आपके संघर्ष को सलाम!
हम अक्सर जन संघर्षों में गाते है – ‘‘जयपुर की सरकार तू बोले क्यूं नी रे, बोले क्यूं नी रे, मुण्डो खोले क्यूं नी रे।’’ मतलब यह कि जयपुर की सरकार तू बोलती क्यों नहीं है और अपना मुंह खोलती क्यों नहीं है? शायद इसलिए कि राजस्थान की सरकार गूंगी सरकार है, लेकिन आरसीएम उपभोक्ता एवं वितरक कल्याण संघ के बैनर तले चल रहे प्रचण्ड जन अभियान की मांगों को अनसुना कर रही केंद्र की यूपीए सरकार से पूछने का मन करता है कि दिल्ली की सरकार, तू सुनती क्यों नहीं रे?
संपूर्ण स्वदेशी उत्पाद बेचने वाली शुद्ध भारतीय व्यापारिक कंपनी आरसीएम पर की गई अवैधानिक कार्यवाही के बाद कंपनी को बंद हुए आज 105 दिन हो चुके। दिसंबर 2011 से पुलिस के तुगलकी रवैये, हठधर्मिता और अपने अघोषित व कथित अज्ञात आकाओं के ईशारों पर उसने आरसीएम वल्र्ड पर चढ़ाई की, कार्यवाही की, उसे सीज किया और सर्वर तथा संपूर्ण वितरण व्यवस्था को ठप्प करने का बेहद नासमझी भरा कदम उठाया, खैर, वह मामला अब जेरे अदालत है, मगर आरसीएम से जुड़े 1 करोड़ 33 लाख लोग इस हिटलरी पुलिसिया कार्यवाही से पीडि़त होकर बेरोजगार हो चुके है, यह अत्यंत चिंता का विषय है।
करोड़ों लोगों के रोजगार के सवाल को आरसीएम उपभोक्ता एवं कल्याण संघ ने बड़ी शिद्दत से उठाया है। भीलवाड़ा पुलिस की कार्यवाही के विरुद्ध निहायत ही गांधीवादी तरीके से 12 दिसंबर को भीलवाड़ा शहर की सड़कों पर हजारों लोगों ने शांतिपूर्ण मौन जुलूस निकाला। भीलवाड़ा की सड़कें इनके अनुशासित गांधीवादी संघर्ष के शुरूआत की साक्षी है। तब से अब तक आरसीएम के लाखों हमदर्दों ने कहीं भी कोई हिंसक गतिविधि या अभद्रता नहीं की, जिस महात्मा गांधी का नाम राजस्थान की सरकार और केंद्र की यूपीए सरकार लेते नहीं अघाती है, उसी गांधी के आर्दशों का अनुकरण कर रहे है ये भले लोग, मगर जयपुर से लेकर दिल्ली तक बैठी गूंगी, बहरी सरकार इस मामले पर न तो कुछ बोलती है और न ही सुनती है।

अब तक आरसीएम से जुड़े लोग कई बार मुख्यमंत्री सहित कई मंत्रियों, सांसदों से मिल चुके, उन्हें ज्ञापन सौंपे है, देश भर से सौंपे गए ज्ञापनों, धरनों, प्रदर्शनों व शांतिपूर्ण रैलियों की संख्या तो हजारों को पार कर चुकी है। मगर शांतिपूर्ण, अहिंसक, गांधीवादी तरीकों की कद्र करना इन कथित सत्ताधारी गांधीवादियों के वश की बात नहीं रही है। जैसा कि हम जानते है कि लोगों का आंदोलन विभिन्न राज्यों के नगरों, महानगरों व राजधानियों में होता हुआ दिल्ली के रामलीला मैदान होते हुए जंतर-मंतर पहुंच चुका है। हजारों लोगों ने 16 मार्च से देश की राजधानी में डेरा डाल रखा है, पहले इन निहत्थे अहिंसक शांतिपूर्ण गांधीवादी तरीके से आंदोलन करने के अभिलाषी लोगों को रामलीला मैदान में प्रदर्शन की अनुमति दी गई, फिर यकायक वापस ले ली गई। यह समझना जरा मुश्किल है कि सरकारें अपने नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध करने के अधिकारों का इस प्रकार कैसे हनन कर सकती है? मगर, खुलेआम कर रही है।
जिन सत्ताओं के जन विरोधी तरीकों के विरुद्ध नागरिक प्रदर्शन करना चाहते है उन्हें सत्ता विरोधी अथवा व्यवस्था विरोधी धरना प्रदर्शनों की इजाजत सरकार से लेनी पड़े तो इसे इस युग की विडंबना ही कहा जाना चाहिए, कितने लोग आएंगे? कहां से आएंगे? क्या नारे लगाएंगे? भाषण कौन देंगे? क्या देंगे? रैली कहां से कहां तक जाएगी? यह सब बातें सत्ता-व्यवस्था तय करने लगी है, इसे मैं व्यक्ति की आजादी और हमारे नागरिक अधिकारों पर सत्ता का हमला मानता हूं और इसीलिए आरसीएम के लोगों को पहले अनुमति देना और फिर उसे वापस लेने को लोकतंत्र में असहमति की आवाजों का गला घोंटने का कृत्य ही कहा जाएगा। ऐसी सरकारी नादिरशाही की निंदा की जानी चाहिए।
सत्ता कितनी निर्मम और निरंकुश होती है, यह आप बेहतर जान गए होंगे। क्योंकि आप में से सैकड़ों लोग अनशन पर है और कहीं कोई सुनवाई नहीं की जा रही है तो इसे संवेदनहीनता की पराकाष्ठा ही कहा जा सकता है। कल्याणकारी और समाजवादी राष्ट्र राज्य होने का दावा करने वाले भारत गणराज्य की आम आदमी के साथ होने का भ्रम फैला रही सरकार क्या आप लोगों का साथ दे रही है?
