RCDWA BLOOD-WRITTEN LETTER TO CM

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अब अपना खून बहा रहे हैं आरसीएम कर्मचारी

Courtesy: Badhata Rajasthan – 27 May 2012

मुख्यमंत्री को अपने खून से खत लिखने का सिलसिला शुरू
जयपुर, 27  मई। राजस्थान आरसीएम उपभोक्ता एवं वितरक कल्याणा समिति की ओर से आरसीएम को पुन: चालू करने की मांग को लेकर दिए जा रहे धरने पर बैठे कार्यकर्ताओं ने खून से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पोस्टकार्ड लिख अपनी गुहार लगाई है।
आरसीएम प्रवक्ता कदमसिंह ने बताया कि घरने पर बैठे पांच सौ लोगों ने मुख्यमंत्री को पोस्टकार्ड भेजा है।
इन पोस्टकार्डों में खून से लिखे पोस्टकार्ड भी शामिल है। उन्होंने बताया कि इसी मांग को लेकर तथा आरसीएम का सर्वर चालू करवाने की मांग को लेकर प्रदेश के सभी विधायकों व सांसदों को भी एक पत्र भेजा जा रहा है, जिसमें आरसीएम को बंद करने की  वस्तुस्थिति से अवगत करवाते हुए इसे पुन: चालू करवाने के लिए मुख्यमंत्री से अनुरोध का आग्रह किया गया है।

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1 A.S.SAINI May 27, 2012 at 6:31 am

BAPU NE KAHA THA
AAJADI MIL GAI AB CONGRESS KO KHATM KAR DENA CHAHAYE
BAPU KI ANTIM ICHHA PURI KARNA HR DESWASI KA PARTHAM KATVYA HAI

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2 A.S.SAINI May 27, 2012 at 6:34 am

RESPECTED RCM ASSOCIATION LEADERS
KERLA KI GUIDELINE PAR VICHAR KRE

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3 MAHATAMA May 27, 2012 at 9:03 am

congress ab khatam hi samjho ,
jai RCM
MERA BHARAT MAHAN

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4 K.Gangadhar,Andhra pradesh May 27, 2012 at 10:42 am

RCM parajit nahi hota
Kyonki,
Karodonke
dilonko jeet liya hy
Karodon dilonka dhadkan hy
09291622677

Reply

5 subhash kumbar May 27, 2012 at 10:44 am

jai rcm jay rcm jai rcm 28/05/2012 kuch thoo nirnay dijiye date agge math daliye namskar

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6 manoj kumar sahoo May 27, 2012 at 2:47 pm

des ki bybastha ko shrif rcm hi paribartan karshakta he.

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7 Vikash Gupta May 27, 2012 at 3:54 pm

S.P. GAHLOT URF SOMPRAKASH GAHLOT JI KYA HAAL HAIN

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8 rekha mundhra May 27, 2012 at 4:21 pm

jay rcm, rcm chaloo karna hoga. har ek ko uski jarorat hain.

Reply

9 PRAMOD KR MISHRA May 27, 2012 at 4:35 pm

DESH KI YEHI PUKAR CONGRESS KO KARO BY-BY (congress ab khatam hi samjho.) 09435104117

Reply

10 Kukan May 27, 2012 at 4:50 pm

I love rcm

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11 Kukan May 27, 2012 at 4:55 pm

Rcm meri jaan hai. mai rcm ko jaan se jayada pyar karta hoon. halanki mere a/c mai rcm se ek bhi paisa nahin aaya hai.

