RCM HAWAN IN JAIPUR ON 4 MAR 2012

Comments

  1. bharosa says

    Dear All,

    Bahut acchha hai ki Prashashan sadbudhi yagya ho raha hai, par mera sujhav hai ki MLM or RCM ke existing members ke liye yeh yagya jayada jaroori hai taaki who ise tarah ke fuddu dhandho ko chor kar kuch constructive kam kare. Mere bat ka bura mat manana kyuki RCM ne har mahine aur jindagi bhar lakho ke sapne to dikha hi rakhe hai to aur kam karna badha mushkil hai. Fir bhi salah deta huin( man mare to manana) dekho agar jindagi bhar baith ke khana hai to kisi bhi life insurance company ke agent ban kar kuch sal mahant karo to yeh jaroor safal ho sakta hai. RCM main to ab jindagi bhar TC ji jail mein baith kar khaeyenge

    • s p gehlot says

      दोस्तों होली के पर्व की आपको शुभ कामनाएँ.
      आज हमारे भारत देश भर में होने वाले सबसे बड़े यग्य में ठगों, घोटालेबाजों, लुटेरों, भ्रस्टाचारियों के राक्षसी ‘होलिका’ की तरह जल कर भस्म हो जाने और सच्चे, ईमानदार लोग ‘प्रहलाद’ की तरह जिंदा रह जाये की कामनाओं के साथ आहुति दे ताकि देश की आम जनता वास्तविक “आर्थिक आज़ादी” की सांस ले सके.
      आपका शुभचिंतक
      एस पी गहलोत

    • Satya Prakash says

      आरसीएम बिजनस 100 % इन्वेस्टमेंट चिटफंड, मनी सर्कुलेशन पिरामिड स्कीम व लोटरी सिस्टम पर आधारित था

      साथियों, मुख्यत कपड़ा बुनने की कंपनी के निदेशक टी. सी. छाबड़ा ने खुद व अपने परिवार को अरबपति बनाने के लिए बड़ी ही शातिर तरीके से एक के बाद एक नित नयी स्कीमों का ऐसा ताना-बाना बुना कि उपरी तौर पर भोले-भाले ग्रामीणों को क्या पढ़े-लिखों को भी यही लगता कि कंपनी अपने साथ जुड़ने वाले मेम्बर्स को बिना बिचोलियों के वाजिब दर पर सीधा सामान बेच रही हे और यदि वे मेम्बर्स अन्य लोगो में इस बात का प्रचार कर के उन्हें भी अपने साथ कंपनी का यदि सदस्य बना दे और वे सभी कंपनी का सामान खरीदना-बेचना शरु कर दे तो कंपनी उन्हें अपने बनाये बिजनस प्लान के नियमानुसार इस कार्य का उन्हें पारिश्रमिक भी देगी इसके साथ ही उनकी स्वयं की प्रति माह होने वाली खरीद और लायी गयी नई जोइनिंगो के आधार पर स्कीम के मुताबिक पॉइंट बनेंगे और हर 10 पॉइंट हो जाने पर जो 1000 /- रुपये का कमीशन सामान्यत इस स्कीम से पहले बनता था उसमे से 250/- रुपये (बाद में इसे भी 500/- कर दिया गया) “लोयल्टी बोनस” फंड के लिए काट कर शेष 750/- रुपयों (बाद में इसे भी 500/- कर दिया गया) का नियमानुसार कटोतिया कर उसके आरसीएम बिजनस एकाउंट में और तत्पश्चात इस एकाउंट में कुल 500/- रुपये हो जाने पर अगले माह तक उसके बेंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जायेगा.

      कंपनी ने जब यह “लोयल्टी बोनस” का फंडा बनाया तब मुख्यतः यह कहा गया कि एक निर्धारित तिथि तक कंपनी में जितनी भी “लोयल्टी बोनस” आइडिये आ जाएगी उनकी लाटरी निकाल कर वरीयता सूची बनायीं जाएगी और इस सूची में हर क्लब सदस्य के डाउन में निम्न सदस्यों की संख्या होने पर उन्हें उस फंड में से उनके लेवल अनुसार निम्न प्रकार से भुगतान किया जायेगा :-

      1 लेवल – नीचे 4 सदस्य हो जाने पर – 250/- रूपए

      २ लेवल – 4 के नीचे 16 सदस्य हो जाने पर – 750/- रूपए

      ३ लेवल – 16 के नीचे 64 सदस्य हो जाने पर – 5000/- रूपए

      ४ लेवल – 64 के नीचे 256 सदस्य हो जाने पर – 51000/- रूपए

      और यह वरीयता सूची तय हो जाने के बाद क्लब सदस्य को इस “लोयल्टी बोनस” की अपनी सदस्यता बरक़रार रखने के लिए हर माह कम से कम 1000/- रुपयों का सामान अनिवार्य रूप से खरीदना पड़ेगा जिस पर फिर पॉइंट बनेगे और फिर 10 पॉइंट हो जाने पर जो 1000 /- रुपये का कमीशन बनेगा जिसमे से 500/- रुपये “लोयल्टी बोनस” फंड के लिए काट कर शेष 500/- रुपयों का नियमानुसार कटोतिया कर उसके आरसीएम बिजनस एकाउंट में और तत्पश्चात इस एकाउंट में कुल 500/- रुपये हो जाने पर अगले माह तक उसके बेंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जायेगा व जिस माह उपरोक्त टेबल के अनुसार सदस्यों की संख्या उसकी जिस “लोयल्टी बोनस” आई डी के डाउन में हो जाएगी उस पर सदस्यों की संख्यानुसार बनने वाली “लोयल्टी बोनस” राशी का भुगतान भी किया जायेगा साथ ही मीटिंगों में कंपनी के कर्ताधर्ताओं एवं लीडरों द्वारा यह प्रचार भी किया गया कि इस “लोयल्टी बोनस” सिस्टम से जुड़ने वाले हर क्लब सदस्य को शीघ्र ही ये सभी लाभ प्राप्त हो जायेंगे.

