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आरसीएम डायरेक्टर जेल से गिरफ्तार

Courtesy: Dainik Bhaskar, Bhilwara – 29 Feb 2012

नगर संवाददाता. भीलवाड़ा
ठगी के मामले में जेल में बंद मल्टीलेवल मार्केटिंग कंपनी आरसीएम के दो डायरेक्टर त्रिलोकचंद छाबड़ा, उसके बेटे सौरभ छाबड़ा को हमीरगढ़ पुलिस ने प्रोडक्शन वारंट के तहत एक अन्य मुकदमे में गिरफ्तार कर लिया। पिता-पुत्र से पूछताछ की जा रही है।
जांच अधिकारी (एएसपी)राजेंद्र सिंह ने बताया कि मांडल थाने में राजेंद्र बिड़ला की रिपोर्ट पर 15 दिसंबर को दर्ज 9.20 लाख रुपए की ठगी के मामले में पुलिस ने पिता-पुत्र व भागचंद छाबड़ा को 12 फरवरी को गिरफ्तार किया था। इन तीनों को रविवार को रिमांड खत्म होने पर जेल भेज दिया गया था।
हमीरगढ़ पुलिस ने त्रिलोक व सौरभ छाबड़ा को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत दर्ज मुकदमे में गिरफ्तारी के लिए प्रार्थना-पत्र पेश किया। कोर्ट ने मंगलवार को दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए आदेश जारी किए। इसके बाद आरोपियों को जेल से गिरफ्तार कर लिया गया।

 

 

Courtesy: Dainik Lokjeevan, Bhilwara – 28 Feb 2012

Comments

    • Satya Prakash says

      आरसीएम बिजनस 100 % इन्वेस्टमेंट चिटफंड, मनी सर्कुलेशन पिरामिड स्कीम व लोटरी सिस्टम पर आधारित था

      साथियों, मुख्यत कपड़ा बुनने की कंपनी के निदेशक टी. सी. छाबड़ा ने खुद व अपने परिवार को अरबपति बनाने के लिए बड़ी ही शातिर तरीके से एक के बाद एक नित नयी स्कीमों का ऐसा ताना-बाना बुना कि उपरी तौर पर भोले-भाले ग्रामीणों को क्या पढ़े-लिखों को भी यही लगता कि कंपनी अपने साथ जुड़ने वाले मेम्बर्स को बिना बिचोलियों के वाजिब दर पर सीधा सामान बेच रही हे और यदि वे मेम्बर्स अन्य लोगो में इस बात का प्रचार कर के उन्हें भी अपने साथ कंपनी का यदि सदस्य बना दे और वे सभी कंपनी का सामान खरीदना-बेचना शरु कर दे तो कंपनी उन्हें अपने बनाये बिजनस प्लान के नियमानुसार इस कार्य का उन्हें पारिश्रमिक भी देगी इसके साथ ही उनकी स्वयं की प्रति माह होने वाली खरीद और लायी गयी नई जोइनिंगो के आधार पर स्कीम के मुताबिक पॉइंट बनेंगे और हर 10 पॉइंट हो जाने पर जो 1000 /- रुपये का कमीशन सामान्यत इस स्कीम से पहले बनता था उसमे से 250/- रुपये (बाद में इसे भी 500/- कर दिया गया) “लोयल्टी बोनस” फंड के लिए काट कर शेष 750/- रुपयों (बाद में इसे भी 500/- कर दिया गया) का नियमानुसार कटोतिया कर उसके आरसीएम बिजनस एकाउंट में और तत्पश्चात इस एकाउंट में कुल 500/- रुपये हो जाने पर अगले माह तक उसके बेंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जायेगा.

      कंपनी ने जब यह “लोयल्टी बोनस” का फंडा बनाया तब मुख्यतः यह कहा गया कि एक निर्धारित तिथि तक कंपनी में जितनी भी “लोयल्टी बोनस” आइडिये आ जाएगी उनकी लाटरी निकाल कर वरीयता सूची बनायीं जाएगी और इस सूची में हर क्लब सदस्य के डाउन में निम्न सदस्यों की संख्या होने पर उन्हें उस फंड में से उनके लेवल अनुसार निम्न प्रकार से भुगतान किया जायेगा :-

      1 लेवल – नीचे 4 सदस्य हो जाने पर – 250/- रूपए

      २ लेवल – 4 के नीचे 16 सदस्य हो जाने पर – 750/- रूपए

      ३ लेवल – 16 के नीचे 64 सदस्य हो जाने पर – 5000/- रूपए

      ४ लेवल – 64 के नीचे 256 सदस्य हो जाने पर – 51000/- रूपए

      और यह वरीयता सूची तय हो जाने के बाद क्लब सदस्य को इस “लोयल्टी बोनस” की अपनी सदस्यता बरक़रार रखने के लिए हर माह कम से कम 1000/- रुपयों का सामान अनिवार्य रूप से खरीदना पड़ेगा जिस पर फिर पॉइंट बनेगे और फिर 10 पॉइंट हो जाने पर जो 1000 /- रुपये का कमीशन बनेगा जिसमे से 500/- रुपये “लोयल्टी बोनस” फंड के लिए काट कर शेष 500/- रुपयों का नियमानुसार कटोतिया कर उसके आरसीएम बिजनस एकाउंट में और तत्पश्चात इस एकाउंट में कुल 500/- रुपये हो जाने पर अगले माह तक उसके बेंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जायेगा व जिस माह उपरोक्त टेबल के अनुसार सदस्यों की संख्या उसकी जिस “लोयल्टी बोनस” आई डी के डाउन में हो जाएगी उस पर सदस्यों की संख्यानुसार बनने वाली “लोयल्टी बोनस” राशी का भुगतान भी किया जायेगा साथ ही मीटिंगों में कंपनी के कर्ताधर्ताओं एवं लीडरों द्वारा यह प्रचार भी किया गया कि इस “लोयल्टी बोनस” सिस्टम से जुड़ने वाले हर क्लब सदस्य को शीघ्र ही ये सभी लाभ प्राप्त हो जायेंगे.

      यह कंपनी के द्वारा जारी कि गयी मुख्य “लोयल्टी बोनस” स्कीम थी जिसमें बाद में समय-समय पर कंपनी ने अपने फायदे के लिए इसमें कई नियम-उपनियम थोंपे एंव निश्चित संख्या हो जाने पर भुगतान करने वाली अपनी बात को गोल करके एक लोटरी सिस्टम ईजाद किया गया एंव इस “लोयल्टी बोनस” फंड में से लोटरी के भाग्यशाली क्लब विजेताओं को तीन तरह से क्रमश 51000/-, 5000/-, व् 1000/- रुपयों का लाभ देना शरु किया गया वरीयता से लाभ देने की बात को ठन्डे बस्ते में डाल दिया गया. फिर कुछ समय बाद कंपनी के निरंकुश कर्ताधर्ताओं ने इस लोटरी योजना के भुगतान को “लोयल्टी बोनस” फंड से देने की बजाय कंपनी के मासिक बिजनस वाल्लयुम के 5% फंड से जोड़ दिया जिसमे इंश्योरेंस और नयी जोइनिंग का बिजनस वाल्लयुम सम्मलित नहीं था, कंपनी ने अपने प्लान चेंज करने का सफ़र जारी रखा और लोटरी का प्रथम पुरस्कार की राशी को 51000/- से घटा कर 11000/- कर दिया यही नहीं मासिक बिजनस वाल्लयुम के 5% फंड को भी घटा कर 4- 3% तक कर दिया गया.