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12 RANDHIR KR JHA May 27, 2012 at 4:59 pm

YE SARKAR SIRF PARESHAN KARNA JANTA HAI SIRF AB YE SARKAR NAHI AAYEGI JAY RCM

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13 M.S.BISHT May 27, 2012 at 6:09 pm

Agar Rajesthan sarkar nahi chati he ke rcm rajesthan me chale to dushera rajy me bhee system ko chalu keya jaa saktk hee………

Reply

14 आर सी एम सेवक May 27, 2012 at 6:25 pm

काँग्रेस पार्टी नेताओँ की नही बल्कि राक्षसोँ की पार्टी है, जिसमेँ- अशोक गहलोक (रावण), राहुल गाँधी (बकासुर), सोनिया गाँधी (पूतना राक्षस), और भी कई राक्षस हैँ।कांग्रेस के इन राक्षसोँ का जड से नाश करना है। अगर आप लोग इस देश मेँ शाँति,सुरक्षा, रोजगार चाहते हैँ, तो आने वाले चुनाव मेँ काँग्रेस के इन नरभक्षी राक्षसो को वोट बिलकुल ना देँ। कांग्रेस को बुरी तरह हराना है।काँग्रेस की ऐसी दुर्दशा करनी है कि इन तेताओँ को इनकी औकात पता चल जाये। और ये अपनी औकात पर आ जाये। सभी राज्योँ के RCM DISTRIBUTORS और साधारण जनता से मेरा अनुरोध है कि इस बार के चुनाव मेँ कांग्रेस को बुरी तरह हराना है। तभी इस सोनिया,राहुल,और अशोक गहलोत की औकात ठिकाने पर आयेगी। JAI RCM.

Reply

15 sanjeev kumar jha May 27, 2012 at 10:25 pm

aap isea chalu hone de ku ki yah har dil ke pukar haa. jai RcM..
varna haha kaar mach jaegi pure desh me .

Reply

16 kashi kant jha May 27, 2012 at 10:37 pm

ku dukhate ho dil in distributer ka, ku cupate ho chahra in jababo ka, soch samjh kar karna kuch bhi kam, nahi to ho ge baad me badname.
jai RCM. jai Hind, jai Bhart mata ke jai.
kashi kant jha.
Muraitha, Darbhanga, Bihar.

Reply

17 K.Gangadhar,Andhra pradesh May 27, 2012 at 11:20 pm

Samasya jitni badi hy
Jeet bhi votna hi badi hoti hy
BIG LOSS—BIG PROFIT
09291622677

Reply

18 devvrat May 28, 2012 at 8:49 am

rcm ko chalu kero

Reply

19 A.S.SAINI May 28, 2012 at 9:20 am

respected rcm association leaders
aaj ki date ke baad aage ke kaam par vichar kre
other state se kya system ko start kiya ja sakta hai is par vichar kre
aage court ki chhuti padne wali hai

Reply

20 karnveer May 28, 2012 at 9:52 am

Khabarkosh.com

कहीं गहलोत को ही न ले डूबे आरसीएम प्रकरण ?
“”"”"”"”"”"”"”"”"”"”"”"”"”"”"”"”"”"”"”"”"”"”"”"”