मैंने आपके अनुशासित प्रदर्शनों के चित्र देखे है जिसमें ‘हम हो गए बेरोजगार-सरकार है जिम्मेदार’ लिखा है अथवा ‘आरसीएम वितरण व्यवस्था बहाल करो’ या ‘एमएलएम कानून बनाओ’ की जायज मांगे आप द्वारा की जा रही है। जिन्हें देशभर के जिम्मेदार जन प्रतिनिधियों का खुला समर्थन मिला है। मेरा समर्थन पहले दिन से आपके साथ रहा है और भविष्य में भी जारी रहेगा।

आपकी आवाज आज आपके संघर्ष की बदौलत जंतर-मंतर की सड़क से लेकर देश की संसद तक में गूंज रही है। मैंने बीकानेर के माननीय सांसद अर्जुन मेघवाल, भाजपा प्रवक्ता शहनवाज हुसैन और नर्बदा बचाओ आंदोलन की अगुवा, प्रणेता व भारत में जन संघर्षों की जुझारू प्रतीक बन गई मेधा पाटकर का जंतर-मंतर पर आपको दिया संबोधन सुना। उन्होंने और उनके अलावा 36 और सांसदों ने आपकी वाजिब मांगों का समर्थन किया है, यह शुभ शुरूआत है। हालांकि जो सरकारें पांच मिनट में बिना किसी बहस के विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) जैसे कितने ही कायदे पारित कर देती है, वह सरकार हजारों प्रदर्शनकारियों व सैकड़ों अनशनकारियों की मांग पर ध्यान तक नहीं दे रही है क्योंकि उसका ध्यान तो रिटेल में एफडीआई लाने के दुराग्रह पर स्थिर है। देश की जनता जो चाहती है, सत्ता वह नहीं करती है, जनता कालाधन वापस लाने की मांग कर रही है, सरकार उस पर श्वेत पत्र लाने की बात कर रही है? मैं पूछता हूं श्वेत पत्र ही लाओगे या कालाधन भी लाओगे? आप लोगों ने अर्द्धनग्न होकर रामलीला मैदान के बाहर एमसीडी के फुटपाथों पर प्रदर्शन करने का साहसिक कार्य भी किया है मगर मुझे लगता है कि जिस सत्ता के समक्ष आप अर्द्धनग्न प्रदर्शन कर रहे हो, वह सत्ता संपूर्ण नंगी हो चुकी है। बहरी हो चुकी है, गूंगी हो चुकी है और जनविरोधी हो चुकी है।
लेकिन फिर भी हम तो यह मानते है कि ‘सरकार हमारे आपकी-नहीं किसी के बाप की’ इसलिए उससे नाउम्मीद होने की जरूरत नहीं है, जनतंत्र में जनता मालिक होती है और सरकारें मुनीम तथा ब्यूरोक्रेसी नौकर। इसलिए लगे रहना पड़ता है, एमएलएम का कानून लाने के लिए लगातार प्रयास करना पड़ेगा, तभी कामयाबी हासिल होगी।
किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र के नागरिकों का राजनीतिक शिक्षण होना जरूरी है, आपके लिए भी यह समय बहुत कुछ सीखने का समय है। आप जान पा रहे होंगे कि इस देश के मीडिया का चरित्र क्या है? सच्चाई, ईमानदारी, नैतिकता, निष्पक्षता और निर्भीकता का रात-दिन भौंपू बजाने वाला मीडिया सरासर इन जीवन मूल्यों के विरुद्ध काम करता है। चुनाव में पेडन्यूज छापने वाला, सत्ता के गलियारों की दलाल नीरा राडिया के लिए काम करने वाला भारतीय मीडिया अक्सर जन विरोधी काम करता है, सत्ता के लिए कवच बन जाता है और लोगों के वास्तविक मुद्दों के बजाय काल्पनिक मुद्दों को लाकर सनसनी पैदा करता है, अगर मीडिया जनहित में काम करता तो वह राजस्थान पुलिस द्वारा भीलवाड़ा में आरसीएम मुख्यालय पर की गई गैर जरूरी कार्यवाही पर सवाल उठाता। उसे देश भर से आरसीएम के पक्ष में उठी आवाजें सुनाई पड़ती, उसे भीलवाड़ा, जयपुर तथा रामलीला मैदान के संघर्ष दिखलाई पड़ते। उसे जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे लोगों की मांग और मुद्दों से सहानुभूति होती मगर अपराधियों के लिए इस मीडिया के पास वक्त है, भ्रष्ट राजनेताओं को उनका प्राइम स्पेस और प्राइम टाइम समर्पित है, उसे अन्ना हजारे के अनशन के एक-एक पल से सहानुभूति है मगर आर्थिक आजादी के दीवानों की जंग का वर्तमान दौर के बिकाऊ मीडिया की नजर में कोई मतलब नहीं है।…. मगर साथियों, निराश होने की कोई जरूरत नहीं है, आपकी आवाज धीरे-धीरे मजबूत होती जा रही है, वह दिन आने वाला है जब पुलिस, प्रशासन, सत्ता और मीडिया सबको आप लोगों की बात सुननी पड़ेगी और आपकी जायज मांगों को स्वीकारना पड़ेगा, मगर बढ़े हुए कदमों को पीछे मत खींचना। अपनी ताकत को निरंतर बढ़ाते रहना, अब तक 36 सांसद आपके मंच तक आए है, वह दिन आने वाला है जब शायद नहीं आने वाले सांसदों की संख्या महज 36 रह जाए बाकी सब आ जाए।