      इस तरह मुख्य “लोयल्टी बोनस” स्कीम में इन्वेस्टमेंट* पर निश्चित तौर पर कम समय में लाभ मिलेगा का आधार, भरोसा दिला कर कंपनी ने लाखों की संख्या में नए सदस्य और “लोयल्टी बोनस” सदस्य बनाये बाद में पूरी तरह से स्कीम को चेंज कर के उन लाखों लोगो के साथ धोखाधडी व ठगी की हे.

      * स्कीम में इन्वेस्टमेंट :- किसी भी व्यक्ति या सदस्य को उसको दी जाने वाली भुगतान योग्य धनराशी में से जबरदस्ती कुछ या आधी राशी कंपनी की स्कीम के लिए काट कर भुगतान करना में काटी गयी धनराशी एक तरह से कंपनी द्वारा अपनी स्कीम में उस व्यक्ति से कराया गया इन्वेस्टमेंट ही था और छल से कराया गया एसा इन्वेस्टमेंट जिसमें उस व्यक्ति की इक्छा-अनिक्छा का कोई महत्व ही नहीं था क्योकि उसके द्वारा कंपनी के बिजनस प्लान के अनुसार लाभ लेने के लिए हर माह खरीददारी करनी अनिवार्य थी और खरीददारी करने पर एक न एक दिन 10 पॉइंट बनने ही थे अंत “लोयल्टी क्लब” में उसका इन्वेस्टमेंट होना ही था, उसके चाहने न चाहने का कोई विकल्प कंपनी ने रखा ही नहीं था. इस तरह से आरसीएम बिजनस 100 % इन्वेस्टमेंट चिटफंड, मनी सर्कुलेशन पिरामिड स्कीम व लोटरी सिस्टम पर आधारित हो गया था जो की गेर क़ानूनी हे.

      उपरोक्त बातें सारांश में लिखी गयी हे इसके विस्तृत प्रमाण के लिए हम आरसीएम कंपनी के निदेशक टी. सी. छाबड़ा और अधिकारीयों के द्वारा लिखे गए सभी “सेवक संवाद” को ऑन लाइन शीघ्र ही जारी कर रहें हे, कंपनी की उपरोक्त स्कीम से किस प्रकार लाखों की संख्या में लोग ठगे गए और यह कंपनी शुरू से ही हर तरह से हर स्तर पर आम अवाम जन को किस प्रकार ठग रही थी इस बात के भी शीघ्र और भी कई खुलासे किये जायेंगे ताकि आमजन लीडरों के बहकावे में नहीं आये और उन्हें क्या करना हे इस बात का सही निर्णय लेवे.

      धन्यवाद

      सोजन्य से :- सत्य प्रकाश
      Pl visit for more detail : rcmmanch.blogspot.com

      • Satya Prakash says

        रोजगार सृजन में अहम हो सकती हैं डायरेक्ट सेलिंग कंपनियां
        Courtesy: Dainik Jagran, Delhi – 19 March 2011

        सरकार ने कहा है कि वर्ष 2022 तक देश में रोजगार के 50 करोड़ नए अवसर पैदा करने के लक्ष्य में डायरेक्ट सेलिंग कंपनियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। फिलहाल इस क्षेत्र में काम कर रहे कर्मचारियों में 70 फीसदी महिलाएं हैं। यह उद्योग इस समय 49,400 करोड़ रुपये का है। वर्ष 2013 तक इसके 71,500 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। योजना और संसदीय राज्य मंत्री अश्विनी कुमार ने भारत में डायरेक्ट सेलिंग उद्योग पर शुक्रवार को एक रिपोर्ट जारी की। इसे इक्रियर (आइसीआरआइईआर) और इंडियन सेलिंग एसोसिएशन द्वारा तैयार किया गया है। सीधी बिक्री का समाजिक और आर्थिक प्रभाव :एक प्रोत्साहन नीति की जरूरत रिपोर्ट को जारी करते हुए कुमार ने कहा डायरेक्ट सेलिंग इस क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं को सशक्त कर रहा है। यह क्षेत्र सरकार के लिए 50 करोड़ रोजगार के अवसरों के सृजन के राष्ट्रीय लक्ष्य की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में अधिक लोगों की जरूरत होती है। इसलिए यह समावेशी विकास और समृद्धि के ऊपर से नीचे की ओर जाने के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में सीधी बिक्री का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2003 से 2010 के दौरान इसमें 60 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। ऐसे में इस उद्योग की वृद्धि दर को बरकरार रखने के लिए सरकारी हस्तक्षेप की जरूरत है। इसके लिए एक अलग मंत्रालय बनाया जाना चाहिए और कानून के जरिए इसकी निगरानी की जानी चाहिए। वर्ष 2001-02 में इस क्षेत्र में दस लाख लोग कार्यरत थे जो वर्ष 2009-10 में 30 लाख हो गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में डायरेक्ट सेलिंग का वर्गीकरण अभी भी अस्पष्ट है। इसकी परिभाषा स्पष्ट करने की जरूरत है ताकि इस क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रवाह हो सके। रपट के मुताबिक इस क्षेत्र को 43 प्रतिशत आमदनी प्रथम श्रेणी के शहरों से होती है। मगर कंपनियां अब नए ग्राहकों की खोज में छोटे शहरों और गांवों की ओर रुख कर रही हैं। देश में इस समय एमवे इंडिया, ओरीफ्लेम, टप्परवेयर, एवन ब्यूटी प्रॉडक्ट्स, के-लिंक हेल्थकेयर, 4लाइफ ट्रेडिंग इंडिया, मैक्स न्यूयार्क लाइफ इंश्योरेंस, मोदीकेयर जैसी कंपनियां डायरेक्ट सेलिंग कारोबार में सक्रिय हैं। विश्व स्तर पर सीधी बिक्री क्षेत्र का उदय 20वीं सदी की शुरुआत में हुई लेकिन इसने 1980 के दशक में रफ्तार पकड़ी। वहीं भारत में यह क्षेत्र 1980 के दशक में शुरू हुआ और 1990 में विदेशी कंपनियों के भारत में प्रवेश के साथ इस क्षेत्र में गति आई|

        दोस्तों,

        देनिक जागरण द्वारा दी गयी उपरोक्त खबर आज के सन्दर्भ में बड़ी ही महत्वपूर्ण हे, हमारे देश के तेजी से विकास एवं हर बालिग़ को न्यायप्रद रोजगार देने के लिए अच्छी, मजबूत एवं कानून सम्मत “डायरेक्ट सेलिंग उद्योग कंपनियों” की आज सख्त जरुरत हे.

        ऐसी कम्पनियाँ जो कि “एक सबके लिए, सब एक के लिए” के सहकारिता के मानद सिद्धांत पर कार्य करती हो एवं इसी सिद्धांत को ध्यान में रख कर कानूनन रजिस्टर्ड हो एवं जिनके द्वारा निर्मित, विक्रय किये जाने वाले उत्पाद की क्वालिटी उपभोक्ताओं के हित के लिए बनायी गयी तृतीय पक्ष संस्थाओं से प्रमाणित हो और वे वास्तव में सभी सदस्यों को उनके कार्यानुसार प्रतिफल, लाभ देने के लिए वचनबद्ध हो.