May 27, 2012 7:21 pm

यूं किस तरह कटेगा कड़ी धूप का सफर,
सर पर ख्याले यार की चादर ही लिये चलो।

इस चिलचिलाती धूप और धूलभरी आंधियों के बीच पिछले 20 दिनों से जोशीले नारे लगा रहे लोगों के सिर पर आरसीएम नामक ख्याल की चादर है, जिसकी याद में, अच्छे की उम्मीद में उनका कड़ी धूप का सफर जयपुर के उधोग मैदान में जारी है।
आरसीएम मतलब राइट कंसेप्ट मार्केटिंग बिजनेस, भीलवाड़ा की कम्पनी फैशन सूटिंग्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विगत 11 वर्षों से संचालित किया जा रहा था। यह प्रत्यक्ष विक्रय प्रणाली पर आधारित बहुस्तरीय व्यवसायिक व्यापार है जो भारत में नर्इ आर्थिक नीतियों के साथ पशिचम से आया और बहुत जल्दी ही देशभर में फैल गया, आज अनुमान है कि भारत में एमएलएम कम्पनियों का कारोबार 100 अरब रुपए का आंकड़ा पार कर गया है, एक मोटे अंदाज के मुताबिक वर्ष 2020 तक इस व्यापार प्रणाली से 50 करोड़ लोगों को रोजगार हासिल होने की संभावना है।
एक तरफ पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था खतरे के निशान पर बह रही है, अमेरिका जैसा सम्पन्न देश अर्थ संकट से जूझ रहा है, विश्वभर की औधोगिक इकार्इयों से मजदूरों और कर्मचारियों की छंटनी हो रही है, बेरोजगारी भयावहता का स्तर पार कर चुकी है, जिसके चलते मानव जाति का आर्थिक सामाजिक संतुलन गड़बड़ा रहा है। समाज में आर्थिक अपराधों में वृद्धि दर्ज की जा रही है, ऐसे में भारत जैसे विकासशील देश का आर्थिक महाशकित बनने का स्वप्न तभी सार्थक हो सकता है जब हम स्वावलम्बी और आत्म निर्भर होने पर जोर दे सके।
इस दिशा में भीलवाड़ा की आरसीएम बिजनेस ने काफी महत्वपूर्ण नवाचार किये तथा अपने 800 उत्पादों, तकरीबन 8 हजार वितरण केेंद्रों और 1 करोड़ 31 लाख उपभोक्ताओं के जरिये देश में एक नये किस्म का आर्थिक लोकतंत्र स्थापित करने में अहम भूमिका निभार्इ। क्योंकि केवल संवैधानिक, सामाजिक व राजनीतिक लोकतंत्र तब तक अधूरा ही है जब तक कि देश में आर्थिक संसाधनों तक सबकी समान पहुंच नहीं बन जाये।
सदियों से इस देश में जाति और वर्ण आधारित व्यवस्था के चलते व्यापार वाणिज्य वैश्यवर्णीय कुछ समुदायों तक ही सीमित रहा आजादी के बाद तक भी सेठ, लाला और साहूकारों की वही घिसी पिटी पारम्परिक व्यवस्था चलती रही जो शोषण और जमाखोरी तथा घटिया उत्पादन व मिलावट के खंभों पर टिकी हुर्इ थी। वक्त ने करवट ली। वैशिवक स्तर पर व्यवसाय के लिये विभिन्न देशों के दरवाजे खोले गये, भारत ने भी सन 1990-91 में उदारीकरण, भूमण्डलीकरण और निजीकरण की नर्इ अर्थ नीति को अपनाया तथा विश्व बाजार की प्रतिस्पर्धा में स्वयं को खड़ा किया, आशा की गर्इ कि नर्इ आर्थिक नीतियों के चलते कोर्इ भी बिजनेस करने तक आमजन की भी पहुंच होगी, इंस्पेक्टर राज खत्म होगा, लाला राज खत्म होगा और आम से आम आदमी जिसे जनसाधारण कहा गया है वह भी व्यापार वाणिज्य में भागीदारी कर पायेगा।
