Indian Marriage
शादी कोई प्राकृतिक व्यस्था नहीं है | मनुष्य को छोड़ कर प्रकृति में कहीं भी शादी- विवाह जैसी कोई चीज आप को देखने को नही मिलेगा | प्यार करते पशु -पंक्षियों यहाँ तक कि पेड़ पौधों को भी आप देख सकते हैं लेकिन जानवरों में आपने कभी हसबैंड -वाइफ को एक साथ देखा है ? हालाकि कवियों कि कल्पनाओं और कविताओं में या सपने में हमने जरुर पढ़ा और देखा है लेकिन हकिकत में मैंने तो कहीं नही देखा है |
वेश्यावृति शादी का अभिन्न (Byproduct) अंग है | जब तक शादियाँ होती रहेंगीं तब तक वेश्यावृति को कोई रोक नहीं सकता | क्योंकि पुरुष प्राक्रतिक रूप से बहुपत्नीक (Polygamy ) होता है और स्त्रियाँ Monogamy होती है | इसके कारण प्रकति में उपलब्ध है | आप जानते है कि माँ के गर्भ में जब पुरुष के 22 शुक्राणु और स्त्री के 23 शुक्राणु का समागम होता है तो लडके को माँ धारण करती है और जब पुरुष के 23 और स्त्री के 23 शुक्राणु का समागम होता है तो लडकी को माँ धारण करती है |आप यह भी जानते है कि जिस भी तत्व (Elements) के Outermost Orbit में Electron कि संख्या एक निश्चित संख्या 8 से कम होती है वहीं तत्व किसी दुसरे तत्व से Reaction करके एक नये तत्व का निर्माण करता है और जिस तत्व के Outermost Orbit में Electron कि संख्या 8 होती है वह तत्व Inert gas कहलाता है यानि वह Non Reactive होता है |यही कारण है कि स्त्रियाँ इतनी सुंदर , Graceful होती हैं | वे Balance होती हैं | संसार में क्या हो रहा है उनको इसमें ज्यादा दिलचस्पी नही होती है बल्कि इसमें ज्याद दिलचस्पी होती है कि पड़ोसन के घर में एक नई कार आई है , मेरे घर में कब आयेगी , वर्माजी ने अपनी पत्नी के लिए बनारसी साडी ले आये हैं , आप तो कब से कह रहे हो | आदि- आदि | स्त्रियाँअस्तित्वगत होती हैं ,जमीन से जुडी होती हैं और पुरुष तो हमेशा आकाश के तारे गिनने के फिराक में ही रहता है | स्त्री को एक सुंदर पति मिल जाए , उसको सब कुछ मिल गया | इसीलिए भारत में पति को पति-परमेश्वर कहा जाता है |
दोस्तों ! मैं यह बात आपको मानने के लिए नहीं कह रहा हूँ बल्कि इस पर विचार करने के लिए जरुर निवेदन कर रहा हूँ | शादी एक सामाजिक बंधन है | शादी के बिना समाज का अस्तित्व नही हो सकता | आज पाश्चात्य देशों में परिवार टूट रहा है |क्योंकि मनुष्य जाति का विकाश आज एकतरफा हो रहा है | मनुष्य का मानसिक विकास तो रोज हो रहा है लेकिन आज का नवयुवक वर्ग हृदय को, रक्त का मात्र पम्पिंग यंत्र के रूप ही जानता है |क्या आप जानते हैं कि जो साँस आप अंदर ले रहे हैं वह प्राण से भरा होता है और सार तत्व को शरीर पी जाता है | और जो साँस आप बहर छोड़ रहे हैं वह रिक्त खाली कारतूस कि भांति होता है , साँस तो एक वाहन (Carrier) का काम करता है |मरने के ठीक छे महीने पहले साँस कि गति ठीक उल्टी हो जाती यानि जो साँस अंदर से बहर आती है वह प्राण से भरी होती है और जो साँस बाहर से अंदर जाती है वह खाली होती है क्योंकि शरीर अब मरने कि तैयारी कर रहा होता है | इसलिए बुद्ध-महावीर जैसे लोग अपने मरने कि तारीख और टाइम कि भी घोषणा कर देते है |लेकिन यह बात अभी विज्ञानं आधारित समाज को समझ में नही आएगी |क्योंकि यह कोई बहरी खोज Objective नही बल्कि स्वय (Subjective) क़ी खोज है | इसके लिए पढ़ें Meditation for New Generation


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pl. mail me the all kind of this articles
i really hv so much to ask n understand about it how can to pepole live together in a arrange marrige wn they r so different n y in love marriages tension rise wn two pepole knows each odr so wel