        ऐसी कंपनियों का बिजनस प्लान भाई-भाई को आपस में लड़ाने, बांटने वाला न हो बल्कि पूरे देश में आपसी सोहाद्र बढाने का सचमुच में योगदान करता हो, हरेक सदस्य के द्वारा कभी भी पूरी न की जा सकने वाली शर्तो से उलझाया हुआ न हो, जिसमे बेईमानी, ठगी, भ्रष्टाचार का कंही नामो-निशान भी न हो, उत्पादों का विक्रय मूल्य लागत से बहुत ज्यादा न हो कर वाजिब दाम पर हो.
        साथियों, आज नेटवर्किंग का कार्य हमारे लिए नया नहीं हे और प्राय हम सबने इस तरह की कई कंपनियों का कार्य कर के खट्टे-मीठे अनुभव भी प्राप्त किये हे. आय में लाभ-हानि हो सकती हे लेकिन अपने-अपने कार्य शेत्र विशेष, स्थान विशेष में प्राप्त अनुभव, ज्ञान अनमोल होते हे जो कभी नष्ट नहीं होते हे.

        आप अपने अनुभवों के आधार पर एक अच्छी डायरेक्ट सेलिंग नेटवर्किंग कंपनी, संस्था के बिजनस प्लान में क्या-क्या जरुरी चीजे और केसे होनी चाहिए के बारे में अपने सुझाव, सलाह संषेप या विस्तार में यदि इस मंच की इस पोस्ट पेज (सर्वे हिताय सर्वे सुखाय कंपनी) के कॉमेंट बॉक्स में देंगे तो एक “सर्वे हिताय, सर्वे सुखाय” को ध्यान में रख कर एक नयी कंपनी की सरंचना, स्थापना आसानी से की जा सकेगी जो कानून सम्मत भी हो और आप सभी को सर्वमान्य भी हो.

        आशा हे की देश हित में आप अपने सुझाव, विचार इस पोस्ट के पेज “सर्वे हिताय सर्वे सुखाय कंपनी” पर जरुर कॉमेंट करेंगे.

        कॉमेंट करने के लिए शीघ्र विजिट करें :- rcmmanch.blogspot.com

        आपका हितेषी

        सत्य प्रकाश
        *****************

    • Satya Prakash says

      RCM कंपनी शुरू से ही अपने सक्रीय सदस्यों की मनघडंत, फर्जी विशाल संख्या बता कर नए लोगो की जोइनिंगे ले कर ठग रही थी

      दोस्तों, मनुष्य के स्वभाव की एक कमजोरी हे कि वह जहां ज्यादा लोग किसी कार्य या विचार से सहमत होते हे वहां वह अपने स्वयं के विवेक से निर्णय करने की बजाय लोगो की विशाल संख्या के विचार या कार्य से प्रभावित हो कर उनके पक्ष में अपना निर्णय करता हे.

      मनुष्य की इसी स्वाभाविक कमजोरी का श्री 420 टी सी जी ने भरपूर फायदा कंपनी के शुरूआती दिनों से ले कर बंद होने के कगार पर पहुँचने तक सक्रीय सदस्यों की गलत संख्या बता कर यानि की झूट बोल-बोल कर उठाया. लीडर लोग अपनी हर मीटिंग में पहले भी इस झुटी संख्या को जोर दे दे कर हाई लाईट करते थे और अब भी मीडिया, सरकार, न्यायपालिका, आम जनता को बेवकूफ बनाने से बाज नहीं आ रहे हे, इनके द्वारा कही जा रही एक करोड़ पचास लाख RCM सक्रीय सदस्यों की संख्या पूरी तरह से बकवास हे. हकीकत में इस संख्या का 5% भी सक्रीय सदस्य नहीं हे और १% सदस्यों को ही आय हो रही हे 99% सदस्य अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हे.

      एक छोटा सा उदाहरण पेश हे :-

      दिल्ली के चोर बाजार या हाट बाजार में चतुर ठग व्यापारी 200 का माल 100 में चिल्ला-चिल्ला कर बेच रहा होता हे और उसके ठेले के चारों तरफ 5-10 जनों की भीड़ इक्कठा हुई हुवी होती हे और उनमे से कई जने 100/- दे कर वह माल खरीद रहे होते हे, ऐसे में भीड़ देख कर और उनको खरीददारी करते देख कर और कंही सारा माल समाप्त नहीं हो जाए बाजार में आये इस गोरखधंधे से अनजान कुछ लोग भी 100 दे कर सामान खरीद कर खुद को होशियार ग्राहक समझते हुए अपने घर को चले जाते हे.

      अब देखने में तो यह बड़ी सामान्य सी बात हे लेकिन इस तरह की दुकानदारी में वास्तविकता यह थी कि वे पहले से खरीददारी कर रहे 5-10 जनों की भीड़ फर्जी थी, वे उस ठग गिरोह के ही सदस्य थे और उनकी देखा-देखी अन्य लोगो ने 50/- की कीमत के सामान के 100/- दे दिए.

      ठीक इसी तरह RCM में भी कंपनी और लीडरों के द्वारा सदस्यों की फर्जी संख्या बता कर शुरू से ही ठगी का कार्य बदस्तूर चालु था.

      इसी पेज पर संख्या की गणित शीघ्र बतायी जायेगी अन्तह कृपया देखते रहे……………………..rcmmanch.blogspot.com

  1. DINESH SINGH SURYA,ARIAON,BUXAR,BIHAR says

    RCM KE VIRON aap sangthit hon aur RCM CDWA KE haanth ko majbut karen.RCM KI HAI PUKAR–
    DILLI CHALO!
    DILLI CHALO!!
    GADDARO KO HILANA HAI

    RCM KO CHALANA HAI.

    • s p gehlot says

      ठग कंपनी की ठगी के तरीके सीखने के लिए बनाई गई यूनीवर्सिटी (बिना पंजियन की) के प्रिन्सिपल जैल जाने से पहले अपने शार्गिददो को शायद यह एक और तरह की ठगी का नया तरीका सीखा कर गये हे ताकि शार्गीदौ की रोज़ी रोटी चलती रहे वरना इतने सालों में तो इनको ‘RCM CDWA’ “आरसीएम कंज्यूमस एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स वेलफेयर एसोसिएशन” बनाने की याद नहीं आई जबकि करोड़ो लोग डिस्ट्रीब्यूटर्स बन चुके थे इनको यह नहीं पता कि “काठ की हाँडी बार-बार नहीं चढ़ती”, आम डिस्ट्रीब्यूटर्स अब संभल चुका हे और “दूध का जला छाछ भी फूँक कर पीता हे”.

  2. DINESH SINGH SURYA,ARIAON,BUXAR,BIHAR says

    tc chhabra ,saurab chhabra,bc chhabra zindabaad.
    RCM KE VIRON aap sangthit hon aur RCM CDWA KE haanth ko majbut karen.RCM KI HAI PUKAR–
    DILLI CHALO!
    DILLI CHALO!!
    GADDARO KO HILANA HAI

    RCM KO CHALANA HAI.
    desh ko majbut banana hai.