      यह कंपनी के द्वारा जारी कि गयी मुख्य “लोयल्टी बोनस” स्कीम थी जिसमें बाद में समय-समय पर कंपनी ने अपने फायदे के लिए इसमें कई नियम-उपनियम थोंपे एंव निश्चित संख्या हो जाने पर भुगतान करने वाली अपनी बात को गोल करके एक लोटरी सिस्टम ईजाद किया गया एंव इस “लोयल्टी बोनस” फंड में से लोटरी के भाग्यशाली क्लब विजेताओं को तीन तरह से क्रमश 51000/-, 5000/-, व् 1000/- रुपयों का लाभ देना शरु किया गया वरीयता से लाभ देने की बात को ठन्डे बस्ते में डाल दिया गया. फिर कुछ समय बाद कंपनी के निरंकुश कर्ताधर्ताओं ने इस लोटरी योजना के भुगतान को “लोयल्टी बोनस” फंड से देने की बजाय कंपनी के मासिक बिजनस वाल्लयुम के 5% फंड से जोड़ दिया जिसमे इंश्योरेंस और नयी जोइनिंग का बिजनस वाल्लयुम सम्मलित नहीं था, कंपनी ने अपने प्लान चेंज करने का सफ़र जारी रखा और लोटरी का प्रथम पुरस्कार की राशी को 51000/- से घटा कर 11000/- कर दिया यही नहीं मासिक बिजनस वाल्लयुम के 5% फंड को भी घटा कर 4- 3% तक कर दिया गया.

      इस तरह मुख्य “लोयल्टी बोनस” स्कीम में इन्वेस्टमेंट* पर निश्चित तौर पर कम समय में लाभ मिलेगा का आधार, भरोसा दिला कर कंपनी ने लाखों की संख्या में नए सदस्य और “लोयल्टी बोनस” सदस्य बनाये बाद में पूरी तरह से स्कीम को चेंज कर के उन लाखों लोगो के साथ धोखाधडी व ठगी की हे.

      * स्कीम में इन्वेस्टमेंट :- किसी भी व्यक्ति या सदस्य को उसको दी जाने वाली भुगतान योग्य धनराशी में से जबरदस्ती कुछ या आधी राशी कंपनी की स्कीम के लिए काट कर भुगतान करना में काटी गयी धनराशी एक तरह से कंपनी द्वारा अपनी स्कीम में उस व्यक्ति से कराया गया इन्वेस्टमेंट ही था और छल से कराया गया एसा इन्वेस्टमेंट जिसमें उस व्यक्ति की इक्छा-अनिक्छा का कोई महत्व ही नहीं था क्योकि उसके द्वारा कंपनी के बिजनस प्लान के अनुसार लाभ लेने के लिए हर माह खरीददारी करनी अनिवार्य थी और खरीददारी करने पर एक न एक दिन 10 पॉइंट बनने ही थे अंत “लोयल्टी क्लब” में उसका इन्वेस्टमेंट होना ही था, उसके चाहने न चाहने का कोई विकल्प कंपनी ने रखा ही नहीं था. इस तरह से आरसीएम बिजनस 100 % इन्वेस्टमेंट चिटफंड, मनी सर्कुलेशन पिरामिड स्कीम व लोटरी सिस्टम पर आधारित हो गया था जो की गेर क़ानूनी हे.

      उपरोक्त बातें सारांश में लिखी गयी हे इसके विस्तृत प्रमाण के लिए हम आरसीएम कंपनी के निदेशक टी. सी. छाबड़ा और अधिकारीयों के द्वारा लिखे गए सभी “सेवक संवाद” को ऑन लाइन शीघ्र ही जारी कर रहें हे, कंपनी की उपरोक्त स्कीम से किस प्रकार लाखों की संख्या में लोग ठगे गए और यह कंपनी शुरू से ही हर तरह से हर स्तर पर आम अवाम जन को किस प्रकार ठग रही थी इस बात के भी शीघ्र और भी कई खुलासे किये जायेंगे ताकि आमजन लीडरों के बहकावे में नहीं आये और उन्हें क्या करना हे इस बात का सही निर्णय लेवे.

      धन्यवाद

      सोजन्य से :- सत्य प्रकाश
      Pl visit for more detail : rcmmanch.blogspot.com

    • Satya Prakash says

      RCM कंपनी शुरू से ही अपने सक्रीय सदस्यों की मनघडंत, फर्जी विशाल संख्या बता कर नए लोगो की जोइनिंगे ले कर ठग रही थी

      दोस्तों, मनुष्य के स्वभाव की एक कमजोरी हे कि वह जहां ज्यादा लोग किसी कार्य या विचार से सहमत होते हे वहां वह अपने स्वयं के विवेक से निर्णय करने की बजाय लोगो की विशाल संख्या के विचार या कार्य से प्रभावित हो कर उनके पक्ष में अपना निर्णय करता हे.

      मनुष्य की इसी स्वाभाविक कमजोरी का श्री 420 टी सी जी ने भरपूर फायदा कंपनी के शुरूआती दिनों से ले कर बंद होने के कगार पर पहुँचने तक सक्रीय सदस्यों की गलत संख्या बता कर यानि की झूट बोल-बोल कर उठाया. लीडर लोग अपनी हर मीटिंग में पहले भी इस झुटी संख्या को जोर दे दे कर हाई लाईट करते थे और अब भी मीडिया, सरकार, न्यायपालिका, आम जनता को बेवकूफ बनाने से बाज नहीं आ रहे हे, इनके द्वारा कही जा रही एक करोड़ पचास लाख RCM सक्रीय सदस्यों की संख्या पूरी तरह से बकवास हे. हकीकत में इस संख्या का 5% भी सक्रीय सदस्य नहीं हे और १% सदस्यों को ही आय हो रही हे 99% सदस्य अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हे.

      एक छोटा सा उदाहरण पेश हे :-

      दिल्ली के चोर बाजार या हाट बाजार में चतुर ठग व्यापारी 200 का माल 100 में चिल्ला-चिल्ला कर बेच रहा होता हे और उसके ठेले के चारों तरफ 5-10 जनों की भीड़ इक्कठा हुई हुवी होती हे और उनमे से कई जने 100/- दे कर वह माल खरीद रहे होते हे, ऐसे में भीड़ देख कर और उनको खरीददारी करते देख कर और कंही सारा माल समाप्त नहीं हो जाए बाजार में आये इस गोरखधंधे से अनजान कुछ लोग भी 100 दे कर सामान खरीद कर खुद को होशियार ग्राहक समझते हुए अपने घर को चले जाते हे.

      अब देखने में तो यह बड़ी सामान्य सी बात हे लेकिन इस तरह की दुकानदारी में वास्तविकता यह थी कि वे पहले से खरीददारी कर रहे 5-10 जनों की भीड़ फर्जी थी, वे उस ठग गिरोह के ही सदस्य थे और उनकी देखा-देखी अन्य लोगो ने 50/- की कीमत के सामान के 100/- दे दिए.