यह माना जा सकता है कि प्रत्यक्ष विक्रय प्रणाली इस मुल्क के ‘लाला राज और ‘इंस्पेक्टर राज को खत्म करने में बहुत कामयाब हुर्इ, क्योंकि उसमें उत्पाद की सर्वोच्च गुणवत्ता ही सर्वोपरि चीज मानी गर्इ तथा कहा गया कि ऐसा व्यवसाय जिसमें न निवेश की जरूरत और न ही फैक्ट्री की, दफ्तर भी नहीं चाहिये, कोर्इ झंझट नहीं, भागीदारी करो और आय प्राप्त करो, मतलब कि बिना निवेश की साझेदारी ! इस पद्धति ने बेरोजगार होती युवा पीढ़ी को आकर्षित किया, वहीं विज्ञापनों से लुटे-पिटे उपभोक्ताओं को भी लुभाया क्योंकि स्थापित व्यापारिक पद्धतियों में बड़ा हिस्सा विज्ञापन तथा विक्रय वितरण की पुरातन श्रृखंला के पास रह जाता था, ग्राहक को किसी किस्म का केार्इ लाभ नहीं होता, उपभोक्ता पारम्परिक व्यापार प्रणाली में सर्वाधिक शोषित होता है, फिर जागो ग्राहक जागों जैसे पाखण्ड करने पड़ते है मगर एमएलएम में ग्राहक ही वह धुरी है, जिसे सीधे फायदा मिलता रहता है। बेशक इस प्रणाली में कर्इ किस्म की खामियां हो सकती है साथ ही बड़ी संख्या में फर्जी कम्पनियों का दखल भी इसमें बढ़ा है, फलत: रियल एमएलएम और चिटफण्ड कम्पनियों के बीच का फर्क कर पाना ही मुशिकल हो गया है। उसी का नतीजा आज आरसीएम के करोड़ो डिस्ट्रीब्यूटर्स भुगत रहे है।
देश को आर्थिक महाशकित बनाने की दिशा में स्वदेशी प्रयासों के तहत इस सदी का सबसे बड़ा प्रयोग आरसीएम के नाम पर भीलवाड़ा में प्रारम्भ हुआ तथा 11 वर्षों तक सुचारू रूप से जारी रहा, इस दौरान इस कम्पनी ने लाखों लोगों की जिन्दगीयां तो बदली ही, अर्थ संकट झेल रही सरकारों को भी सैकड़ों करोड़ रूपए का राजस्व देकर उन्हें भी मजबूत किया जो कि अपने आप में एक सराहनीय प्रयास कहा जा सकता है।
सत्तारूढ़ दल के नेताओं के दागदार इतिहास के प्रकटीकरण, स्थानीय भूमाफिया और सत्तासीनों के अपवित्र गठजोड़, दिल्ली में उच्च स्तर पर रिटेल में एफडीआर्इ लाने का फैसला तथा राजस्थान कांग्रेस में अशोक गहलोत व सी.सी. जोशी के मध्य चल रहे सत्ता संघर्ष के बीच आरसीएम को बलि का बकरा बनना पड़ा।
यह दुनिया का आठवां अजूबा है कि बिना किसी व्यकित की शिकायत के एक मुखबिर से प्राप्त जानकारी के आधार पर पुलिसिया डण्डे के बल पर आरसीएम को 9 दिसम्बर 2011 को जबरदस्ती बंद करवा दिया, तब सत्ताधारी नेताओं, पुलिस व प्रशासन के लोगों का तर्क यह था कि राजस्थान में मल्टी लेवल मार्केटिंग कम्पनियों के विरूद्ध चलाये जा रहे जांच अभियान के चलते आरसीएम पर भी कार्यवाही की गर्इ है, जल्दी ही सब कुछ ठीक हो जायेगा, लेकिन आज पांच माह बीत जाने पर भी कुछ भी ठीक होता प्रतीत नही हो रहा है, इससे यह शक पुख्ता हो जाता है कि यह पुलिस ने गोल्डसुख में फंसी अपने आला अफसरान की बीबियों के फ्राड को ढंकने और खुद की खाल बचाने के उíेश्य से एक सुनियोजित षडयंत्र के तहत किया है, अगर ऐसा नहीं होता तो गोल्डसुख फ्राड के उजागर होने के 6 माह पहले ही भीलवाड़ा की फिजां में आरसीएम पर शिकंजा कसने सम्बन्धी तैयारियों की सूचनाएं कैसे तैरने लगी थी ? यह महज संयोग नहीं हो सकता है कि उच्च स्तर पर ये निर्देश दिये गये कि सभी विभागों को सक्रिय किया जाये कि वे आरसीएम की गलतियां पकड़े क्योंकि सरकार उसके विरूद्ध एक बड़ा आपरेशन करना चाहती है। अन्तत: सरकार ने वह कर दिखाया, यह किन लोगों के निर्देश पर हुआ, इस सुनियोजित आपरेशन में कौन-कौन शामिल थे, किन अधिकारियों को इसकी जिम्मेदारी दी गर्इ और किनको उसे करने का क्या पुरस्कार मिला, यह बातें अब जगजाहिर है, जो भी स्थानीय राजनीति और सत्ता केंद्रों के बारे में जानते है, वे इसे अच्छी तरह समझ चुके है, जल्दी ही आरसीएम पर हुर्इ कार्यवाही के सच को दस्तावेजी सबूतों के साथ हम भी उजागर करेंगे।