  3. says

    Sochiye Jara….. ‘ek gunahgar yadi gunah karke paresan hota hai to samajh me aata hai, parantu jab koi nirdosh ek gunahgar se jyada paresan hota hai to’ kisi mahan sant ki baat yaad aati hai JITNE BHI NIRAPRADH HAI SAB MARE JAYENGE aaj bhilwara police ke dwara RCM pariwar ke sath bhi yahi ho raha hai jo nindniy hai………… Udaiveer Singh, RCM House, Naiyyar Colony, Civil Lines, GONDA. (U.P.)

  4. says

    AAJ HAMARE HINDUSTAN ME ACHCHHE LOG BUSINESS NAHI KAR SAKTE. ESKA PRAMAN HAI RCM BUSINESS JAISEE COMPANY KO BAND KARWANE KE LIYE SARE POLITICAL LOG & POLICE SYSTEM JUTI HAI AYE HALL HAI GUNDO AV MAVALIO POLICE &POLITICAL KA KI WALMART COMPANY VIDESH KI HOKAR BHI INDIA ME 100 % INVEST KAR SAKTI HAI LEKIN INDIAN COMPANY PUR MULTI LEVEL MARKETING (RCM BUSINESS) NAHI CHALNE DE RAHE HAI .

  5. DINESH SINGH SURYA,ARIAON,BUXAR,BIHAR says

    rajasthan govt hosh me aao
    apni manmani band karo.
    tc sir zindabaad.
    rcm cdwa zindabaad

  6. DINESH SINGH SURYA,ARIAON,BUXAR,BIHAR says

    2/3/4 march ko janter-manter delhi m 9am to 5pm tak ansan karenge 5sathi bhukhe ansan karenge
    RCM CDWA ZINDABAAD!!!!

  7. says

    RCM FAMILY IS NOT A SMALL FAMILY. IT IS A HUGE FAMILY OF 1.5 CRORE FAMILIES AND ABOUT 6 CRORE FAMILY MEMBERS. IT IS MORE THAN 4.5% OF THE TOTAL POPULATION. WE ARE FIGHTING FOR A GOOD CAUSE. BUT THE GOVERNMENT IS NOT READY TO LISTEN TO OUR GRIEVANCES. OUR COUNTRY IS NOT UNDER THE RULE OF FOREIGN COUNTRIES. OUR COUNTRY IS A DEMOCRATIC COUNTRY. IF OUR LIVELIHOOD AND LEGITIMATE DEMANDS ARE DENIED, WE WILL BE LEFT WITH NO OTHER OPTION EXCEPT TO GO DOWN TO STREETS AND FIGHT FOR OUR RIGHTS WITH OUR FAMILIES. JAI RCM . JAI INDIAN DEMOCRACY. JAI HIND.

  8. says

    yar ko dekh kar adhar badalana sikhe,bakat ko dekhkar vyabhar badalana sikhe. dhar ko dekh kar patbar badalana sikhe.jindagi ek jwar hai,hat karege to dub gayege.samay ka kimat samjhe.mlm ka nam roshan karne me,budhi or vibek se kam le.god se sakti mage ki,jo ap kar sakte he use kar dale,or jo ap nahi kar sakte use sbikar karane ka himat de.desh ke kanun ko saman de.visit-kkch.co.in,email id-sanjaysahu.krishna@gmail.com.jay rcm

  9. says

    वह प्रदीप जो दीख रहा है झिलमिल, दूर नहीं है;
    थककर बैठ गये क्या भाई! मंजिल दूर नहीं है।
    चिनगारी बन गई लहू की बूँद गिरी जो पग से;
    चमक रहे, पीछे मुड़ देखो, चरण – चिह्न जगमग – से।
    शुरू हुई आराध्य-भूमि यह, क्लान्ति नहीं रे राही;
    और नहीं तो पाँव लगे हैं, क्यों पड़ने डगमग – से?
    बाकी होश तभी तक, जब तक जलता तूर नहीं है;
    थककर बैठ गये क्या भाई! मंजिल दूर नहीं है।
    अपनी हड्डी की मशाल से हॄदय चीरते तम का,
    सारी रात चले तुम दुख झेलते कुलिश निर्मम का।
    एक खेय है शेष किसी विधि पार उसे कर जाओ;
    वह देखो, उस पार चमकता है मन्दिर प्रियतम का।
    आकर इतना पास फिरे, वह सच्चा शूर नहीं है,
    थककर बैठ गये क्या भाई! मंजिल दूर नहीं है।
    दिशा दीप्त हो उठी प्राप्तकर पुण्य-प्रकाश तुम्हारा,
    लिखा जा चुका अनल-अक्षरों में इतिहास तुम्हारा।
    जिस मिट्टी ने लहू पिया, वह फूल खिलायेगी ही,
    अम्बर पर घन बन छायेगा ही उच्छवास तुम्हारा।
    और अधिक ले जाँच, देवता इतना क्रूर नहीं है।
    थककर बैठ गये क्या भाई! मंजिल दूर नहीं है।
    Dosto Isi din ka intjaar tha 5 sathi kya ham pure rcm Pariwar Bhukhe rahkar RCM ke lye larai larenge,
    Jantar Mantar – Chalo !!!!!! Jantar Mantar – Chalo !!!!!! Jantar Mantar – Chalo !!!!!! Jantar Mantar – Chalo !!!!!! Jantar Mantar – Chalo !!!!!!
    Dated 2/3/4 March 2012 time 9 am to 5 PM
    R. Sahu

  10. says

    वह खून कहो किस मतलब का
    जिसमें उबाल का नाम नहीं।
    वह खून कहो किस मतलब का
    आ सके देश के काम नहीं।

    वह खून कहो किस मतलब का
    जिसमें जीवन, न रवानी है!
    जो परवश होकर बहता है,
    वह खून नहीं, पानी है!

    उस दिन लोगों ने सही-सही
    खून की कीमत पहचानी थी।
    जिस दिन सुभाष ने बर्मा में
    मॉंगी उनसे कुरबानी थी।

    बोले, “स्वतंत्रता की खातिर
    बलिदान तुम्हें करना होगा।
    तुम बहुत जी चुके जग में,
    लेकिन आगे मरना होगा।

    Utho jago aur tak larte raho hab tak ki ham RCM ko Chalu nahi karba lete, kyoki hame hi nahi is desh ko hai RCM ki jarurat
    JAI RCMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMMM
    R. Sahu

    R. Sahu

  11. says

    भारत डूबा भ्रष्टाचार में कौन बचाए रे?
    दो पाटन के बीच है जनता कोई बचाए रे!

    एक तरफ महँगाई, भारी कर भी देते हैं,
    कर कर करते भारत में घुट-घुट कर जीते हैं।

    घूसखोरी के करतब हर अफसर दिखलाता है,
    जनता का सेवक अब पद का धौंस जमाता है।

    आकण्ठ डूबे भारत ने कुछ लिया हिचकोले रे,
    जनाक्रोश भी उमड़ रहा है हौले हौले रे।

    Soban Singh

  12. R.K.CHOURASIA says

    LAGBHAG SABHI MANTRI BHRATACHAR MAIN LIPT HAIN. INHI KE ISHARE PAR RCM PAR KARYAVAHI KI GAYI HAI. IN BHRASTACHARIYON KO SABAK SIKHAN HAI.
    HAM SAB BHRASTACHAR KE KHILAPH HAI.
    JAI RCM.
    JAI HIND.
    VANDEY MATRAM.