      ठीक इसी तरह RCM में भी कंपनी और लीडरों के द्वारा सदस्यों की फर्जी संख्या बता कर शुरू से ही ठगी का कार्य बदस्तूर चालु था.

      इसी पेज पर संख्या की गणित शीघ्र बतायी जायेगी अन्तह कृपया देखते रहे……………………..rcmmanch.blogspot.com

    • Satya Prakash says

      रोजगार सृजन में अहम हो सकती हैं डायरेक्ट सेलिंग कंपनियां
      Courtesy: Dainik Jagran, Delhi – 19 March 2011

      सरकार ने कहा है कि वर्ष 2022 तक देश में रोजगार के 50 करोड़ नए अवसर पैदा करने के लक्ष्य में डायरेक्ट सेलिंग कंपनियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। फिलहाल इस क्षेत्र में काम कर रहे कर्मचारियों में 70 फीसदी महिलाएं हैं। यह उद्योग इस समय 49,400 करोड़ रुपये का है। वर्ष 2013 तक इसके 71,500 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। योजना और संसदीय राज्य मंत्री अश्विनी कुमार ने भारत में डायरेक्ट सेलिंग उद्योग पर शुक्रवार को एक रिपोर्ट जारी की। इसे इक्रियर (आइसीआरआइईआर) और इंडियन सेलिंग एसोसिएशन द्वारा तैयार किया गया है। सीधी बिक्री का समाजिक और आर्थिक प्रभाव :एक प्रोत्साहन नीति की जरूरत रिपोर्ट को जारी करते हुए कुमार ने कहा डायरेक्ट सेलिंग इस क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं को सशक्त कर रहा है। यह क्षेत्र सरकार के लिए 50 करोड़ रोजगार के अवसरों के सृजन के राष्ट्रीय लक्ष्य की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में अधिक लोगों की जरूरत होती है। इसलिए यह समावेशी विकास और समृद्धि के ऊपर से नीचे की ओर जाने के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में सीधी बिक्री का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2003 से 2010 के दौरान इसमें 60 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। ऐसे में इस उद्योग की वृद्धि दर को बरकरार रखने के लिए सरकारी हस्तक्षेप की जरूरत है। इसके लिए एक अलग मंत्रालय बनाया जाना चाहिए और कानून के जरिए इसकी निगरानी की जानी चाहिए। वर्ष 2001-02 में इस क्षेत्र में दस लाख लोग कार्यरत थे जो वर्ष 2009-10 में 30 लाख हो गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में डायरेक्ट सेलिंग का वर्गीकरण अभी भी अस्पष्ट है। इसकी परिभाषा स्पष्ट करने की जरूरत है ताकि इस क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रवाह हो सके। रपट के मुताबिक इस क्षेत्र को 43 प्रतिशत आमदनी प्रथम श्रेणी के शहरों से होती है। मगर कंपनियां अब नए ग्राहकों की खोज में छोटे शहरों और गांवों की ओर रुख कर रही हैं। देश में इस समय एमवे इंडिया, ओरीफ्लेम, टप्परवेयर, एवन ब्यूटी प्रॉडक्ट्स, के-लिंक हेल्थकेयर, 4लाइफ ट्रेडिंग इंडिया, मैक्स न्यूयार्क लाइफ इंश्योरेंस, मोदीकेयर जैसी कंपनियां डायरेक्ट सेलिंग कारोबार में सक्रिय हैं। विश्व स्तर पर सीधी बिक्री क्षेत्र का उदय 20वीं सदी की शुरुआत में हुई लेकिन इसने 1980 के दशक में रफ्तार पकड़ी। वहीं भारत में यह क्षेत्र 1980 के दशक में शुरू हुआ और 1990 में विदेशी कंपनियों के भारत में प्रवेश के साथ इस क्षेत्र में गति आई|

      दोस्तों,

      देनिक जागरण द्वारा दी गयी उपरोक्त खबर आज के सन्दर्भ में बड़ी ही महत्वपूर्ण हे, हमारे देश के तेजी से विकास एवं हर बालिग़ को न्यायप्रद रोजगार देने के लिए अच्छी, मजबूत एवं कानून सम्मत “डायरेक्ट सेलिंग उद्योग कंपनियों” की आज सख्त जरुरत हे.

      ऐसी कम्पनियाँ जो कि “एक सबके लिए, सब एक के लिए” के सहकारिता के मानद सिद्धांत पर कार्य करती हो एवं इसी सिद्धांत को ध्यान में रख कर कानूनन रजिस्टर्ड हो एवं जिनके द्वारा निर्मित, विक्रय किये जाने वाले उत्पाद की क्वालिटी उपभोक्ताओं के हित के लिए बनायी गयी तृतीय पक्ष संस्थाओं से प्रमाणित हो और वे वास्तव में सभी सदस्यों को उनके कार्यानुसार प्रतिफल, लाभ देने के लिए वचनबद्ध हो.

      ऐसी कंपनियों का बिजनस प्लान भाई-भाई को आपस में लड़ाने, बांटने वाला न हो बल्कि पूरे देश में आपसी सोहाद्र बढाने का सचमुच में योगदान करता हो, हरेक सदस्य के द्वारा कभी भी पूरी न की जा सकने वाली शर्तो से उलझाया हुआ न हो, जिसमे बेईमानी, ठगी, भ्रष्टाचार का कंही नामो-निशान भी न हो, उत्पादों का विक्रय मूल्य लागत से बहुत ज्यादा न हो कर वाजिब दाम पर हो.
      साथियों, आज नेटवर्किंग का कार्य हमारे लिए नया नहीं हे और प्राय हम सबने इस तरह की कई कंपनियों का कार्य कर के खट्टे-मीठे अनुभव भी प्राप्त किये हे. आय में लाभ-हानि हो सकती हे लेकिन अपने-अपने कार्य शेत्र विशेष, स्थान विशेष में प्राप्त अनुभव, ज्ञान अनमोल होते हे जो कभी नष्ट नहीं होते हे.

      आप अपने अनुभवों के आधार पर एक अच्छी डायरेक्ट सेलिंग नेटवर्किंग कंपनी, संस्था के बिजनस प्लान में क्या-क्या जरुरी चीजे और केसे होनी चाहिए के बारे में अपने सुझाव, सलाह संषेप या विस्तार में यदि इस मंच की इस पोस्ट पेज (सर्वे हिताय सर्वे सुखाय कंपनी) के कॉमेंट बॉक्स में देंगे तो एक “सर्वे हिताय, सर्वे सुखाय” को ध्यान में रख कर एक नयी कंपनी की सरंचना, स्थापना आसानी से की जा सकेगी जो कानून सम्मत भी हो और आप सभी को सर्वमान्य भी हो.