जो लोग आज यह कहकर पल्ला झाड़ रहे है कि हम क्या करे? कानून अपना काम कर रहा है, उनसे हमारा यही कहना है कि इस मामले में तो आपके मुल्क में कोई कानून ही नहीं है, जिस कानून के तहत कार्यवाही हो रही है, वह जब बनाया गया था तब तो कानून निर्माताओं को प्रत्यक्ष व्यापार प्रणाली की समझ ही नहीं थी, यह पूरी प्रक्रिया तो चली ही नब्बे के दशक से है, तब ये ही मनमोहन सिंह, नरसिम्हराव सरकार में वित्तमंत्री हुआ करते थे, उस वक्त इन्होंने ही आर्थिक उदारीकरण, भूमंडलीकरण और निजीकरण के लिए इस देश के दरवाजे, खिड़कियां और छतें तक खोल दी थी, उसी जागतीकरण का नतीजा है प्रत्यक्ष व्यापार की प्रणाली। जब विदेशी पूंजी से लेकर विदेशी आकाओं के इशारे तक हमारी केंद्र सरकार मान रही है तब उसे तकरीबन 5 करोड़ लोगों को रोजगार मुहैय्या करवाने वाली प्रत्यक्ष व्यापारिक प्रणाली को स्वीकारने में कैसी दिक्कत है? फिर यह भी गंभीर सवाल है कि जब विदेशी ‘एम वे’ चल सकती है, देशी ‘एनमार्ट’ जायज है तो ‘आरसीएम’ गलत कैसे है? किनके इशारों पर नष्ट करने पर तुले हो? क्यों एक संपूर्ण स्वदेशी, शुद्ध भारतीय रिटेल श्रृंखला को समाप्त कर रहे हो? यह ऐसा सवाल है जो राजस्थान की सरकार से लेकर केंद्र की सत्ता के गलियारों में गुंजायमान है जिसका जवाब उन्हें देना ही पड़ेगा।

जितने साथी जंतर-मंतर पर इस जंग को लड़ रहे है उनके संघर्ष के जज्बे को मैं सलाम करता हूं। मेरी हार्दिक इच्छा है कि जंतर-मंतर की सड़क पर आपके समर्थन में बैठू, लेकिन 14 अप्रेल तक पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों की व्यस्तताओं के चलते फिलहाल राजस्थान के सुदूर अंचल के गांव, खेड़ों व ढाणियों में विचरण कर रहा हूं मगर आपके संघर्ष में मैं सहभागी हूं और आपकी जीत की शुभकामनाएं देता हूं। बस अपनी आवाज को और बुलंद करिए और बोलिए, ‘‘कहिए अपनी बात-मजबूती के साथ’’।
सुप्रसिद्ध शायर फैज अहमद फैज कहते है -
बोल, कि थोड़ा वक्त बहुत है
जिस्म ओ जबां की मौत से पहले
बोल, कि सच जिंदा है अब तक
बोल, जो कुछ कहना है, कह ले
बोल, कि लब आजाद है तेरे…।
पुनः आपके संघर्ष को सलाम! ‘‘वी शैल फाइट – वी शैल विन’’ लड़ेंगे -जीतेंगे।
- भंवर मेघवंशी
(लेखक – khabarkosh.com के संपादक है और राजस्थान के सुदूर ग्रामीण अंचल में मानव अधिकार के मुद्दों पर कार्यरत है।
उनसे bhanwarmeghwanshi@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।)
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RCM आरसीएम बिजनस 100 % इन्वेस्टमेंट चिटफंड, मनी सर्कुलेशन पिरामिड स्कीम व लोटरी सिस्टम पर आधारित था
साथियों, मुख्यत कपड़ा बुनने की RCM आरसीएम कंपनी के निदेशक टी. सी. छाबड़ा ने खुद व अपने परिवार को अरबपति बनाने के लिए बड़ी ही शातिर तरीके से एक के बाद एक नित नयी स्कीमों का ऐसा ताना-बाना बुना कि उपरी तौर पर भोले-भाले ग्रामीणों को क्या पढ़े-लिखों को भी यही लगता कि कंपनी अपने साथ जुड़ने वाले मेम्बर्स को बिना बिचोलियों के वाजिब दर पर सीधा सामान बेच रही हे और यदि वे मेम्बर्स अन्य लोगो में इस बात का प्रचार कर के उन्हें भी अपने साथ कंपनी का यदि सदस्य बना दे और वे सभी कंपनी का सामान खरीदना-बेचना शरु कर दे तो कंपनी उन्हें अपने बनाये बिजनस प्लान के नियमानुसार इस कार्य का उन्हें पारिश्रमिक भी देगी इसके साथ ही उनकी स्वयं की प्रति माह होने वाली खरीद और लायी गयी नई जोइनिंगो के आधार पर स्कीम के मुताबिक पॉइंट बनेंगे और हर 10 पॉइंट हो जाने पर जो 1000 /- रुपये का कमीशन सामान्यत इस स्कीम से पहले बनता था उसमे से 250/- रुपये (बाद में इसे भी 500/- कर दिया गया) “लोयल्टी बोनस” फंड के लिए काट कर शेष 750/- रुपयों (बाद में इसे भी 500/- कर दिया गया) का नियमानुसार कटोतिया कर उसके आरसीएम बिजनस एकाउंट में और तत्पश्चात इस एकाउंट में कुल 500/- रुपये हो जाने पर अगले माह तक उसके बेंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जायेगा.