  13. K.ANJAIAH 9989354401 says

    jai rcm friends …….. who want to rcm re open………. so pray to god…….. good work ,good results are always have great hard work and struggle . JAI BHARATH JAI T.C.JI……………

  14. MUSA ALI says

    R C M KA TO BAND BACHTA JARAHA HAIN…………DON’T KNOW WHERE IT WILL STOP…………….Agar ismein itna dam hai to yea kuin nahi dekha raha hain yarrr……..

    • says

      ali g ab kya kahe rcm or tc to ek hi sikke ke do pahlu hai. ab to yahi karna padega lag raha hai t.c. ka band baje to baje. rcm kaa nahi bajne denge hum sai ko sangatit hoker rcm ko chalu karwana padega bale chahe md baadlwana pade tc ki karni ki saja hum sab kyon bukte hum to sache dil se rcm kiye tc ko ur jyada baardast nahi karenge

  15. jaswinder singh says

    swiss bank mein arbon rupaiya jama karna jaayaj hai inke liye, krodon ko rojgar dekar aur t.d.s kaat kar distributers ko banta paisa baantkar , bhartiye bankon mein jama bhartiye paisa najaayaj hai. waah kya kehna hai.

  16. Sirajul Islam says

    Are TC chabra ji keya hua. Itne gorib admi aur dukhia ki sare rupia ko loontkor kaha vag geya hi tu. Joldi RCM chalu kor orna sare distributor ka paisa lotao. Orna tera jindegi ka valai nehi hoga. Ye jorur ead rakhna. Agagr chalu kore to kob. Please reply. Mein assam se Dhubri, Bilasipara, Uportari

  17. says

    log kahne lage haai…………………………यह भारत हे यहाँ ठगी में हिस्सा पाने वाले गिरोह के सदस्य अपने गिरफ्तार हुए सरदार को छुड़ाने के लिए आमरण अनशन भी कर सकते हें, क्योकि आख़िर सरदार छूटेगा तभी तो उनको ठगी में हिस्सा मिलना शरु हो पाएगा, उन नादानो को क्या पता क़ि जिसे वे रोज़गार समज रहें हें वह हक़ीकत में लाखों लोगों को ठग कर चंद लोगों में बाँटने का खेल था जिसमें ये सरदार लोग उनकी भावनाओं और मासूमियत को अब भी लूट रहे हें, अगर सरदार पाक-साफ थे तो न्याय व्यवस्था से भागते क्यों फिर रहे थे? और अब जब पकड़े गये तो इतने स्वार्थी निकले क़ि खुद को छुड़वाने के लिये न्यालय में अपने को निर्दोष साबित करने के बजाया मासूमों को धरने और आमरण अनशन करने का आदेश दे रहें हे.
    कुछ समय पहले तक देश की भलाई सोचने का ढोंग करने वाले सरदार अब गिरफ्तार होने पर पूरे देश में अराजगता फेलाना चाहते हें क्या इससे उनकी अपने देश के प्रति वास्तविक सोच उजागर नहीं होती हे?
    इस बात को आमजन को भी समजना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति अपने व्यापार से प्राप्त शुद्ध आय से अधिक की संपति यदि बनाता हे तो अधिक वाला पेसा क्या हे?…………………………………………………per mat ghabro hum to matwale hai………………………………………khne do

    • DINESH SINGH SURYA,ARIAON,BUXAR,BIHAR says

      yahan par koi thagi nahi hoti hai.nahi koi investment hota hai.
      u just contact on nearest puc of rcm to understand easily.thanks.and jai rcm.for increase ur knowledge in kerla rcm was clean chited by the govt.so think before comment. i hope that u think in future.thanks again.

    • s p gehlot says

      दोस्त, आप बिल्कुल सही कह रहे हें, हज़ारों पीयूसी बंद हो गयी थी क्यो? पीयूसी वाले बर्बाद हो गये थे, सिर्फ़ वही पीयूसी चल रही थी जिसका धारक अपनी नेटवर्क की कमाई भी पीयूसी में उडेल रहा था क्योंकि इतने कम मार्जिन में सभी खर्च निकालने के बाद एक पैसा भी शुद्ध लाभ नहीं हो रहा था हक़ीकत में पीयूसी संचालक को टी सी जी ने बड़ी ही सफाई से बेगारी मजदूर बना रखा था और तो और लीडर लोग तो इस बात की ताक में रहते की कब वह मरणासान पीयूसी बंद हो ताकि वे किसी नये आसामी को पूरे स्टॉक के साथ पीयूसी दिला सकें ताकि लीडरों और कंपनी की कमाई पर तो कोई आँच नहीं आये. हज़ारों पीयूसी जो कि चालू हो कर एक वर्ष से पहले बंद हो गयी उनके तन पर लिपटा आखरी कपड़ा सिक्योरटी जमा के 10000/- रुपय भी टी सी जी को उतारने में शर्म नहीं आयी, और जो समान वापस डिपो में जमा कराया उसका रिफंड भी कई पीयूसी वालों को आज दिन तक नहीं दिया गया, कइयों का लेजर में हज़ारों रुपयों का स्टॉक ही गायब कर दिया गया पूछने पर यह बताया गया कि वह समायोजित कर दिया गया जबकि कंपनी एक पेसे का समान भी उधार नहीं देती थी तो किस बात का समायोजन?
      दोस्त, यदि सीधे तौर पर सभी एक करोड़ पचास लाख लोगों को और इनडॅयेरेक्ट तौर पर करोड़ों लोगों को वास्तव में आरसीएम से फ़ायदा हो रहा था तो जयपुर में इन करोड़ों लोगो की तुलना में मुट्ठी भर लोग ही क्यों जुटे? वजह बिल्कुल साफ हे कि फ़ायदा इन चंद मुट्ठी भर लोगों जो कि लीडर थे को ही हो रहा था और आमजन लुट रहा था, सरकार को इन लीडरों के खिलाफ भी कार्यवाही करनी चाहिए क्योकि इन्ही की वजह से आमजन गुमराह हुआ और ये लोग भी ठगी के कार्य में हिस्सेदार थे, जब ठगों के सरदार पकड़ लिए गये तो गिरोह के सदस्य खुल्ले क्यों घूम रहें हें?

  18. DINESH SINGH SURYA,ARIAON,BUXAR,BIHAR says

    MR DHALENDRA JI aapko rcm ka matlab samjh me nahi aaya hai.
    jara aap sonche aakhir kyon log aaj bhi rcm ko itna pyar kar rahen hai.
    yahan par koi paisa ka karobaar nahi haota hai.it is only marketing .
    and if u do network then you expand ur capacity.thanks.

    firstly you do admission in rcm university.rcm me bahut hi takat hai aap thoda najdik se dekhen.

    • says

      dinesh ji abi tak log janchuke hai kitnaa saahi kitna galat fir hum isliye laaage hai itna saamaay to khaarab kar chuke toda ur sahi kahte hai sath janmo kaa rista yaha to ek janm musikal haai hum khud jante kitna dud kitna pani ……………….go dimand jai rcm

  19. DINESH SINGH SURYA,ARIAON,BUXAR,BIHAR says

    STRICT WARNING—-
    non -distrbutor aap vulgar comments na karen .nahi to legal action liya jayega.
    yah hamari siksha aur indian culture ke khilaf hai.i hope that u take bahold thanks.