      आशा हे की देश हित में आप अपने सुझाव, विचार इस पोस्ट के पेज “सर्वे हिताय सर्वे सुखाय कंपनी” पर जरुर कॉमेंट करेंगे.

      कॉमेंट करने के लिए शीघ्र विजिट करें :- rcmmanch.blogspot.com

      आपका हितेषी

      सत्य प्रकाश

  2. says

    dear bhorosi, apki salah ke liye dhanyabad .apko abhitak mlm aur traditional business me kuch v malung nahi .ap ko sallah hai kripiya internet me kishi v mlm ki bare me jankari lele,athaba apki gali mahalla me koi networker se mille.
    apko haar chis saaf saaf pata chal jayega .agar mlm me dam na hota to america ke 20% log ajj mlm se crore patti na hote .

  3. MR.TUREHA says

    mr.bhim charan jee thanks your precious advice…..
    YEE AMERICA NAHI .AMERICAN MLM NETWORK ME PRODUCT MARKET SE EARLY LOUNCH KIYA JATA HAI .RCM ME TO MARKET ME AANE KE BAAD USKO MARKET SE HIGH RATE PAR CHUTIA DISTRIBUOR KE DWARA DISTRIBUTE KIYA JATA HAI.5-KGM KA WHEAT KA AATA 24-KGM PAR SALE KIYA JATA HAI…….
    rahe networking ke baat link glaycer ka pen RCM me rs-6 ka milta hai .yadi aap yahi pan open market me whole sale par purchase karte hai rs- 3.90 ka hai with tin no tax paid bill par .RCM ME inverter 5900 ka hai .yadi koi new distributor inverter purchase karta hai RCM se rs-5900 ka mile ga,yadi is inverter ko 850 VA +UPS KE SAATH 3800 KA MILEGA WITH TIN NO- BILL .AB question ye hai new distributor ko RS-2100 ka commission aa jaye ga kya….yahe hua 7 september se loyalte plan me.RCM NE 3 MONTH KE EXTRA PURCHASE KE SCHEME SHRU KE JISME LAGATA 3 MONTH KE PURCHASE JARURE THE,LAKIN 3 MONTH KE BAAD RCM NE KAHA KE JO DISTRIBUTOR YA NEW DISTRIBUTOR RS-4000 KE PURCHASE KA LEGE WO BHEE SHAMIL HO GAYE GAEE.AFTER 4 MONTH RCM PHIR SE KAHA KE JO DISTRIBUTOR IS SCHEME ME SHAMIL HONA CHAEE WO RS-5000 KE PURCHASE KAR SAKTEE HAI.RESULT MARCH ME -000000000000.jara vichar kare….YADI RCM KE LOYALTY PLAN ME PAKAD HOTE ..TO MARCH 2011 KA RESULT AANE KE BAAD RCM BUSINESS ME COMPANY KE PURCHASE OR SALE ME GIRAWAT AA GAYE .RCM BAZAR ,PUC ,SHOPPING POINT BAND HO GAYE.KYOKI DISTRIBUTORS NE MARCH KE RESULT KE BAAD RCM KE FROUD GIRI SAMAJ GAYE….IS LIYE DISTRICT BIJNOR SE RCM BAZAR,2-PUC,MANDAWAR PUC,3-KIRATPUR PUC,CHANDPUR PUC,HALDOUR PUC-2,MUZAFFAR NAGAR DISTRICT KE 3 PUC,MUZAFFAR NAGAR RCM BAZAR.ONLY 3 -YEARS KE PERIOD ME BAND HO GAYE ………………T.C .JEE SE REQUEST HAI JARA SOCHE PUC,BAZAR HOLDER KE KYA PROBLEM HOGE……..HUMNE DEKA PUC ,BAZAR WALE AAPNE GHAR ME TUTE HUE BISCUIT,WASTE WASHING POWDER SO MANY WASTE PRODUCT AAPNE NO- PAR BILLING KARTE THE…BACHARE..RCM COMPANY ME IS KA KOI RETURN POICEY NAHI HAI..FMCG PRODUCT JOS SALE NAHI HUAE UNKO DEPOT RETURN NAHI LETA THA,JIS SE VO PRODUCT EXPIRE HO KA NUKSAN PUC/BAZAR HOLDER KO HOTA THA. PAR AAB TO DISTRICT SE RCM KA PATA SAAF HONE PAR DISTRIBUTOR OR PUC /BAZAR WALE HAPPY HAI…THEY SAY RCM CHOSO AAPNA BUSINESS KARO JITNE MEHANAT RCM BUSINESS ME T.C CHABDI KE LIYE KE JITNE MOTIVE NEW DISTRIBUTOR KO KIYA UTNA WORK AAPNA BUSINESS ME KARO – WO AAPKO UCHAI PAR LE GAYE GA.OR WO AAPKA APNA BUSINESS HOGAAA AAP USKE MALIK HOGE.

    • s p gehlot says

      यह भारत हे यहाँ ठगी में हिस्सा पाने वाले गिरोह के सदस्य अपने गिरफ्तार हुए सरदार को छुड़ाने के लिए आमरण अनशन भी कर सकते हें, क्योकि आख़िर सरदार छूटेगा तभी तो उनको ठगी में हिस्सा मिलना वापस शरु हो पाएगा, उन नादानो को क्या पता क़ि जिसे वे रोज़गार समज रहें हें वह हक़ीकत में लाखों लोगों को ठग कर ठगी की कुछ रकम चंद लोगों में बाँटने का खेल था ताकि वे लोग सरदार की वा-वा करते रहें और चंद रुपयो के लालच में सरदार के सेवक बन कर नित नये भोले लोगो, ग्रामीणों को सरदार की एसी नित नयी स्कीमों में फाँसते रहें जिनकी शर्तें एसी कि न तो नौ मॅन तेल हो न राधा नाचें, और वह बेचारे यदि किसी तरह शर्त पूरी करने की स्थति तक पहुँचने वाले ही हो कि सरदार पुरानी स्कीम को बंद कर के नयी स्कीम लागू कर दे, यदि कोई बोलने की हिमाकत करे तो सरदार उसकी आईडी ही टर्मिनेट करदे, आख़िर सरदार की सल्तनत हे तो नियम कायदे सरदार के ही तो होंगे, उन्हे चुनी हुई सरकार के नियम-अधिनियम की क्या परवाह? जिसमें ये सरदार लोग उनकी भावनाओं और मासूमियत को अब भी लूट रहे हें, अगर सरदार पाक-साफ थे तो न्याय व्यवस्था से भागते क्यों फिर रहे थे? और अब जब पकड़े गये तो इतने स्वार्थी निकले क़ि खुद को छुड़वाने के लिये न्यालय में अपने को निर्दोष साबित करने के बजाया मासूमों को धरने और आमरण अनशन करने का आदेश दे रहें हे. कुछ समय पहले तक देश की भलाई सोचने का ढोंग करने वाले सरदार अब गिरफ्तार होने पर पूरे देश में अराजगता फेलाना चाहते हें क्या इससे उनकी अपने देश के प्रति वास्तविक सोच उजागर नहीं होती हे? इस बात को आमजन को भी समजना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति अपने व्यापार से नियमानुसार कर आदि चुका कर प्राप्त हुई शुद्ध आय से अधिक की संपति यदि बनाता हे तो अधिक वाला पेसा क्या हे? और कहाँ से? केसे आया? उसे एक न एक दिन दुनिया को बताना पड़ेगा ही और यह तो सभी जानते ही हे कि भगवान के घर देर हें अंधेर नहीं और उसकी लाठी आवाज़ भी नहीं करती.