खैर, अभी चर्चा उन जाबांज योद्धाओं की, जो सत्य की जंग को इस जानलेवा गर्मी में भी लड़ रहे है। जयपुर के ऐतिहासिक स्टेच्यू सर्कल पर कर्इ सामाजिक और राजनीतिक संघर्ष व आन्दोलन हुये है और होते रहेंगे, मगर यह पहला आर्थिक व्यापारिक जन आन्दोलन है जिसमें इंकलाब जिन्दाबाद के नारे साफ सुने जा सकते है। आरसीएम उपभोक्ता एंव वितरक कल्याण समिति के मीडिया प्रभारी अवधेश सिंह एवं रामशंकर सिंह के मुताबिक संघर्षरत आरसीएम के उपभोक्ताओं की बैचेनी बढ़ रही है क्योंकि सरकार उनकी शांतिपूर्ण व अहिंसात्मक भाषा को नहीं समझकर यह संदेश दे रही है कि सरकारें केवल ‘पटरी उखाड़ने वालों की उग्रता की भाषा ही समझती है। उनके अनुसार राजस्थान की राजधानी जयपुर के उधोग मैदान में बेहद शांतिपूर्ण ढंग से 20 दिन से धरने पर बैठे आरसीएम उपभोक्ताओं के धैर्य का बांध कभी भी टूट सकता है। सरकार के टालमटोल व ढुलमुल रवैये से देश भर के लाखों उपभोक्ताओं को आक्रोश से भर दिया है। सरकारी के असहिष्णु रवैये के कारण मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की छवि पर भी जबरदस्त असर पड़ रहा है, देश भर का सोशल मीडिया उन्हें एक ऐसे मुख्यमंत्री के रूप में स्थापित कर रहा है। जो रोजगार छीनने व सरकार को सालाना 125 करोड़ रुपये की राजस्व हानि पहुंचाने के लिये जाना जायेगा। इतना ही नहीं बलिक इस पूरे आंदोलन से कांग्रेस व उसके घटक दलों पर भी बुरा असर होने की संभावना बन गर्इ है, कहा जा रहा है कि पूरे देश में सीधे तौर पर आरसीएम से 1 करोड़ 31 लाख जुड़े हुए है तथा तकरीबन 10 करोड लोगों तक आरसीएम किसी न किसी रूप में अपनी पहुंच रखता है, ऐसे में उसके विरूद्ध की गर्इ नाजायज कार्यवाही व सरकार के तानाशाहीपूर्ण असंवेदनशील व्यवहार के चलते इसका खामियाजा आने वाले चुनाव में कांग्रेस तथा यूपीए को उठाना पड़ सकता है, केंद्र में शामिल संप्रग के घटक दलों के कर्इ सांसदों ने प्रधानमंत्री कार्यालय को इस खतरें से अवगत कराते हुए आशंका जतार्इ है कि कहीं सरकार के लिये यह आत्मघाती न साबित हो।
अपने ही विधायकों की बगावत और अल्पसंख्यकों व महिलाओं तथा वंचित वर्गों पर बढ़ रहे अत्याचारों के कारण अच्छे खासे बदनाम होते जा रहे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर आरसीएम पर की जा रही कार्यवाही की गेंद केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री सी.पी. जोशी द्वारा फैंकी जाने का भी कर्इ लोग राजनीतिक अर्थ निकाल रहे है क्योंकि शुरूआती दौर में मीडिया और जानकारों का मानना था कि आरसीएम के विरूद्ध की गर्इ कार्यवाही में एक केंद्रीय मंत्री (डा. सी.पी. जोशी) का हाथ है मगर अब राज्य सरकार द्वारा अपनाये जा रहे रवैये, धरने के प्रति उदासीनता और गार्इड लार्इन बनाने को लेकर की जा रही अनावश्यक देरी ने इस गेंद को वापस गहलोत के पाले में फैंक दिया है, राजनीतिक सूत्रों का मानना है कि ऐसा करके डा. सी.पी. जोशी व उनके लोगों ने गहलोत को एक राष्ट्रव्यापी बदनामी की ओर धकेलने में सफलता हासिल कर ली है।