  20. DINESH SINGH SURYA,ARIAON,BUXAR,BIHAR says

    RCM CDWA ZINDABAAD!! AAP SUPPORT KAREN !!
    HAMARI JIT PAKKI HAI. RCM WILL REOPEN WITH FULL ENERGETIC WAY.JAI RCM

  21. DINESH SINGH SURYA,ARIAON,BUXAR,BIHAR says

    RCM Consumers & Distributors Welfare Association,
    E-2/259,Shastri Nagar,
    Near HDFC ATM,(Metro Station, Gate No.2),
    New Delhi-110052
    Email:contact@rcmassociation.com

    Bank Details

    Bank Name : Bank Of Baroda
    A/c. Name : RCM Consumers & Distributors Welfare Association,
    A/c.Number : 27890200000849
    Branch : Bhajanpura, Delhi
    IFSC code : BARB0BHADEL
    MICR Number : 110012083

  22. MUSA ALI says

    How this company is saying that it will take care of the future (up to 6 geneations) when it cannot stand boldly in the ist decade,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,will any body explain me.(For kind information i am a distributor )

    • MURARI MOHAN MAJUMDER says

      me 6 saal se rcm business me ho or tecnical leble par ho.is business se mera paribar chalta he.mera sister ko heart ka bimari or mera mother ko bp ka bimari he.or mahina mera family me 30000 eaxpense he.lekin last 3 month se mera koi income nehi arahahe.bahot problem horahahe family chalana.lekin moje biswas he mera rcm jaldi latkar ayga.me aap logo se nibedan karta ho ke mera jesa haal saed kisika nehi he agara me mojbood ho to aap kio nehi?

  23. K.ANJAIAH 9989354401 says

    jai rcm friends ……….good works and good results are always have great hard works…….. great struggles……. JAI T.C.JI , JAI BHARATH………..

  24. says

    TC ji might have made money
    Ambani ji bhi paisa banaya
    Unka beta mukesh hi nay tho 45 storied ka khar banaya …
    Can any one question them !!!
    AMWAY – from America
    AMC – from Germany
    MONAVI – from America
    SPEAK ASIA – from Singapore
    HERBALIFE – from America
    TAPPERWARE – from France etc are also MLM
    given permission by the same Govt to work in India – who freezed the operation of RCM to work in India.
    Any logic
    Are we back in the hands of English
    Does a Jalian Waala Bhagh repeat !!
    Does we really love our country ??

  25. says

    SANKAR NANDI g . i salute u . your knowledge . but my dear friend. apne jin co.k bare me likhe ho unme se koi b md. bagte nahi fira abi kuch din pahle ki bat bata du speak-asia ne to media me aker apni safai diya press confrens kiya. mai b ek rcm dist. hu but sach to sach h

  26. s p gehlot says

    यह भारत हे यहाँ ठगी में हिस्सा पाने वाले गिरोह के सदस्य अपने गिरफ्तार हुए सरदार को छुड़ाने के लिए आमरण अनशन भी कर सकते हें, क्योकि आख़िर सरदार छूटेगा तभी तो उनको ठगी में हिस्सा मिलना वापस शरु हो पाएगा, उन नादानो को क्या पता क़ि जिसे वे रोज़गार समज रहें हें वह हक़ीकत में लाखों लोगों को ठग कर ठगी की कुछ रकम चंद लोगों में बाँटने का खेल था ताकि वे लोग सरदार की वा-वा करते रहें और चंद रुपयो के लालच में सरदार के सेवक बन कर नित नये भोले लोगो, ग्रामीणों को सरदार की एसी नित नयी स्कीमों में फाँसते रहें जिनकी शर्तें एसी कि न तो नौ मॅन तेल हो न राधा नाचें, और वह बेचारे यदि किसी तरह शर्त पूरी करने की स्थति तक पहुँचने वाले ही हो कि सरदार पुरानी स्कीम को बंद कर के नयी स्कीम लागू कर दे, यदि कोई बोलने की हिमाकत करे तो सरदार उसकी आईडी ही टर्मिनेट करदे, आख़िर सरदार की सल्तनत हे तो नियम कायदे सरदार के ही तो होंगे, उन्हे चुनी हुई सरकार के नियम-अधिनियम की क्या परवाह? जिसमें ये सरदार लोग उनकी भावनाओं और मासूमियत को अब भी लूट रहे हें, अगर सरदार पाक-साफ थे तो न्याय व्यवस्था से भागते क्यों फिर रहे थे? और अब जब पकड़े गये तो इतने स्वार्थी निकले क़ि खुद को छुड़वाने के लिये न्यालय में अपने को निर्दोष साबित करने के बजाया मासूमों को धरने और आमरण अनशन करने का आदेश दे रहें हे. कुछ समय पहले तक देश की भलाई सोचने का ढोंग करने वाले सरदार अब गिरफ्तार होने पर पूरे देश में अराजगता फेलाना चाहते हें क्या इससे उनकी अपने देश के प्रति वास्तविक सोच उजागर नहीं होती हे? इस बात को आमजन को भी समजना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति अपने व्यापार से नियमानुसार कर आदि चुका कर प्राप्त हुई शुद्ध आय से अधिक की संपति यदि बनाता हे तो अधिक वाला पेसा क्या हे? और कहाँ से? केसे आया? उसे एक न एक दिन दुनिया को बताना पड़ेगा ही और यह तो सभी जानते ही हे कि भगवान के घर देर हें अंधेर नहीं और उसकी लाठी आवाज़ भी नहीं करती.

  27. Alok Singh says

    The business policy and different schemes followed by RCM were never clear. I have been associated with this company for very long. What I have seriously felt is that they never stick to their commitments. Always changed their schemes in half way. In that way, they have cheated the comman members. That is never legitimate. if you are not legitimate, law of the land will play its role.

  28. ABC says

    TC Chabra Harami Hai. RCM fraud hai… RCM ne logun ko loota hai.. RCM kabi phir se open nahi hona chahiye.Ye log sirf logun ko dokha deke paisa earn karte hai. Koi mare ya bache inko koi farak nahi padhta..

  29. Alok Singh says

    It is absolutely true that the management of RCM launched all its schemes largely for their own benefits. They have never been transparent and honest to its innocent members. I totally agree with Mr. Satya Prakash views published on this site on 16th March, 2012. But still few people are supporting RCM management for unknown reasons.
    But the other side of the story is, the week Law of this country, where people like Suresh Kalmadi and D. Raja, who are charged of misappropriating Arabs and Kharabs of public money, are out and enjoying their public life.
    Hopefully the charges levelled against RCM managers are honestly tried and the guilty are punished.
    One must not support or oppose RCM merely on rumours. Please wait, as the whole issue is sub judiced.
    Thanks.
    Alok Singh, Patna.

    • Satya Prakash says

      RCM द्वारा गेर कानूनी कार्यों से सरकार व आम नागरिकों के साथ ठगी
      हमारे इस मंच पर बने एक मित्र श्रीमान विकास गुप्ता जी ने एक बात लाख टके की कही हे की यह टी. सी. जी अब इस RCM BUSINESS को आगे चलाना ही नहीं चाहता था.