      • says

        respected mr.gehlot….
        me aapki baat se sahmat nahi hun…me aapko batana chahta hun ke kisi bhi profession mein chahe wo koi bhi kyun na ho and jo kam aap karte hain chahe wo business ho,,aap kisan ho,chahe aap doctor ho,,ya kisi ki ho sakta hai naukri karte ho….har jagah distribution system hota hai…aap bhi jo kam karke apna or apne bacho ko khana khilate ho wo kisi na kisi ki jeb mein se nikala hota hai ho sakta hai aapki najar mein wo sahi ho and sahi bhi hai kyunki har person ko kam ke badle kuch pane ka adhikar hai matlab use samne wale se paise kamane honge…..tabhi to wo apna jeevan jee payega…or me aapko batana chahunga ki me rcm ki bat nahi kar raha hun system ki bat kar raha hun….jis field pe hum log charcha kar rahe hain usko padhai ki bhasha mein direct sales kahte hain…or kisi vastu ko bechna koi gunah nahi hai…shayad aap bhi kahi na kahi bechne or kharidne walen hain, ho sakta hai…..aadarniya gehlot ji kisi bhi vyakti ki vichardhara ke kuch anuyayi hote hain jaise aapki baaton ko bhi kuch log kahte honge hanji sir sahi kaha aapne…iska matlab ye nahi hai ki aap sardar ho gaye or wo aapke chele ho gaye….to gehlot ji sytem acha hai and ismein koi shak nahi hai ke aane wale samay mein aap bhi ise kubul karenge…agar aapmein adiyal pan nahi hai kyun ki kuch log jante hue bhi swikar nahi karte….dhnyawad…..

        • s p gehlot says

          दोस्त, हज़ारों पीयूसी बंद हो गयी थी क्यो? पीयूसी वाले बर्बाद हो गये थे, सिर्फ़ वही पीयूसी चल रही थी जिसका धारक अपनी नेटवर्क की कमाई भी पीयूसी में उडेल रहा था क्योंकि इतने कम मार्जिन में सभी खर्च निकालने के बाद एक पैसा भी शुद्ध लाभ नहीं हो रहा था हक़ीकत में पीयूसी संचालक को टी सी जी ने बड़ी ही सफाई से बेगारी मजदूर बना रखा था जो रात दिन काम भी करें, पूंजी भी लगाएँ और चू तक नहीं करें, और तो और लीडर लोग तो इस बात की ताक में रहते की कब वह मरणासान पीयूसी बंद हो ताकि वे किसी नये आसामी को पूरे स्टॉक के साथ पीयूसी, बाजार उस स्थान पर दिला सकें ताकि लीडरों और कंपनी की कमाई पर तो कोई आँच नहीं आये मरने वाले भलेहि मरते रहे. हज़ारों पीयूसी जो कि चालू हो कर एक वर्ष से पहले बंद हो गयी उनके तन पर लिपटा आखरी कपड़ा सिक्योरटी जमा के 10000/- रुपय भी टी सी जी को उतारने में शर्म नहीं आयी, और जो समान वापस डिपो में जमा कराया उसका रिफंड भी कई पीयूसी वालों को आज दिन तक नहीं दिया गया, कइयों का लेजर में रातों रात हज़ारों रुपयों का स्टॉक ही गायब कर दिया गया पूछने पर यह बताया गया कि वह समायोजित कर दिया गया जबकि कंपनी एक पेसे का सामान भी उधार नहीं देती थी तो किस बात का समायोजन?
          दोस्त, यदि सीधे तौर पर सभी एक करोड़ पचास लाख लोगों को और इनडॅयेरेक्ट तौर पर करोड़ों लोगों को वास्तव में आरसीएम से फ़ायदा हो रहा था तो जयपुर में इन करोड़ों लोगो की तुलना में मुट्ठी भर लोग ही क्यों जुटे? जबकि इस सेमीनार में तो अंदर आने का प्रवेश शुल्क 30/- या 100/- भी नहीं लिए जा रहे थे जबकि सिस्टम का हवाला दे कर ये लीडर लोग व टीसीजी बेचारे आम डिस्ट्रीब्यूटर की इस बहाने अब तक बेहिसाब जेबे काटते आए थे, अब जब भीड़ जुटानी थी तो इनका सिस्टम-उसूल फुर्र हो गया, वजह बिल्कुल साफ हे कि फ़ायदा इन चंद मुट्ठी भर लोगों जो कि लीडर थे और टीसीजी एण्ड फेमेली को ही हो रहा था और आमजन कंपनी के द्वारा नित नये थोपें गये बिजनस प्लान, शर्तो, स्कीमों, लॉटरी व अंदर ही अंदर होने वाले षड्यंत्र एंव घोटालो के कारण लुट रहा था.
          सरकार को इन लीडरों के खिलाफ भी कार्यवाही करनी चाहिए क्योकि इन्ही की वजह से आमजन गुमराह हुआ और ये लोग भी कंपनी के द्वारा हर स्तर पर की जा रही ठगी के कार्य में हिस्सेदार थे, जब ठगों के सरदार पकड़ लिए गये तो गिरोह के सदस्य खुल्ले क्यों घूम रहें हें? सरकार को भगवान सद्बुधि दे इसके लिये यग्य हवन कर रहें हें इन लोभियों को यह मालूम नहीं कि हवन की वजह से यदि सरकार को इस ठगी प्रकरण में सही सद्बुधि आ गयी तो वे भी हवालात में होंगे.