आरसीएम का आन्दोलन धीरे-धीरे गरम तेवर वाला होता जा रहा है, राज्य सरकार और मुख्यमंत्री गहलोत के प्रति आन्दोलनकारियों की तल्खी बढ़ती जा रही है, मंच पर अब कड़े शब्द इस्तेमाल किये जा रहे है, यहां तक कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के विधानसभा क्षेत्र जोधपुर से बड़ी संख्या में आए आरसीएम उपभोक्ताओं ने गहलोत के खिलाफ जबरदस्त नारेबाजी की एवं अगले चुनाव में कांग्रेस का सफाया करने का संकल्प भी लिया।
इस से भी आगे बढ़कर आरसीएम उपभोक्ताओं का संघर्ष अब खूनी संघर्ष का रूख अखितयार कर रहा है, हालांकि वे हथियार नहीं उठा रहे है मगर सैकडों उपभोक्ताओं ने अपने खून से गहलोत को पोस्टकार्ड लिखकर मुख्यमंत्री कार्यालय को पोस्ट कर दिये है। इनका कहना है कि यह इंसानों का लहू है, यह लहू गहलोत के कठोर दिल को पिघला पाता है या नहीं ? इससे पहले भी मध्यप्रदेश के एक आरसीएम वितरक नवीन साहू द्वारा कम्पनी बंद होने से हुर्इ आर्थिक तंगी व भुखमरी के हालात के चलते आत्महत्या कर ली थी, जिसकी मौत के बोझ तले भी गहलोत सरकार दबी हुर्इ है।
राजस्थान की गहलोत सरकार को अब अन्य राजनीतिक दलों से भी इसके लिये आलोचना सहन करनी पड़ रही है। प्रधानमंत्री कार्यालय के मंत्री नारायण सामी से मिली कड़ी फटकार के बाद राजस्थान सरकार ने आरसीएम उपभोक्ता एंव वितरक कल्याण समिति के प्रतिनिधियों को बुलाकर बात की तथा शीघ्र ही एमएलएम के लिये गार्इड लाइन बनाने के लिए उन्हें आश्वस्त किया, इस बाबत काफी काम भी हुआ है, गृह सचिव अशोक संपतराम के पास अभी यह मामला लमिबत है, बताया तो यह जा रहा है कि उन्होंने एक ड्राफ्ट गार्र्इड लाइन विधि मंत्रालय को भेजी है, वहां से परीक्षण व मार्गदर्शन के बाद राज्य सरकार इस पर फैसला करेगी लेकिन सरकार की मंथर गति इन आरसीएम वितरकों को सुहा नहीं रही है, वे जल्द ही कोर्इ फैसला चाहते है।
उनके आन्दोलन पर मुख्य विपक्षी दल भाजपा एकदम चुप है, इस पर आरसीएम के उपभोक्ताओ को घोर आश्चर्य हो रहा है कि विपक्ष कैसे इस मामले में सत्ता पक्ष का पिछलग्गू हो गया है, मगर राजस्थान के कुछ मुखर विधायकों ने इस पर खुलकर अपनी राय जाहिर करके जता दिया है कि अगर इस मसले का शीघ्र ही हल नहीं निकाला गया तो गहलोत के लिये यह गले की हडडी भी बन सकता है।
माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के विधायक कामरेड अमराराम, राजस्थान राजपूत समाज के अध्यक्ष गिरीराज सिंह, कांग्रेस विधायक प्रताप सिंह खाचरियावास, निर्दलीय विधायक रणवीर पहलवान तथा राजस्थान प्रदेश सीटू के अध्यक्ष रामपाल सैनी तथा केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल इत्यादि ने खुलकर आरसीएम उपभोक्ताओं के आन्दोलन का समर्थन करके इस प्रकरण के राजनीतिक निहितार्थों की तरफ साफ र्इशारा कर दिया है। अब भी अशोक गहलोत नहीं समझे तो यह उनके राजनीतिक जीवन की बहुत बड़ी भूल ही होगी।