      आपकी यह बात 101% सही हे. ज्यादा नहीं सिर्फ तीन साल पीछे जा कर इनके द्वारा रोज-रोज की जा रही नित-नयी हरकतों पर गहराई से यदि नजर डाली जाये तो यह शक और भी पुख्ता होता हे. इन तीन सालों में इन्होने अपना पूरा ध्यान इस बात पर लगा दिया कि कैसे अति कम समय में अरबों-खरबों रुपये इक्कठे किये जाये, इसके लिए हर तरह के हथकंडे अपनाए गए, सभी उत्पादों की क्वालिटी जो कि पहले से ही घटिया थी उससे ज्यादा लाभ निकालने के लिये और निम्नतर स्तर का किया गया इन्हें सामान नहीं बिकने का डर तो था नहीं क्यों कि लोटरी का लालच जो साथ जुड़ा था, और दो-दो जोइनिंग लाना हर लीडर की मज़बूरी थी, भलेही उन्हें अपनी जेब से 500/- -500/- रुपये देने पड़ते थे असली जोइनिंग लाने वाले को और उपभोक्ता कानून के नियम से इन्हें भय था नहीं क्योकि शिकायत करने वाले को इन्होने उसकी आईडी ही टर्मिनेट कराने का डर जो दिखा रखा था, अब “बिल्ली के गले में घंटी कौन बाँधने जाएगा” वही जो मौत को गले लगाना चाहता हो, अरे भई! अब यहाँ अखाड़े में पहलवान बन कर बड़ी-बड़ी ताल ठोकने वाले हम भी नहीं गये थे घंटी बांधने, उस बिल्ली मौसी की गुर्राहट भी उस समय हमें शेर की दहाड़ जैसी लगती थी.

      आश्चर्य की बात तो यह थी की ये पूरे देश में धड़ल्ले से गेर क़ानूनी उत्पाद और कार्य भी सभी राज्य सरकारों और केंद्रीय सरकार की नाक के ठीक नीचे बेच रहा, कर रहा था, कैसे बेच रहे थे, कर रहे थे इसकी SOG से नहीं CID से जाँच होनी चाहिए क्योकि बिना भ्रष्टाचार के ये इस देश में संभव ही नहीं हे. भ्रष्टाचार के विरुद्ध पूरे देश में अलख जगाने वाले श्री अन्ना जी से समर्थन मांगने जंतर-मंतर पर जाने से पहले ये जाने वाले चुल्लू भर पानी में डूब कर मर क्यों नहीं गये? क्योकि एक न एक दिन इनके इस कार्य के कारण लोग, राजनेता उस महापुरुष श्री अन्ना जी पर भी इन भ्रष्टाचारियों को दिए गये समर्थन रूपी इस दाग पर अंगुली उठा सकते हे.

      इनके द्वारा किये जा रहे इस तरह के कुछ गेर क़ानूनी सामानों और कार्यों की बानगी तो नीचे देखिये :-

      * बिना ISI मार्के का बिजली का किसी भी तरह का सामान बनाना, भंडारण करना, बेचना गेर क़ानूनी हे. (जैसे की पंखे, पावर सेवर, आर ओ, इनवर्टर, बेटरी, मिक्सी आदि)

      * पैक्ड या डिब्बाबंद कोई भी खाद्य पदार्थ सामान बिना एगमार्क और FPO लाइसेंस के बनाना, भंडारण करना, बेचना गेर क़ानूनी हे. (इसमें इनके सामानों की इतनी लम्बी लिस्ट हे की कई पेज भर जायेंगे)

      * कास्मेटिक्स सामान जिनमे हानिकारक केमिकल की मात्रा होती हे वे बिना किसी सरकार द्वारा प्रमाणित प्रयोगशाला से प्रमाण पत्र लिये बिना बनाना, भंडारण करना, बेचना गेर क़ानूनी हे. (इसमें हजारो तरह के उत्पाद आते हे.)

      * बिना लाइसेंस के कीटनाशक और उर्वरक खाद उत्पाद बनाना, भंडारण करना, बेचना गेर क़ानूनी हे. (कंपनी, PUC और DISTRIBUTOR जो की लाखो का एसा सामान वार्षिक बेच रहे थे.)

      * बिना लाइसेंस लिये मेडिसिन उत्पाद बनाना, भंडारण करना, बेचना गेर क़ानूनी हे. (कंपनी, PUC और DISTRIBUTOR जो की लाखो का एसा सामान वार्षिक बेच रहे थे.)

      * बिना TIN नंबर की PUC और DISTRIBUTOR जो की लाखो का सामान वार्षिक बेच रहे थे को सामान सप्लाई करना और उनके द्वारा भण्डारण करना व् वापस आगे बेचना गेर क़ानूनी हे. (वापस विक्रय पर देय टेक्स जमा नहीं कराना कालाधन बनाने जैसा हे)

      * बिना फ़ूड लाइसेंस वाली PUC और DISTRIBUTOR जो की लाखो का सामान वार्षिक बेच रहे थे को सामान सप्लाई करना और उनके द्वारा भण्डारण करना व् वापस आगे बेचना गेर क़ानूनी हे.

      * बिना कंपनी की रसीद दिए 150/- में बेंक में खाता खोलने के करोडो फॉर्म बेचना और वो रुपये उपभोक्ता के बेंक एकाउंट बेलेंस में नहीं देना गेर क़ानूनी हे. (कालाधन बनाने जैसा हे)

      * हर माह कंपनी द्वारा रखी गयी मीटिंगों में लाखों की तादात में टिकट बेच कर प्राप्त कलेक्शन पर सर्विस टेक्स नहीं चुकाना गेर क़ानूनी हे. (कालाधन बनाने जैसा हे)

      * PUC या DISTRIBUTOR से प्राप्त एडवांस या सिक्योरिटी राशि जिसे लम्बे समय तक कंपनी अपने पास रखती हे और उस राशी पर खुद ब्याज प्राप्त करती हे तो उस पर प्रचलित कम से कम दर पर भी ब्याज नहीं देना गेर क़ानूनी हे. (कालाधन बनाने जैसा हे)

      * आम लोगो को विदेशी सामान का बहिष्कार करने का कह कर खुद विदेशी सामान यहाँ बेचना गेर कानूनी हे.

      * बिना अपनी कंपनी का IRDA से रजिस्ट्रेशन कराये अपनी कंपनी के दस्तावेजो से बीमा प्रस्ताव नागरिकों से करना व् बेचना गेर कानूनी हे.

      * किसी भी सामान्य या कोरपोरेट बीमा एजेंट या IRDA से प्रमाणित बीमा कंपनी के द्वारा बीमा उत्पाद के प्रस्ताव को किसी भी तरह का लालच दे कर, जैसे लोटरी-कमीशन आदि का बेचना गेर कानूनी हे.

      * कम से कम कोई निश्चित राशि का सामान प्रति माह खरीदने और उसमे पोइन्तो पर कमीशन व् लोटरी देने की शर्त, लालच के साथ बिना IRDA से लाइसेंस ले कर खुद अपने स्तर पर दुर्घटना बीमा करना या करवाना गेर कानूनी हे.

      * किसी कोर्पोरेट IRDA से प्रमाणित बीमा कंपनी एजेंट से अपने सदस्यों के लिए ग्रुप बीमा ले कर सदस्यों को हर माह निश्चित कम से कम राशि का सामान खरीदने पर ही उसका लाभ देना लालच देने जैसा ही हे जो कि गैर क़ानूनी हे.

      * सदस्य को विक्रय किये जा रहे सामान के बिल में कितनी राशी दुर्घटना बीमा के मद में काटी जा रही हे स्पष्ट नहीं बताना गैर क़ानूनी हे.