  4. bharosa says

    Dear Bhim Charan Ji,

    Good to read about your views about MLM. First of all i would like to tell that this is INDIA and not USA, perhaps in the dreams shown by TC you forgot that you are working in a fraud MLM system. May be you are working in this system for very short time i have seen and pursuing these type of frauds since 1989. Belive me these in India are based on only fraud foundations which is thinking of some very sharp / criminal minded people. These persons like TC and his son and other family members have wealth which can not be counted, this you can understand is by making fool of persons like u. Ig they give you commision on your purchase what is bg deal in returning a portion of your maoney to u. PLEASE THINK AND BE IN INDIA AND NOT IN USA BECAUSE USA IS USA AND INDIA IS INDIA.

  5. says

    dear bhorosa ji,
    mlm haar country me ek tarah hi hota hai . rahi baat bharat ki yaha v aisa hi kiya jata hai. ye bazar karne ka naya technolology hai. ye technology amerika se aya hai .kal tak traditional market me manufacturer saman banane k baad bazar me jhor dete the . maal agar company 50 me banate hai profit mila k. yehi saman ham tak yani customer tak pohunch pohunch te 100 rupiya ho jata hai.bitch bazar me business men 50 rupiya busines k naam pe commission kha jata hai.businessmen baithe baithe kama leta hai commission .lekin kavi apne socha hai garib janta jo apna khun pasine ka paisa bazar me deta hai paisa k badli saman chor k aur kuch milta hai ? sayad kuch nahi.parinaam gariv gariv hote jaraha hai amir amir bante jaraha hai .yehi arthik soson hai .dushra naam arthik gulami hai .kav tak haam sab arthik gulami sah te rahenge.kal tak jinki paas paisa tha ohi business kar sak ta hai .likin ajj ki naya technology me paisa nahi samay chahiye. yaha sirf capital naam pe sirf judna hai badle me saman v milega aur sahi maine apne yaha business kiya to yaha commission ki naam pe pet pal ne liye nahi balki sapno ko sakar kar sakta hai.is business ko haar koi kar sakta hai chahe bo budha ho langda ho andha ho.kya sarkar in logo ko rozgar de sakta hai ? yaha haar saman k prachar khud istimal karne k baad hi dushro ko bataya jatahai.agar dushro ko achha lag ta hai to unko v network me jod diya jata hai .kal tak ek prachar me crore rupiya kishi hero heroine milta tha ab yehi paisa amm logo ko milega .ab ap bataye agar is tarah ka business india me chaleto bharat samparn desh me gina jaye ga k nahi ?
    yaha ka atta modern technology pe banta hai.isliye is ka dam jyada hai ,ye bazarwala atta nahi hai .agar viswas nahi to istimaal kaar k dekhiye, maan jayeng ge.ye atta sudh,swasthavardhak chilka yukt hai.
    yaha haar saman pe bharat sarkar ko tax aur vat diya jata hai isliye yaha ka saman bazar k saman se mahga aur achha v ho sakta hai.ajj agar ham har saman pe bharat sarkar ko tax denge to samaj lijiye bharat aisi v mahan ban jayega,tav sayad bohutsare paristhiti pe petrol k dam badhaya nahi jata .kyu ki tav tak bharat sarkar k khazane bhara bhara hi hoga.
    PARIVARTAN SAMAY K MANG NAI .HAR KOI IS TECHNOLOGY KO SAMAJ NA CHAHIYE.KAL TAK HAM NE DUSHRO KA BUSINESS BADHAYA AJ APNA BUSINESS BADHA K JINDE GI SUDHARNA HAI SAPNA KO SAJANA HAI , JAI RCM .

  6. ARMY COMPUTR ACADEMY says

    DEAR NON DISTRIBUTOR
    MLM YE TAKAT KE BARE MAIN MAIN AAP LONGON KO KUCH BATANA CHATA HUIN
    AAP MOB. USE KARTE HAI, AAP YAAD KARIYE AAJ SE APPROX 8 SAAL PEHLE JAB MOBILE AYA , USKE EK SAAL BAAD BAHUT SARI COMPNY BHI APNA-2 MOB. AUR SIM LAUNCH KIYE, AUR AAP NE ISE KHREEDA ,
    AUR APNI JARURAT KE ANUSAR IS PER RECHARGE VOUCHER CHARGE KARAYA AUR AB KAYA US COMPNAY KA MALIK AAP KO PHONE LAGA KE BOLTA HAI KI RECHARGE KARO,
    NAHI NA, KYON KYONKI USE KUCH SAMAYA MAIN APNA NETWORK KHADA KAR LIYA HAI AUR AB AAP KO JARURAT HAI AAP APNI SUVIDHA KE ANUSAR RECHARGE KARTE HAI AUR PAISA EK SYSEM KE MAADHAYAM SE MALIK TAK PAHUCH JATA HAI,
    YE HAI NETWORK
    DEKH LIJIYE MAIN AAP KO AMREIKA KA VEW YAHI DEKHA DIYA
    YADI HAMAIN APNE YAHAN SE GAREEBE HATANI HAI TO MLM KO JANANA AUR SIKHANA PADEGA ,
    AUR YE SAAR KHUBI RCM MAIN HAI
    USKO SAMJHANE KA PRAYAS TO KAR HI SAKTE HAIN
    JAI RCM
    JAI BHARAT

  7. says

    sir,
    C.M.RJASTHAN
    RCM business kharaf hata tho itna din keyse chale am admi burbak hai ?Neta log am admi ko jeetna burbak banaya aisa kum kai nahi kiya.upka pradesh may berajgari kotam hogya?berjojgari banane may tuli hai.up am admi keliya kuch karna chate hai tho jaldijaldi rcm ko chalu kar dijeya hamsab upka dhanyabat karengay.
    J.N.SARKAR

  8. says

    dear ac academy,
    ap network to badhiya se samjha diya.likin yaha jis network ki baat kiya ja raha hai wo clear nani hai .
    yaha marketing network bare me baat ho raha hai .jaise ki traditional business me 4 part hote hai 1.company 2.middleman 3.customer 4.advertisement.50 rupiya me bana saman customer ko 100 me milta hai .faide ki baat kiya jay to faida sirf company aur middle ko jata hai .customer ko sirf saman k siva kuch nahi milta hai .
    RCM k marketing me 2 part hai 1. company 2.
    customer/distributor .yaha middleman aur pracharak nahi hote. faide ki
    baat kiya jay to company ki saath distributor kovi paisa milta hai .ek nirdhist business value k baad distributor ko royalty milta hai jo k kavi na khatm honewala income pidhi dar pidhi ko milta hai .yaha fata fat amir hone
    system nahi hai ,bazar karne k saath kam karna padta hai aur paisa milta hai
    jai rcm.