कंपनी ने जब यह “लोयल्टी बोनस” का फंडा बनाया ( देखे सेवक सवांद T082 ) तब मुख्यतः यह कहा गया कि एक निर्धारित तिथि तक कंपनी में जितनी भी “लोयल्टी बोनस” आइडिये आ जाएगी उनकी लाटरी निकाल कर वरीयता सूची बनायीं जाएगी और इस सूची में हर क्लब सदस्य के डाउन में निम्न सदस्यों की संख्या होने पर उन्हें उस फंड में से उनके लेवल अनुसार निम्न प्रकार से भुगतान किया जायेगा :-
1 लेवल – नीचे 4 सदस्य हो जाने पर – 250/- रूपए
२ लेवल – 4 के नीचे 16 सदस्य हो जाने पर – 750/- रूपए
३ लेवल – 16 के नीचे 64 सदस्य हो जाने पर – 5000/- रूपए
४ लेवल – 64 के नीचे 256 सदस्य हो जाने पर – 51000/- रूपए
और यह वरीयता सूची तय हो जाने के बाद क्लब सदस्य को इस “लोयल्टी बोनस” की अपनी सदस्यता बरक़रार रखने के लिए हर माह कम से कम 1000/- रुपयों का सामान अनिवार्य रूप से खरीदना पड़ेगा जिस पर फिर पॉइंट बनेगे और फिर 10 पॉइंट हो जाने पर जो 1000 /- रुपये का कमीशन बनेगा जिसमे से 500/- रुपये “लोयल्टी बोनस” फंड के लिए काट कर शेष 500/- रुपयों का नियमानुसार कटोतिया कर उसके आरसीएम बिजनस एकाउंट में और तत्पश्चात इस एकाउंट में कुल 500/- रुपये हो जाने पर अगले माह तक उसके बेंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जायेगा व जिस माह उपरोक्त टेबल के अनुसार सदस्यों की संख्या उसकी जिस “लोयल्टी बोनस” आई डी के डाउन में हो जाएगी उस पर सदस्यों की संख्यानुसार बनने वाली “लोयल्टी बोनस” राशी का भुगतान भी किया जायेगा साथ ही मीटिंगों में कंपनी के कर्ताधर्ताओं एवं लीडरों द्वारा यह प्रचार भी किया गया कि इस “लोयल्टी बोनस” सिस्टम से जुड़ने वाले हर क्लब सदस्य को शीघ्र ही ये सभी लाभ प्राप्त हो जायेंगे.
यह कंपनी के द्वारा जारी कि गयी मुख्य “लोयल्टी बोनस” स्कीम थी जिसमें बाद में समय-समय पर कंपनी ने अपने फायदे के लिए इसमें कई नियम-उपनियम थोंपे एंव निश्चित संख्या हो जाने पर भुगतान करने वाली अपनी बात को गोल करके एक लोटरी सिस्टम ईजाद किया गया एंव इस “लोयल्टी बोनस” फंड में से लोटरी के भाग्यशाली क्लब विजेताओं को तीन तरह से क्रमश 51000/-, 5000/-, व् 1000/- रुपयों का लाभ देना शरु किया गया वरीयता से लाभ देने की बात को ठन्डे बस्ते में डाल दिया गया. फिर कुछ समय बाद कंपनी के निरंकुश कर्ताधर्ताओं ने इस लोटरी योजना के भुगतान को “लोयल्टी बोनस” फंड से देने की बजाय कंपनी के मासिक बिजनस वाल्लयुम के 5% फंड से जोड़ दिया जिसमे इंश्योरेंस और नयी जोइनिंग का बिजनस वाल्लयुम सम्मलित नहीं था, कंपनी ने अपने प्लान चेंज करने का सफ़र जारी रखा और लोटरी का प्रथम पुरस्कार की राशी को 51000/- से घटा कर 11000/- कर दिया यही नहीं मासिक बिजनस वाल्लयुम के 5% फंड को भी घटा कर 4- 3% तक कर दिया गया.
इस तरह मुख्य “लोयल्टी बोनस” स्कीम में इन्वेस्टमेंट* पर निश्चित तौर पर कम समय में लाभ मिलेगा का आधार, भरोसा दिला कर कंपनी ने लाखों की संख्या में नए सदस्य और “लोयल्टी बोनस” सदस्य बनाये और करोड़ों रुपये इक्कठे किये, बाद में पूरी तरह से स्कीम को चेंज कर के उन लाखों लोगो के साथ धोखाधडी व ठगी की हे.
* स्कीम में इन्वेस्टमेंट :- किसी भी व्यक्ति या सदस्य को उसको दी जाने वाली भुगतान योग्य धनराशी में से जबरदस्ती कुछ या आधी राशी कंपनी की स्कीम के लिए काट कर भुगतान करना में काटी गयी धनराशी एक तरह से कंपनी द्वारा अपनी स्कीम में उस व्यक्ति से कराया गया इन्वेस्टमेंट ही था और छल से कराया गया एसा इन्वेस्टमेंट जिसमें उस व्यक्ति की इक्छा-अनिक्छा का कोई महत्व ही नहीं था क्योकि उसके द्वारा कंपनी के बिजनस प्लान के अनुसार लाभ लेने के लिए हर माह खरीददारी करनी अनिवार्य थी और खरीददारी करने पर एक न एक दिन 10 पॉइंट बनने ही थे अंत “लोयल्टी क्लब” में उसका इन्वेस्टमेंट होना ही था, उसके चाहने न चाहने का कोई विकल्प कंपनी ने रखा ही नहीं था. इस तरह से RCM आरसीएम बिजनस 100 % इन्वेस्टमेंट चिटफंड, मनी सर्कुलेशन पिरामिड स्कीम व लोटरी सिस्टम पर आधारित हो गया था जो की गेर क़ानूनी हे.