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21 K.ANJAIAH 9989354401 May 28, 2012 at 10:26 am

jai rcm friends …… rcm will open soon with great power……… JAI BHAARATH

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22 K.Gangadhar,Andhra pradesh May 28, 2012 at 12:31 pm

Ek raat me dukan ko aag lagi thi
Saamaan pura jalgaya
Dukandarne subah dekhkar ek board lagaya
DUKAN JALGAYA-LEKIN VISWASTO ZINDA HY
DUKAN KAL ZARUR CHALU HOGI
Shak nahi-viswas hy- RCM bhi chalu hoga
09291622677

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23 mallikarjun May 28, 2012 at 5:23 pm

THE DAY GHANDHIJI GETs NOBEL PRIZE , CONGRESS WILL ZEROED IN, WHICH ONE WILL BE FIRST.

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24 आर सी एम सेवक May 28, 2012 at 5:47 pm

हे भगवान, इस अशोक गहलोत को कभी सुख शान्ति न मिले। भगवान करे इस अशोक गहलोत के हाथ पैरोँ मेँ लकवा हो जाये। इसके वँश का पूरे खान्दान का सर्वनाश हो जाये। इस कमीने का वँश कभी आगे न बढ पाये, इसकी चिता को आग देने वाला भी कोई न रहे। और यही सब कुछ उस हराम की नाजायज औलाद C.P JOSHI के साथ हो। इन दोनो ने हमारे RCM को बदनाम किया है। ये मेरे दिल की बद्दुआ है इन दोनो कमीनो के लिऐ। जब तक RCM चालू नही हो जाता मै इन दौनो को ऐसा कहता रहूँगा। JAI RCM,JAI RRCCMM.

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25 www.jbmparivar.webnode.com June 15, 2012 at 2:52 pm

जेबीएम परिवार आपका स्‍वागत करता है। मुझे पूर्ण विश्‍वास है कि आप द्वारा जेबीएम परिवार में शामिल होने का लिया गया फैसला, आपके सपनों को साकार करने में मददगार सिद्ध होगा। जय भारत मार्केटिंग केवल मार्किटिंग नहीं बल्‍कि खुद को विकसित करने का एक सुनहरा अवसर है। जय भारत

जेबीएम परिवार के दरवाजे खुले हैं उनके लिए….
हर व्यक्ति की आंखों में स्‍वप्‍न होते हैं, और वह उन स्‍वप्‍नों के लिए दिन रात दौड़ता है, लेकिन जिन्‍दगी एक झटका देती है, वह कुछ समय के लिए रूकता है, फिर उसके दिल से आवाज निकलती है, एक दरवाजा बंद हुआ है तो दूसरा ईश्‍वर ने आपके लिए खोला है, अब साहस उस व्यक्ति को करना रहता है, जैसे सूर्य रोज निकलता है, मगर सूर्य रोशनी उस कमरे में देता है, जिसका दरवाजा खुला हो, जेबीएम परिवार का दरवाजा उन लोगों के लिए ईश्‍वर ने खोला है, जो नेटवर्किंग की दुनिया में अपने नाम की अमिट छाप छोड़ना चाहते हैं। समु्द्र की गहराई तक जाने के लिए किनारे पर खड़े रहने की बजाय सही साधनों का प्रबन्ध करके साहस के साथ कूद जाने वाले को ही हीरे, मोती प्राप्त होते है, करने से ज्‍यादा सोचने में वक्‍त जाया ना करें, वक्‍त व छूटी हुई ट्रेन को पकड़ना बहुत मुश्किल होता है.