  9. bharosa says

    Bhim Charan Ji,

    I appreciate your feelings about MLM and RCM. In fact no one will join such sysyems if they are not brainwashed by criminal minded people and same is the case with u. I request to please wait for the RCM to start , may be it can take another 20 to 25 years to start in new name and may be by the grandson of TC.

  10. Indar says

    Takdir walon ko milta h RCM. RCM satya h satya ko pareshan kiya ja sakta h, prazit nahi. april 2012 me fir se hamara parcham lahrayega. JAI RCM JAI BHARAT

  11. DEBASIS DASH says

    AGAR TC JI NE DHOKADADI KI HEY TO KYUN NA SARKAR EK OFFICER DE ISSE CHALANEKE LIYE, JISSE KARKHANA AUR PRODUCTION PHIR SE CHALU HO JAYEGA,PRODUCT MIL PAYEGE,SATH HI SATH LOGOKO ROZI ROTI BHI

  12. s p gehlot says

    दोस्त, आप बिल्कुल सही कह रहे हें, हज़ारों पीयूसी बंद हो गयी थी क्यो? पीयूसी वाले बर्बाद हो गये थे, सिर्फ़ वही पीयूसी चल रही थी जिसका धारक अपनी नेटवर्क की कमाई भी पीयूसी में उडेल रहा था क्योंकि इतने कम मार्जिन में सभी खर्च निकालने के बाद एक पैसा भी शुद्ध लाभ नहीं हो रहा था हक़ीकत में पीयूसी संचालक को टी सी जी ने बड़ी ही सफाई से बेगारी मजदूर बना रखा था और तो और लीडर लोग तो इस बात की ताक में रहते की कब वह मरणासान पीयूसी बंद हो ताकि वे किसी नये आसामी को पूरे स्टॉक के साथ पीयूसी दिला सकें ताकि लीडरों और कंपनी की कमाई पर तो कोई आँच नहीं आये. हज़ारों पीयूसी जो कि चालू हो कर एक वर्ष से पहले बंद हो गयी उनके तन पर लिपटा आखरी कपड़ा सिक्योरटी जमा के 10000/- रुपय भी टी सी जी को उतारने में शर्म नहीं आयी, और जो समान वापस डिपो में जमा कराया उसका रिफंड भी कई पीयूसी वालों को आज दिन तक नहीं दिया गया, कइयों का लेजर में हज़ारों रुपयों का स्टॉक ही गायब कर दिया गया पूछने पर यह बताया गया कि वह समायोजित कर दिया गया जबकि कंपनी एक पेसे का समान भी उधार नहीं देती थी तो किस बात का समायोजन?
    दोस्त, यदि सीधे तौर पर सभी एक करोड़ पचास लाख लोगों को और इनडॅयेरेक्ट तौर पर करोड़ों लोगों को वास्तव में आरसीएम से फ़ायदा हो रहा था तो जयपुर में इन करोड़ों लोगो की तुलना में मुट्ठी भर लोग ही क्यों जुटे? वजह बिल्कुल साफ हे कि फ़ायदा इन चंद मुट्ठी भर लोगों जो कि लीडर थे को ही हो रहा था और आमजन लुट रहा था, सरकार को इन लीडरों के खिलाफ भी कार्यवाही करनी चाहिए क्योकि इन्ही की वजह से आमजन गुमराह हुआ और ये लोग भी ठगी के कार्य में हिस्सेदार थे, जब ठगों के सरदार पकड़ लिए गये तो गिरोह के सदस्य खुल्ले क्यों घूम रहें हें?

  13. bharos says

    Dear Bhim Charan i,

    I am sorry 4 u, thats what i can say for u and people like u , whos brains have been washed by TC, keeep it up and have fait in Rcm AND NOT IN YOUR POWER. pEOPLE LIKE U CAN NOT UNDERSTAND ANY GOOD ADVISE.

    AFTER UR REPLY TO THIS COMMENT I WILL OR REPLY TO U BECAUSE UR BRAIN IS UNDER CONTROL OF CRIMIANAL MINDED PERSON AND U WILL REALISE IT SHORTLY.

    THANKS ANDN LOVE U AS U R FOOLISH INDIAN AND I LOVE ALL FOOLISH INDIAN

  14. says

    s.p. गहलोत इक NMART का बहरूपिया है जो RCM KA गदार है . जो पहले RCM में लोगो को इस्तेमाल किया .और अब मौका परस्त दुबारा फिर से अपने ही लोगो इस्तेमाल करने की सोच रखता है अय्से लोगो को पहचाने इसलिए ये मै जानकारी आप तक पंहुचा रहा हूँ .ये अपने ही भीतर का गदार है .ये और कोई नहीं आप भी इसे पहचान सकते है ये .कोई न कोई अपना दूत भेजकर “अपना ” मेसेज पढने को खबर भेजेगा, .आप खुद अगर उसके विचारो का आंकलन करेगे तो उसका असली चेहरा आप के सामने होगा. ये तो वो लोग है जो अपनी माँ के आचल में भी अनशीलता देखते है . जिस पर थाली पर खाते है उसी पर छेद करते है .

    • s p gehlot says

      दोस्तों होली के पर्व की आपको शुभ कामनाएँ.
      आज हमारे भारत देश भर में होने वाले सबसे बड़े यग्य में ठगों, घोटालेबाजों, लुटेरों, भ्रस्टाचारियों के राक्षसी ‘होलिका’ की तरह जल कर भस्म हो जाने और सच्चे, ईमानदार लोग ‘प्रहलाद’ की तरह जिंदा रह जाये की कामनाओं के साथ आहुति दे ताकि देश की आम जनता वास्तविक “आर्थिक आज़ादी” की सांस ले सके.