उपरोक्त बातें सारांश में लिखी गयी हे इसके विस्तृत प्रमाण के लिए हम आरसीएम कंपनी के निदेशक टी. सी. छाबड़ा और अधिकारीयों के द्वारा लिखे गए सभी “सेवक संवाद” को ऑन लाइन शीघ्र ही जारी कर रहें हे, कंपनी की उपरोक्त स्कीम से किस प्रकार लाखों की संख्या में लोग ठगे गए और यह कंपनी शुरू से ही हर तरह से हर स्तर पर आम अवाम जन को किस प्रकार ठग रही थी इस बात के भी शीघ्र और भी कई खुलासे किये जायेंगे ताकि आमजन लीडरों के बहकावे में नहीं आये और उन्हें क्या करना हे इस बात का सही निर्णय लेवे.
धन्यवाद
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RCM कंपनी शुरू से ही अपने सक्रीय सदस्यों की मनघडंत, फर्जी विशाल संख्या बता कर नए लोगो की जोइनिंगे ले कर ठग रही थी
दोस्तों, मनुष्य के स्वभाव की एक कमजोरी हे कि वह जहां ज्यादा लोग किसी कार्य या विचार से सहमत होते हे वहां वह अपने स्वयं के विवेक से निर्णय करने की बजाय लोगो की विशाल संख्या के विचार या कार्य से प्रभावित हो कर उनके पक्ष में अपना निर्णय करता हे.
मनुष्य की इसी स्वाभाविक कमजोरी का श्री 420 टी सी जी ने भरपूर फायदा कंपनी के शुरूआती दिनों से ले कर बंद होने के कगार पर पहुँचने तक सक्रीय सदस्यों की गलत संख्या बता कर यानि की झूट बोल-बोल कर उठाया. लीडर लोग अपनी हर मीटिंग में पहले भी इस झुटी संख्या को जोर दे दे कर हाई लाईट करते थे और अब भी मीडिया, सरकार, न्यायपालिका, आम जनता को बेवकूफ बनाने से बाज नहीं आ रहे हे, इनके द्वारा कही जा रही एक करोड़ पचास लाख RCM सक्रीय सदस्यों की संख्या पूरी तरह से बकवास हे. हकीकत में इस संख्या का 5% भी सक्रीय सदस्य नहीं हे और १% सदस्यों को ही आय हो रही हे 99% सदस्य अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हे.
एक छोटा सा उदाहरण पेश हे :-
दिल्ली के चोर बाजार या हाट बाजार में चतुर ठग व्यापारी 200 का माल 100 में चिल्ला-चिल्ला कर बेच रहा होता हे और उसके ठेले के चारों तरफ 5-10 जनों की भीड़ इक्कठा हुई हुवी होती हे और उनमे से कई जने 100/- दे कर वह माल खरीद रहे होते हे, ऐसे में भीड़ देख कर और उनको खरीददारी करते देख कर और कंही सारा माल समाप्त नहीं हो जाए बाजार में आये इस गोरखधंधे से अनजान कुछ लोग भी 100 दे कर सामान खरीद कर खुद को होशियार ग्राहक समझते हुए अपने घर को चले जाते हे.
अब देखने में तो यह बड़ी सामान्य सी बात हे लेकिन इस तरह की दुकानदारी में वास्तविकता यह थी कि वे पहले से खरीददारी कर रहे 5-10 जनों की भीड़ फर्जी थी, वे उस ठग गिरोह के ही सदस्य थे और उनकी देखा-देखी अन्य लोगो ने 50/- की कीमत के सामान के 100/- दे दिए.
ठीक इसी तरह RCM में भी कंपनी और लीडरों के द्वारा सदस्यों की फर्जी संख्या बता कर शुरू से ही ठगी का कार्य बदस्तूर चालु था.
इसी पेज पर संख्या की गणित शीघ्र बतायी जायेगी अन्तह कृपया देखते रहे……………………..rcmmanch.blogspot.com
रोजगार सृजन में अहम हो सकती हैं डायरेक्ट सेलिंग कंपनियां
Courtesy: Dainik Jagran, Delhi – 19 March 2011
दोस्तों,
देनिक जागरण द्वारा दी गयी उपरोक्त खबर आज के सन्दर्भ में बड़ी ही महत्वपूर्ण हे, हमारे देश के तेजी से विकास एवं हर बालिग़ को न्यायप्रद रोजगार देने के लिए अच्छी, मजबूत एवं कानून सम्मत “डायरेक्ट सेलिंग उद्योग कंपनियों” की आज सख्त जरुरत हे.
ऐसी कम्पनियाँ जो कि “एक सबके लिए, सब एक के लिए” के सहकारिता के मानद सिद्धांत पर कार्य करती हो एवं इसी सिद्धांत को ध्यान में रख कर कानूनन रजिस्टर्ड हो एवं जिनके द्वारा निर्मित, विक्रय किये जाने वाले उत्पाद की क्वालिटी उपभोक्ताओं के हित के लिए बनायी गयी तृतीय पक्ष संस्थाओं से प्रमाणित हो और वे वास्तव में सभी सदस्यों को उनके कार्यानुसार प्रतिफल देने के लिए वचनबद्ध हो.
ऐसी कंपनियों का बिजनस प्लान भाई-भाई को आपस में लड़ाने वाला न हो बल्कि पूरे देश में आपसी सोहाद्र बढाने का सचमुच में योगदान करता हो, हरेक सदस्य के द्वारा पूरी न की जा सकने वाली शर्तो से उलझाया हुआ न हो, जिसमे भ्रष्टाचार का कंही नामो-निशान भी न हो, उत्पादों का विक्रय मूल्य लागत से बहुत ज्यादा न हो कर वाजिब दाम पर हो.
साथियों, आज नेटवर्किंग का कार्य हमारे लिए नया नहीं हे और प्राय हम सबने इस तरह की कई कंपनियों का कार्य कर के खट्टे-मीठे अनुभव भी प्राप्त किये हे. आय में लाभ-हानि हो सकती हे लेकिन अपने-अपने कार्य शेत्र विशेष, स्थान विशेष में प्राप्त अनुभव, ज्ञान अनमोल होते हे जो कभी नष्ट नहीं होते हे.
