भोगो न त्यागो बल्कि जागो
(Live with Awareness)
जब औरतों और लड़कियों के कपड़े छोटे और चुस्त होने लगे तो समझना कि यह सभ्यता अब मरने के करीब पहुँच रही है | और इतिहास इसका गवाह है कि जब भी कोई सभ्यता धार्मिक होती है तो उनके कपड़े लम्बे और ढीले-ढाले हो जाते हैं | साधू-सन्यासियों के कपड़े, चाहे किसी भी धर्म के हों अनयास हीं सादे,लम्बे और ढीले-ढाले नहींहोते हैं |यह हर जमाने में होता है और होता रहेगा | मैं इस मामले में मुस्लिम भाइयों और इस्लाम धर्म को सजदा अदा करना चाहता हूँ |
आखिर ऐसा क्यों हो रहा है ? क्योंकि आज तीन सौ वर्षों में विज्ञान ने मनुष्य जाति को वाह्य रूप से धन्य-धान्य से परिपूर्ण कर दिया है | इस धरती पर यह पहली बार कोई नहीं हुआ है | यह धरती पहले भी कई ऐसी स भ्यताओं को जन्म दे चुकी है | इतिहास इसका गवाह है | लेकिन पिछली सभ्यताओं का विकाश एक सम्यक विधि , वैज्ञानिक तरीकों के माध्यम से हुआ था | पहले के मनीषी और रहस्यदर्शी अपने योग और ध्यान के माध्यम से , अंतर्यात्रा से (Introspection ), मनुष्य के शरीर के साथ साथ मन की चालबाजियों से अच्छी तरह से परिचित थे और वे जानते थे कि मन क्या है और आत्मा क्या है | इसलिए उन्होंने कभी भी मन को आत्मा से ऊपर नही रखा | लेकिन इस शदी में मन पर तो बहुत काम हुआ लेकिन आत्मा के नाम पर तो आज का हर नौजवान हँसता है | आज का युग नौजवानों का युग है , बुजुर्ग लोग तो तिथिवाह्य (Out of date ) हो गये हैं | लेकिन बड़े बूढों का जिस समाज में कद्र नहीं होता है | वह समाज जल्दी हीं विदा हो जाता है | और वह घड़ी इस सभ्यता को निगलने के बहुत करीब आ पहुंची है |इसके लिए GENERATION GAP पर क्लिक करें |
आज तक इस पृथ्वी पर दो तरह के लोग हुए हैं : एक भोग पर जोर देता है और दूसरा त्याग पर | एक कहता है कि जिसने भोगा नही उसका त्याग झूठा होगा | वह त्याग कैसे सकता है ? जिसने जाना हीं नहीं | वह छोड़ कैसे सकता है ?जैसे वेदों के ऋषि कहते हैं ,जिन लोगों ने भोगा, उन लोगों ने हीं त्यागा | जो भोग नहीं सकता वह त्याग कैसे सकता है ? यदि वह त्यागता है तो उसका त्याग झूठा होगा | वह कभी भी मौका मिलते ही भोग में उतर जाएगा | आज साधू संयासिओं के बारे में किसी से छुपा नही है|
दूसरा कहता है जो भोग में गया वह कभी वापस नही आया |वह उसमे इतना लिप्त हो जाता है कि अब उसके लिए छोड़ना लगभग असम्भव हो जाता है | आज का सारा समाज, खास कर नवयुवक वर्ग इसमें आज पूरी तरह लिप्त है | यह भी आज किसी को बताने की जरूरत नहीं है |
दोनों मतों में सच्चियां हैं , मैं इसे स्वीकार करता हूँ लेकिन दोनों आधे – आधे सत्य हैं | अब ये दोनों सिधांत तिथिवाह्य हो गये है | इक्कीसवीं शदी के एक महान मनस्वी और रहस्यदर्शी ओशो का कहना है कि “न भोगो न त्यागो वरन जागो |” Live Here And Now /Live Moment TO Moment और जागरण में कभी अति होती हीं नही है | और जागरण का मतलब होता है, जो भी काम आप करें होश पूर्वक करें ,छोटे – छोटे कामों से शुरू करें जैसे खाएं तो होश पूर्वक, चलें तो होश पूर्वक ,बोलें तो होशपूर्वक जो भी काम करें होश पूर्वक करें | धीरे धीरे आपसे गलती कि सम्भावनाएं कम हो जाएंगी |क्या आप जानते हैं कि जो साँस आप अंदर ले रहे हैं वह प्राण से भरा होता है और सार तत्व (प्राण)को शरीर पी जाता है | और जो साँस आप बहर छोड़ रहे हैं वह रिक्त खाली कारतूस कि भांति होता है , साँस तो एक वाहन (Carrier,Vehicle ) का काम करता है |मरने के ठीक छे महीने पहले साँस कि गति ठीक उल्टी हो जाती यानि जो साँस अंदर से बहर आती है वह प्राण से भरी होती है और जो साँस बाहर से अंदर जाती है वह खाली (Empty) होती है क्योंकि शरीर अब मरने कि तैयारी कर रहा होता है | इसलिए बुद्ध-महावीर जैसे लोग अपने मरने कि तारीख और टाइम कि भी घोषणा कर देते है |लेकिन यह बात अभी विज्ञानं आधारित समाज को समझ में नही आएगी |क्योंकि यह कोई बहरी खोज Objective नही बल्कि स्वय (Subjective) क़ी खोज है | यदि त्वरित गति से कुछ करना चाहते हैं तो अलग से कुछ समय निकालें और ध्यान क़ी अद्यतन विधियों (Latest Method For Meditation)का प्रयोग करें अब पुरानी विधियों से काम नहीं चलेगा | इसके लिए Meditation for New Generation को एक बार पढ़ें |

{ 2 comments… read them below or add one }
Very encouraging and beautiful. kindly keep it up.
PS Jhand,
Kapurthala
IT IS WEARY NICE WEBSITE KS
I LICK YOUR WEBSITE
THANKS FOR YOU
GHANSHYAM SANGHANI