      आपका शुभचिंतक

      एस पी गहलोत

  15. Satya Prakash says

    रोजगार सृजन में अहम हो सकती हैं डायरेक्ट सेलिंग कंपनियां
    Courtesy: Dainik Jagran, Delhi – 19 March 2011

    सरकार ने कहा है कि वर्ष 2022 तक देश में रोजगार के 50 करोड़ नए अवसर पैदा करने के लक्ष्य में डायरेक्ट सेलिंग कंपनियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। फिलहाल इस क्षेत्र में काम कर रहे कर्मचारियों में 70 फीसदी महिलाएं हैं। यह उद्योग इस समय 49,400 करोड़ रुपये का है। वर्ष 2013 तक इसके 71,500 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। योजना और संसदीय राज्य मंत्री अश्विनी कुमार ने भारत में डायरेक्ट सेलिंग उद्योग पर शुक्रवार को एक रिपोर्ट जारी की। इसे इक्रियर (आइसीआरआइईआर) और इंडियन सेलिंग एसोसिएशन द्वारा तैयार किया गया है। सीधी बिक्री का समाजिक और आर्थिक प्रभाव :एक प्रोत्साहन नीति की जरूरत रिपोर्ट को जारी करते हुए कुमार ने कहा डायरेक्ट सेलिंग इस क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं को सशक्त कर रहा है। यह क्षेत्र सरकार के लिए 50 करोड़ रोजगार के अवसरों के सृजन के राष्ट्रीय लक्ष्य की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में अधिक लोगों की जरूरत होती है। इसलिए यह समावेशी विकास और समृद्धि के ऊपर से नीचे की ओर जाने के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में सीधी बिक्री का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2003 से 2010 के दौरान इसमें 60 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। ऐसे में इस उद्योग की वृद्धि दर को बरकरार रखने के लिए सरकारी हस्तक्षेप की जरूरत है। इसके लिए एक अलग मंत्रालय बनाया जाना चाहिए और कानून के जरिए इसकी निगरानी की जानी चाहिए। वर्ष 2001-02 में इस क्षेत्र में दस लाख लोग कार्यरत थे जो वर्ष 2009-10 में 30 लाख हो गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में डायरेक्ट सेलिंग का वर्गीकरण अभी भी अस्पष्ट है। इसकी परिभाषा स्पष्ट करने की जरूरत है ताकि इस क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रवाह हो सके। रपट के मुताबिक इस क्षेत्र को 43 प्रतिशत आमदनी प्रथम श्रेणी के शहरों से होती है। मगर कंपनियां अब नए ग्राहकों की खोज में छोटे शहरों और गांवों की ओर रुख कर रही हैं। देश में इस समय एमवे इंडिया, ओरीफ्लेम, टप्परवेयर, एवन ब्यूटी प्रॉडक्ट्स, के-लिंक हेल्थकेयर, 4लाइफ ट्रेडिंग इंडिया, मैक्स न्यूयार्क लाइफ इंश्योरेंस, मोदीकेयर जैसी कंपनियां डायरेक्ट सेलिंग कारोबार में सक्रिय हैं। विश्व स्तर पर सीधी बिक्री क्षेत्र का उदय 20वीं सदी की शुरुआत में हुई लेकिन इसने 1980 के दशक में रफ्तार पकड़ी। वहीं भारत में यह क्षेत्र 1980 के दशक में शुरू हुआ और 1990 में विदेशी कंपनियों के भारत में प्रवेश के साथ इस क्षेत्र में गति आई|

    दोस्तों,

    देनिक जागरण द्वारा दी गयी उपरोक्त खबर आज के सन्दर्भ में बड़ी ही महत्वपूर्ण हे, हमारे देश के तेजी से विकास एवं हर बालिग़ को न्यायप्रद रोजगार देने के लिए अच्छी, मजबूत एवं कानून सम्मत “डायरेक्ट सेलिंग उद्योग कंपनियों” की आज सख्त जरुरत हे.

    ऐसी कम्पनियाँ जो कि “एक सबके लिए, सब एक के लिए” के सहकारिता के मानद सिद्धांत पर कार्य करती हो एवं इसी सिद्धांत को ध्यान में रख कर कानूनन रजिस्टर्ड हो एवं जिनके द्वारा निर्मित, विक्रय किये जाने वाले उत्पाद की क्वालिटी उपभोक्ताओं के हित के लिए बनायी गयी तृतीय पक्ष संस्थाओं से प्रमाणित हो और वे वास्तव में सभी सदस्यों को उनके कार्यानुसार प्रतिफल, लाभ देने के लिए वचनबद्ध हो.

    ऐसी कंपनियों का बिजनस प्लान भाई-भाई को आपस में लड़ाने, बांटने वाला न हो बल्कि पूरे देश में आपसी सोहाद्र बढाने का सचमुच में योगदान करता हो, हरेक सदस्य के द्वारा कभी भी पूरी न की जा सकने वाली शर्तो से उलझाया हुआ न हो, जिसमे बेईमानी, ठगी, भ्रष्टाचार का कंही नामो-निशान भी न हो, उत्पादों का विक्रय मूल्य लागत से बहुत ज्यादा न हो कर वाजिब दाम पर हो.
    साथियों, आज नेटवर्किंग का कार्य हमारे लिए नया नहीं हे और प्राय हम सबने इस तरह की कई कंपनियों का कार्य कर के खट्टे-मीठे अनुभव भी प्राप्त किये हे. आय में लाभ-हानि हो सकती हे लेकिन अपने-अपने कार्य शेत्र विशेष, स्थान विशेष में प्राप्त अनुभव, ज्ञान अनमोल होते हे जो कभी नष्ट नहीं होते हे.

    आप अपने अनुभवों के आधार पर एक अच्छी डायरेक्ट सेलिंग नेटवर्किंग कंपनी, संस्था के बिजनस प्लान में क्या-क्या जरुरी चीजे और केसे होनी चाहिए के बारे में अपने सुझाव, सलाह संषेप या विस्तार में यदि इस मंच की इस पोस्ट पेज (सर्वे हिताय सर्वे सुखाय कंपनी) के कॉमेंट बॉक्स में देंगे तो एक “सर्वे हिताय, सर्वे सुखाय” को ध्यान में रख कर एक नयी कंपनी की सरंचना, स्थापना आसानी से की जा सकेगी जो कानून सम्मत भी हो और आप सभी को सर्वमान्य भी हो.

    आशा हे की देश हित में आप अपने सुझाव, विचार इस पोस्ट के पेज “सर्वे हिताय सर्वे सुखाय कंपनी” पर जरुर कॉमेंट करेंगे.

    कॉमेंट करने के लिए शीघ्र विजिट करें :- rcmmanch.blogspot.com

    आपका हितेषी

    सत्य प्रकाश
    *********

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