आप अपने अनुभवों के आधार पर एक अच्छी डायरेक्ट सेलिंग नेटवर्किंग कंपनी, संस्था के बिजनस प्लान में क्या-क्या जरुरी चीजे और केसे होनी चाहिए के बारे में अपने सुझाव, सलाह संषेप या विस्तार में यदि इस मंच की इस पोस्ट पेज (सर्वे हिताय सर्वे सुखाय कंपनी) के कॉमेंट बॉक्स में देंगे तो एक “सर्वे हिताय, सर्वे सुखाय” को ध्यान में रख कर एक नयी कंपनी की सरंचना, स्थापना आसानी से की जा सकेगी जो कानून सम्मत भी हो और आप सभी को सर्वमान्य भी हो.
आशा हे की देश हित में आप अपने सुझाव, विचार इस पोस्ट के पेज “सर्वे हिताय सर्वे सुखाय कंपनी” पर जरुर कॉमेंट करेंगे.
कॉमेंट करने के लिए शीघ्र विजिट करें :- rcmmanch.blogspot.com
आपका हितेषी
सत्य प्रकाश
dear satya prakash j jai rcm, mene pahle admi ke hezre ko dekha tha lekin bharua ka pata nahi tha , jesa aap dekhai padte hai . ek hi meter ko bar bar side par dekar tumhe kesa lag raha hai. etne jab rcm ke bare me jankari rakhte ho to, esase pahle apni nasihat co.ko/sarkar ko kyo nahi diya . agar kuchh likhana hi hai to bhawar meghwansi ke likhe sabdo ka jabab do. all the best.thanks.jay rcm
To
braham deo kumar patel,
madarchod teri maaa ko chodu jab asliyat sab ko bata hai to tujhe apni maaa chuda k kaisa laga raha hai,dusaro ko rcm ki iskim baat kar apni ma chudavate ho , aur hamse teri maa chodane ki fis lete ho,madarchod maine 8 point banaya uska commission to tc chhabada manssion ne to diya nahi ab teri maa chuda jab koi sahi bol rah tab.
madarchod.
rcm
(randi chudakar margai)
oye chutiye tere paas aur kaam nahi hai kya.
Gahlot bhai tusi kuchh aur kaam dekh le, oye chutiye tere paas aur kaam nahi hai kya.
satya prakash ko nude karke gadhe par baitha kar ,face mobil se kala kar ,jute ka mala pahna kar pure bharat me gumana chaiye thaki is madharchod ko pata chale what kind of unity do rcm people have and how rcm bring revolution by making more than 1crore people employed.rcm soon opened and such bullshit,motherfucker mouth would remain shut down for forever.its the need of hour to stand up against such irony.u all people should go delhi and raise the voice of croud .
“उष्ट्राना विवाहेतु गर्दभा गीत गायन्ति”
यानि कि जब बड़े ऊंट (टी सी) बड़ा विवाह (ठगी) करके बड़ी ससुराल (जेल) जाते हे तो उनके शार्गिद गधे (पिन अछिवर) इसी तरह कि भाषा के गीत चिल्ला-चिल्ला कर गाते हे.
और जब गीदड़ो की मौत आती हे तो वे शहर (दिल्ली) की तरफ भागते हे.
उपरोक्त बाते कई ग्रंथो में लिखी हे लेकिन आपने कभी ग्रन्थ पढ़े हो तो? आप तो RCM कालेज के डिप्लोमा होल्डर हे और ठगों की कोलेज में क्या सिखाया जाता हे यह आप बयां कर ही रहे हे.
ईश्वर आपको सद्बुधी दे!
Satya prakashji us list ko bhi ujagar karo , jisame loyalti dra nikalata tha.
jinako axident bimaa mila unaki, jinaka swasthy thik huaa,
in sabaki list jari kare
ye bhi likho ab tak rcm ne kitana banta .
प्रजापत भाई आप चिंता न करे, शुक्र हे कि आपने यह तो माना कि कंपनी में लोटरी, चिटफंड निकलती थी. प्रथम से ले कर अंतिम तक की सारी लिस्टे हमारे पास हे जिसे पूरा देश देखेगा कि किस तरह प्रथम ड्रो में करीब 2500 लोगो को 51000/- रुपये दे कर कंपनी ने इस बड़ी ठगी के लिए अपने पक्ष में पुरे देश में माहोल बनाया जिसे मूल प्लान पूरा ही बदल कर अंतिम लिस्ट में केवल 406 सदस्यों को ही 11000/- दिए गए यदि मूल प्लान को जारी रखा जाता तो नेटवर्क के सिस्टम के हिसाब से उत्तरोत्तर बढती हुई संख्या 10000 सदस्यों को 51000/- प्रति माह से भी ज्यादा पार हो जाती.
और रही बात लोगो को कई तरीके से धन बाँटने की तो में तुलनात्मक तौर पर डाकू मान सिंह, डाकू पान सिंह तोमर को भगवान मानूंगा क्योकि वे अन्याय से धनी बने लोगो को लूट कर गरीबों में बाटते थे लेकिन यहाँ तो गरीबो को लूट कर अमीरों में बांटा जाता था और वो भी बहुत कम हिस्सा ज्यादा हिस्सा तो सरदार डाकू ही रखता.