      * 5 लाख वार्षिक से कम सामान बेचने वाली PUC या DISTRIBUTOR द्वारा VAT कमपोंस्टेशन प्रमाण पत्र SALE TAX डिपार्टमेंट से लिए बिना सामान बेचना गेर क़ानूनी हे. (कालाधन बनाने जैसा हे)

      * Distrbutaro द्वारा अपने स्वय के घरेलू उपयोग के अलावा कोई भी सामान बिना स्थानीय पंचायत, नगरपालिका, निगम में पंजीयन कराये एव आवश्यक प्रमाणपत्र लिए बेचने का कार्य करना गेर क़ानूनी हे. (कालाधन बनाने जैसा हे)

      * (आगे जारी हे…… देखते रहिये)
      rcmmanch.blogspot.com

    • Satya Prakash says

      रोजगार सृजन में अहम हो सकती हैं डायरेक्ट सेलिंग कंपनियां
      Courtesy: Dainik Jagran, Delhi – 19 March 2011

      सरकार ने कहा है कि वर्ष 2022 तक देश में रोजगार के 50 करोड़ नए अवसर पैदा करने के लक्ष्य में डायरेक्ट सेलिंग कंपनियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। फिलहाल इस क्षेत्र में काम कर रहे कर्मचारियों में 70 फीसदी महिलाएं हैं। यह उद्योग इस समय 49,400 करोड़ रुपये का है। वर्ष 2013 तक इसके 71,500 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। योजना और संसदीय राज्य मंत्री अश्विनी कुमार ने भारत में डायरेक्ट सेलिंग उद्योग पर शुक्रवार को एक रिपोर्ट जारी की। इसे इक्रियर (आइसीआरआइईआर) और इंडियन सेलिंग एसोसिएशन द्वारा तैयार किया गया है। सीधी बिक्री का समाजिक और आर्थिक प्रभाव :एक प्रोत्साहन नीति की जरूरत रिपोर्ट को जारी करते हुए कुमार ने कहा डायरेक्ट सेलिंग इस क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं को सशक्त कर रहा है। यह क्षेत्र सरकार के लिए 50 करोड़ रोजगार के अवसरों के सृजन के राष्ट्रीय लक्ष्य की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में अधिक लोगों की जरूरत होती है। इसलिए यह समावेशी विकास और समृद्धि के ऊपर से नीचे की ओर जाने के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में सीधी बिक्री का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2003 से 2010 के दौरान इसमें 60 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। ऐसे में इस उद्योग की वृद्धि दर को बरकरार रखने के लिए सरकारी हस्तक्षेप की जरूरत है। इसके लिए एक अलग मंत्रालय बनाया जाना चाहिए और कानून के जरिए इसकी निगरानी की जानी चाहिए। वर्ष 2001-02 में इस क्षेत्र में दस लाख लोग कार्यरत थे जो वर्ष 2009-10 में 30 लाख हो गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में डायरेक्ट सेलिंग का वर्गीकरण अभी भी अस्पष्ट है। इसकी परिभाषा स्पष्ट करने की जरूरत है ताकि इस क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रवाह हो सके। रपट के मुताबिक इस क्षेत्र को 43 प्रतिशत आमदनी प्रथम श्रेणी के शहरों से होती है। मगर कंपनियां अब नए ग्राहकों की खोज में छोटे शहरों और गांवों की ओर रुख कर रही हैं। देश में इस समय एमवे इंडिया, ओरीफ्लेम, टप्परवेयर, एवन ब्यूटी प्रॉडक्ट्स, के-लिंक हेल्थकेयर, 4लाइफ ट्रेडिंग इंडिया, मैक्स न्यूयार्क लाइफ इंश्योरेंस, मोदीकेयर जैसी कंपनियां डायरेक्ट सेलिंग कारोबार में सक्रिय हैं। विश्व स्तर पर सीधी बिक्री क्षेत्र का उदय 20वीं सदी की शुरुआत में हुई लेकिन इसने 1980 के दशक में रफ्तार पकड़ी। वहीं भारत में यह क्षेत्र 1980 के दशक में शुरू हुआ और 1990 में विदेशी कंपनियों के भारत में प्रवेश के साथ इस क्षेत्र में गति आई|

      दोस्तों,

      देनिक जागरण द्वारा दी गयी उपरोक्त खबर आज के सन्दर्भ में बड़ी ही महत्वपूर्ण हे, हमारे देश के तेजी से विकास एवं हर बालिग़ को न्यायप्रद रोजगार देने के लिए अच्छी, मजबूत एवं कानून सम्मत “डायरेक्ट सेलिंग उद्योग कंपनियों” की आज सख्त जरुरत हे.

      ऐसी कम्पनियाँ जो कि “एक सबके लिए, सब एक के लिए” के सहकारिता के मानद सिद्धांत पर कार्य करती हो एवं इसी सिद्धांत को ध्यान में रख कर कानूनन रजिस्टर्ड हो एवं जिनके द्वारा निर्मित, विक्रय किये जाने वाले उत्पाद की क्वालिटी उपभोक्ताओं के हित के लिए बनायी गयी तृतीय पक्ष संस्थाओं से प्रमाणित हो और वे वास्तव में सभी सदस्यों को उनके कार्यानुसार प्रतिफल, लाभ देने के लिए वचनबद्ध हो.

      ऐसी कंपनियों का बिजनस प्लान भाई-भाई को आपस में लड़ाने, बांटने वाला न हो बल्कि पूरे देश में आपसी सोहाद्र बढाने का सचमुच में योगदान करता हो, हरेक सदस्य के द्वारा कभी भी पूरी न की जा सकने वाली शर्तो से उलझाया हुआ न हो, जिसमे बेईमानी, ठगी, भ्रष्टाचार का कंही नामो-निशान भी न हो, उत्पादों का विक्रय मूल्य लागत से बहुत ज्यादा न हो कर वाजिब दाम पर हो.
      साथियों, आज नेटवर्किंग का कार्य हमारे लिए नया नहीं हे और प्राय हम सबने इस तरह की कई कंपनियों का कार्य कर के खट्टे-मीठे अनुभव भी प्राप्त किये हे. आय में लाभ-हानि हो सकती हे लेकिन अपने-अपने कार्य शेत्र विशेष, स्थान विशेष में प्राप्त अनुभव, ज्ञान अनमोल होते हे जो कभी नष्ट नहीं होते हे.

      आप अपने अनुभवों के आधार पर एक अच्छी डायरेक्ट सेलिंग नेटवर्किंग कंपनी, संस्था के बिजनस प्लान में क्या-क्या जरुरी चीजे और केसे होनी चाहिए के बारे में अपने सुझाव, सलाह संषेप या विस्तार में यदि इस मंच की इस पोस्ट पेज (सर्वे हिताय सर्वे सुखाय कंपनी) के कॉमेंट बॉक्स में देंगे तो एक “सर्वे हिताय, सर्वे सुखाय” को ध्यान में रख कर एक नयी कंपनी की सरंचना, स्थापना आसानी से की जा सकेगी जो कानून सम्मत भी हो और आप सभी को सर्वमान्य भी हो.

      आशा हे की देश हित में आप अपने सुझाव, विचार इस पोस्ट के पेज “सर्वे हिताय सर्वे सुखाय कंपनी” पर जरुर कॉमेंट करेंगे.

      कॉमेंट करने के लिए शीघ्र विजिट करें :- rcmmanch.blogspot.com

      आपका हितेषी

      सत्य प्रकाश
      *************************************

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