख जाऊं तो निश्चित रूप  से लोगों से अपना मनचाहा  या बेहतर काम करवा पाउँगा , उन्हें अच्छी तरह से प्रेरित कर पाउँगा और वे लोग मुझे पसंद भी करने  लग जाएँग”:-  स्टीफन आर कवी

“लेकिन यदि मेरा चरित्र (character) दोष पूर्ण और छल- कपट से भरा है तो मैं लम्बे समय तक सफल नहीं हो सकता | मेरे छल- कपट ,बेईमानी कि वजह से अविश्वाश पैदा होगा और मेरे हर कम को जोड़-तोड़ या चालाकी माना जाएगा | इससे जरा भी फर्क नहीं पड़ता  कि शब्दों का जाल कितना अच्छा है या इरादे कितने नेक  हैं :- स्टीफन आर कवी

जिस तरह से पिछले पच्चास सालों में सकरात्मक विषय और मानवीय सम्बन्धों  पर रोज एक किताब पब्लिश हो रही है उसी तरह से फिछले पचास सालों से इस संसार में साधू- सन्यासियों की बाढ़ सी आ गयी है | सभी लोग परमात्मा की प्राप्ति के मार्ग बताए जा रहे हैं और सबका हृदय परिवर्तन कर रहे हैं लेकिन  इस संसार को देखने से ऐसा कहीं सुख -शांति या भाई-चारा नजर नहीं आता  बल्कि चारो तरफ अशांति ,दुश्मनी, चोरी ,बेमानी, बेबिचार  का तांडव नृत्य हो रहा है | आखिर परमात्मा कहाँ सोया हुआ है ?

दोस्तों ! आप जानते हैं की इस संसार में सभी परेशान हैं चाहे धनी हो या आमिर | आमिर धन के चलते परेशान है और गरीब धन के बिना परेशान है | साधू  -सन्यासियों को यह बात अच्छी तरह से समझ में आ गयी है | और इसी का फायदा ये उठा रहे हैं |
हाँ ! उनके बताए हुए साधना की विधियाँ ,प्रार्थना ,ध्यान सब एस्पिरिन से ज्यादा नहीं हैं | जिस तरह से मैंने मानवीय सम्बन्धों के बारे में ऊपर बात की है  ठीक उसी तरह थोड़े देर के लिए आपको सुख और शांति का आभास जरुर हो जाता है लेकिन वह स्थाई ईलाज नहीं है |
जिस तरह से अमीर बनने के कुछ टेक्निक होते हैं और उसमे पहला टेक्निक है अपने आप को बदलना (Change Yourself ) उसी तरह से  अपने आप को जानने के भी टेक्निक हैं और यदि आपने अपने आप को जान  लिया तो परमात्मा को जानने की कोई आवश्यकता नहीं रह जाती |

आप कौन हैं ? WHO ARE YOU ?

आप कौन हैं ?( WHO ARE YOU ?) इसके बारे में  चर्चा  करने से पहले आइये  हम  इससे सम्बन्धित दो- तीन शब्दों के  बारे में समझ लें : एकाग्रता (Attention or Concentration ) और ध्यान (Meditation)  ये दोनों शब्द आज तक  समानार्थक (Synonymous) समझे जाते रहे हैं  लेकिन दोनों शब्द विपरीतार्थक ( Polar Opposite ) हैं | एकाग्रता का मतलब है   One Directional  like a focus of  torch जबकि ध्यान का मतलब होता है   Omni Directional like a candle light .

“एकाग्रता में अपनी पूरी ऊर्जा को एकत्रित करके एक बिंदु पर लाने की कोशिश की जाती है  जबकि ध्यान का मतलब  होता है “कुछ ना करना “(Doing Nothing )चुपचाप सिर्फ देखना , जो कुछ भी हो रहा हो, बिना बिरोध के देखना , जैसे कुत्तें भूंक रहे हों , बच्चे चिल्ला रहे हों ,चिड़िया बोल रही हो , कोई आंकलन नहीं ,कोई बिचार नहीं ,मात्र देखना , साक्षी (Witnessing) हो जाना ध्यान है | अच्छा हो रहा है तो ठीक बुरा हो रहा है तो भी ठीक , कोई बिरोध नहीं |  इसको  कहते हैं प्रकृति के साथ लय- बधता (Synchronicity with Existence) ध्यान में आपको कुछ मिलता नही है , यदि कुछ पाने की लालसा शेष  रहती है तो ध्यान घटता हीं  नहीं है | यहीं बिरोधाभाषा है ध्यान और एकाग्रता  में” :-  OSHO RAJNISH

“एकाग्रता से विज्ञानं पैदा होता है , संसार  की सभी सुख सुविधाएँ  विज्ञानं दे सकता है सिर्फ एक चीज को देने की क्षमता विज्ञानं में नहीं है, वह है: कैसे जानें की आप कौन हैं ? एकाग्रता सब कुछ आपको दे सकता सिर्फ आपको अपने को जानने से वंचित करके | और आप सब कुछ पा लें तो भी क्या सार यदि आप अपने को जानने से वंचित रह जाएँ | यहीं कारण है की पूरब ने सब कुछ दांव पर लगा दिया”सोने की चिड़िया कहा जाने  वाला  देश पुरे जगत का भिखारी बन गया”  लेकिन ध्यान को बचा कर रखा”OSHO RAJNISH :-

आज विज्ञानं ने पश्चिम को सब कुछ दिया है फिर भी पूरा पश्चिम, पूरब की ओर क्यों भागे चला आ रहा है ? एकाग्रता  पश्चिम की खोज है और ध्यान पूरब की |एकाग्रता  objective है ध्यान Subjective  एकाग्रता दूसरों  के बारे में जानकारी इकठ्ठा करता है और ध्यान अपने को जानने की कोशिश करता है|

ध्यान में जाने से पहले इन बिन्दुओं को  अपने दिमाग में नोट कर लें तो अच्छा रहेगा  :-

( This point is for beginners )

*सबसे पहले विधि को अच्छी तरह से समझ लें

*ध्यान को प्रयास से शुरू  करें

* अच्छा होगा यदि ध्यान को रेचन से शुरू किया जाए

*अच्छा होगा यदि ध्यान एक हीं रूम में  रोज किया जाए

*रूम साफ सुथरा और खाली हो

*ध्यान का समय निश्चित हो

*ध्यान को काम नहीं बल्कि खेल समझें

*ध्यान में अटूट धैर्य चाहिए

*ध्यान में परिणाम न खोजें

*रूम  में मच्छर -मक्खी नहीं होना  चाहिए

*कपड़े ढीले होना चाहिए

* अच्छा होगा यदि रूम खुला और हवादार हो

*अच्छा होगा यदि रूम में लोगों का आवागमन  न हो

*अच्छा होगा यदि रूम शोर शराबे से दूर हो

*अच्छा होगा यदि पेटखाली  हो

नोट :ये सभी point ध्यान के अनिवार्य तत्व नहीं हैं लेकिन प्रारम्भ में सहयोगी होंगी


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Comments

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