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Saathiyo Vijay RCM
Hum sabhi log RCM ke sachhe sewak hain is liye hamein aisa koi kaam naheen karna hai jo RCM hamein nahin sikhata. Koi kuch bhi likhta rahe use likhne dein. Hum to bas poori imaandaari se RCM ke liye kaam karte rahein. Hum sab milkar khuda se yehi dua karein ki RCM jald shuru ho jaaye taaki hum apni poori taakat lagakar kaam kar sakein aur duniya ko ye dikhadein ki RCM kaise is desh mein \Aarthik Aazaadi\ laaraha hai. Jo log RCM ke khilaaf apni bhadaas nikaal rahe hain unhein oopar wala samajh de. Satish Pandit ji kahte hain ki \Main Switch\ to oopar wale ke haath mein hai. Jo Jaisa kar raha hai use vaisa hi fal milne waala hai. Jo log RCM ke khilaaf likh rahe hain unhein pata nahin hai ki vo bhi RCM ke dost hain tabhi to RCM se judi sites ko dekhte hain aur uspar apne comments bhi likhte hain. Ye kisi chamatkaar se kam nahin ki RCM apne dushmano ko bhi dost banaata jaa raha hai aur unhein RCM ki khabron me dilchaspi lene par majboor kar rahaa hai. Humein aise logon ko bura bhala kahne ke bajaaye unka shukriya ada karna chaahiye. Unke liye RCM ki taraf se ek sher arz hai.
\Aaj to fir har ik simt se patthar barse,
Main to samjha tha mere chahne wale kum hain.\
Saath hi jo log RCM ke khilaaf hain unse ek guzaarish bhi hai.
\Dushmani jumkar karo par itni gunjaish rahe,
Jab kabhi hum dost banjayen to sharminda na hon\
Agar kuch galat likh diya to maafi chahhti hoon.
Vijay RCM
Mrs. Roshan Shakeel
Royalti Achiever
Dehradun
RCM का पूरा सच जानने के लिए पहले विजिट करें : rcmmanch.blogspot.com
satya prakash, i think tu kis kute ki paidaish hai jo bar bar yek hi blog sab gagh tag kar raha hai .tera bap kuta hoga jiska dum bar bar gukane par bhi gukta nahi hoga,sayed tu uski paidaish hai samga satya prakash.rcm soon opened u motherfucker wd remain sailent for forever
आप जैसे लोगो ने पूजनीय महात्मा गाँधी और सम्मानीय श्री अन्ना हजारे के लिए भी ऐसा ही कहा था, लेकिन आप भूल गए कि बापू के अमर बचन यह थे “जंहा सत्य हे वहां ईश्वर हे”
“उष्ट्राना विवाहेतु गर्दभा गीत गायन्ति” आप जैसे लोगो के लिए यह कहावत सटीक बैठती हे.
यानि कि जब बड़े ऊंट (टी सी) बड़ा विवाह (ठगी) करके बड़ी ससुराल (जेल) जाते हे तो उनके शार्गिद गधे (पिन अछिवर) इसी तरह कि भाषा के गीत चिल्ला-चिल्ला कर गाते हे.
और जब गीदड़ो की मौत आती हे तो वे शहर (दिल्ली) की तरफ भागते हे.
उपरोक्त बाते कई ग्रंथो में लिखी हे लेकिन आपने कभी ग्रन्थ पढ़े हो तो? आप तो RCM कालेज के डिप्लोमा होल्डर हे और ठगों की कोलेज में क्या सिखाया जाता हे यह आप बयां कर ही रहे हे.
सिर्फ तीन महीने से आपको कमीशन नहीं मिला तो आप की यह हालत हो गयी हे, आपने सार्वजनिक जीवन की सारी लाज-शर्म छोड़ दी हे तो अगर तीन साल हो जायेंगे तो एसा लगता हे कि आप अपनी खानदानी मर्यादा को भी छोड़ कर आप नंगे हो कर सडको पर नाचेगे.
ईश्वर आपको सद्बुधी दे!
Dear Satya ji ,
God bless you my dear brother. In SAMAAJj different people you would find .Ek bha jo MAA ki puja karta ha aur ek bho jo MAA ka mazaak karata ha.As one beautiful story is there : In KALIYUGA one of your criticiser was loving to one beautiful girl but girl was not faithful to that boy and inturn one day this girl asked that boy bring HEART of your mother which he expressed this desire to his mother which happily she accepted.So that criticiser removed the heart of his mother and started running towards that girl. But in hurry that gentleman fell down and heart of his mother fell little away. Suddenly voice came from the heart BETA LAGI TOO NAHIAN.Any way that criticiser with out careing the voice of that heart started running towards that girl.On reaching in front of her he offered her the heart of his mother.Girl got angry and cursed that criticiser and advice him never dare enough to come in front of her as he proved useless son of his mother and how can he prove good lover to her.In conclusion one side he lost his mother and other side girl as well.
कामिनी जी,
आपने माँ के जीवन की जो सच्चाई उस पर कीचड़ उछालने वालों को बताई हे उससे जरुर उन भटके लोगो को राह दिखाई देगी उन्हें यह जरुर समझ में आएगा कि एसा करने वाला एक दिन न घर का रहता हे न घाट का इसी तरह जिस RCM रूपी प्रेमिका के लिए ये यह कार्य कर रहें हे एक दिन वह भी इन मूर्खों को झटक देगी यह बात 100% तय हे.
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धन्यवाद KAMINI JI,
बहुत-बहुत धन्यवाद मेरी हिम्मत बंधाने के लिए. कई दिनों से एसा लग रहा था कि में कंही अभिमन्यु की तरह सत्यधर्म के युद्ध में अकेला नहीं पड़ जाऊ, और ये दुर्योधन के अनेक दुष्ट महारथी मुझ अकेले बालक को चहुँ और से घेर कर मारने में सफल हो जायेंगे लेकिन अब आपका साथ मिलने से लगने लगा हे कि अब अभिमन्यु के साथ दुष्ट महारथी वही किस्सा वापस नहीं दोहरा पाएंगे, में अकेला नहीं पडूंगा और ये मुट्ठी भर ठग लोग एक करोड़ पचास लाख लोगो को अपनी दर्द भरी आवाज को बाहर आने से नहीं रोक पायेगे.
इन ठगों ने उनके होटो को पहले सिल रखा था यह डरा कर कि सही बात बोलोगे तो तुम्हारी आई डी टर्मिनेट करा देंगे और लगता हे कि अब इतना कुछ हकीकत सामने आने के बाद सिले होट हिम्मत जुटा कर अपने वे डर के टांके तोड़ पा रहे हे, वे सब अब नपुंसक नहीं हे. उन ठगों को अपना ही रचित वह गीत याद नहीं रहा जिसमे उन्होंने लिखा था : -
में चला था अकेला, बढ़ता गया कारवां.
हर कदम पर मिला, साथी एक नयाँ…….
आपके मुझे साथ देने पर लगता हे एक दिन यही गीत उन्ही ठगों को सजा दिलाने का उन्ही के विरुद्ध हथियार बन जायेगा. जिस तरह नेटवर्क सिस्टम में शरुआत सिर्फ एक सदस्य से होती हे जो बादमे अनेक सदस्यों, परिवार में बदल जाती हे ठीक उसी तरह आप मेरे ब्लॉग का पता rcmmanch.blogspot.com अपनी डाउन लाइन, मित्रो, RCM पीड़ितों आदि को SMS, e-mail, पत्र आदि से दे कर अनेक लोगो को RCM का सत्य बताने, उन्हें न्याय दिलाने का पावन कार्य कर सकते हे.
इसके साथ ही प्रिय मित्र, अपने कमेन्ट को यदि आप ब्लॉग rcmmanch.blogspot.com पर भी देंगे तो बड़ी ही एक और हमारे पर मेहरबानी होगी क्योकि ये ब्लॉग वाले हमारे सच को पचा नहीं पाएंगे और हमारे सन्देश को डिलेट कर देंगे.
रोजगार सृजन में अहम हो सकती हैं डायरेक्ट सेलिंग कंपनियां
Courtesy: Dainik Jagran, Delhi – 19 March 2011
दोस्तों,
देनिक जागरण द्वारा दी गयी उपरोक्त खबर आज के सन्दर्भ में बड़ी ही महत्वपूर्ण हे, हमारे देश के तेजी से विकास एवं हर बालिग़ को न्यायप्रद रोजगार देने के लिए अच्छी, मजबूत एवं कानून सम्मत “डायरेक्ट सेलिंग उद्योग कंपनियों” की आज सख्त जरुरत हे.
ऐसी कम्पनियाँ जो कि “एक सबके लिए, सब एक के लिए” के सहकारिता के मानद सिद्धांत पर कार्य करती हो एवं इसी सिद्धांत को ध्यान में रख कर कानूनन रजिस्टर्ड हो एवं जिनके द्वारा निर्मित, विक्रय किये जाने वाले उत्पाद की क्वालिटी उपभोक्ताओं के हित के लिए बनायी गयी तृतीय पक्ष संस्थाओं से प्रमाणित हो और वे वास्तव में सभी सदस्यों को उनके कार्यानुसार प्रतिफल देने के लिए वचनबद्ध हो.
ऐसी कंपनियों का बिजनस प्लान भाई-भाई को आपस में लड़ाने वाला न हो बल्कि पूरे देश में आपसी सोहाद्र बढाने का सचमुच में योगदान करता हो, हरेक सदस्य के द्वारा पूरी न की जा सकने वाली शर्तो से उलझाया हुआ न हो, जिसमे भ्रष्टाचार का कंही नामो-निशान भी न हो, उत्पादों का विक्रय मूल्य लागत से बहुत ज्यादा न हो कर वाजिब दाम पर हो.
साथियों, आज नेटवर्किंग का कार्य हमारे लिए नया नहीं हे और प्राय हम सबने इस तरह की कई कंपनियों का कार्य कर के खट्टे-मीठे अनुभव भी प्राप्त किये हे. आय में लाभ-हानि हो सकती हे लेकिन अपने-अपने कार्य शेत्र विशेष, स्थान विशेष में प्राप्त अनुभव, ज्ञान अनमोल होते हे जो कभी नष्ट नहीं होते हे.
आप अपने अनुभवों के आधार पर एक अच्छी डायरेक्ट सेलिंग नेटवर्किंग कंपनी, संस्था के बिजनस प्लान में क्या-क्या जरुरी चीजे और केसे होनी चाहिए के बारे में अपने सुझाव, सलाह संषेप या विस्तार में यदि इस मंच की इस पोस्ट पेज (सर्वे हिताय सर्वे सुखाय कंपनी) के कॉमेंट बॉक्स में देंगे तो एक “सर्वे हिताय, सर्वे सुखाय” को ध्यान में रख कर एक नयी कंपनी की सरंचना, स्थापना आसानी से की जा सकेगी जो कानून सम्मत भी हो और आप सभी को सर्वमान्य भी हो.
आशा हे की देश हित में आप अपने सुझाव, विचार इस पोस्ट के पेज “सर्वे हिताय सर्वे सुखाय कंपनी” पर जरुर कॉमेंट करेंगे.
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आपका हितेषी
सत्य प्रकाश
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DEAR S.P JEE , RCM SEWAK NE MLM KANUN KE LIYE JO BHI KIYA , SNSAD BHAWAN SE AAM JANTA ACCHI TARH SE JANTE HAY. RCM SAWDESI HAY,YE BHARAT HI NAHI PURE DUNIYA ME MLM PAR RAJ KAREGI. AAP HAMARE SATH CHL KAR TO DEKHO……………………… SARBO HITAY SARBO SUKHAYE, KE LIYE AAP KA APNA RCM. ……………………JAY RCM…………………….JAY BHARAT…………………………..