High Lights प्रमुखताएँ

साथियों, आज हमारे देश में नेटवर्किंग, प्रोडक्ट डायरेक्ट सेलिंग का कार्य कोई नया नहीं रह गया हें, इस समय कई कंपनियाँ कार्यरत हें, सरकार ने कहा है कि वर्ष 2022 तक देश में रोजगार के 50 करोड़ नए रोज़गार के अवसर पैदा करने के लक्ष्य में डायरेक्ट सेलिंग कंपनियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में सीधी बिक्री का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2003 से 2010 के दौरान इसमें 60 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह उद्योग इस समय 49,400 करोड़ रुपये का है। वर्ष 2013 तक इसके 71,500 करोड़ रुपये होने की उम्मीद हे, और आने वाले वर्षों में यह और तेज़ी से बढ़ेगा.
देश में इस समय जेबीएम परिवार, एन-मार्ट, आई एम सी, जी टी एफ एस, आर सी एम, फॉरएवर, वेस्टिज, डी-हेल्थ एण्ड केयर, एमवे इंडिया, ओरीफ्लेम, टप्परवेयर, एवन ब्यूटी प्रॉडक्ट्स, के-लिंक हेल्थकेयर, 4लाइफ ट्रेडिंग इंडिया, मैक्स न्यूयार्क लाइफ इंश्योरेंस, मोदीकेयर जैसी कई कंपनियां डायरेक्ट सेलिंग कारोबार में सक्रिय हे जिनसे करोड़ो लोग लाभावन्तित हो रहें हें.

आप भी अपने खाली समय का सदुपयोग नेटवर्किंग का कार्य अपना कर कर सकते हें व अपना और अपने देश का भविष्य उज्ज्वल कर सकते हें, इसके लिए वर्तमान में तेज़ी से पूरे देश भर में अपना डंका बजवाने वाली और अन्य कंपनियों से तुलनात्मक तौर पर सबसे ज़्यादा अच्छा, सरल और वास्तव में हर एक को कमाई देने वाला बिजनस प्लान ले कर आने वाली कंपनी “जेबीएम परिवार” JBMparivar.com में आपका स्वागत हें.

कोई भी नेटवर्किंग कंपनी को जोइन करने से पहले आप इस कंपनी के नीचे दी गयी बिजनस प्लान की प्रमुखताएँ ‘High Lights’ और प्रॉडक्ट को आप उस अन्य कंपनी के प्लान और प्रॉडक्ट से ज़रूर टेली कर लें फिर निर्णय लें ताकि वास्तव में आपके फालतू समय का सदुपयोग हो और भरपूर कमाई भी हो साथ में देश हित भी सर्वोपरि हो.

S. No
विषय
JBM parivar
अन्य कंपनी

1
मीटिंग प्रवेश शुल्क
किसी तरह का शुल्क नहीं लिया जाता हें.
30 से 500 रुपये शुल्क लिया जाता हें.

2
ज़ोइनिंग शुल्क
मात्र 240 रु में मनपसंद सामान के साथ ज़ोइनिंग कर सकते हें
1500 से 3000 में थोपे गये सामान के किट से ज़ोइनिंग हो पाती हें

3
किट के सामान की बाजार में कीमत %
पूरी 100%
आधी 50% से भी कम

4
खुद की ज़ोइनिंग किट की बी वी पर खुद को आय
22%
0%

5
कमीशन सार
खरीदी के बिजनस वैल्यू का कुल 51% हिस्सा वितरण करती है
खुद की खरीद पर : 22%
5000 to 9999 : 2%
10,000 to 19,999 : 4%
20,000 to 39,999 : 6%
40,000 to 69,999 : 8%
70,000 to 1,14,999 : 10%
1,15,000 to 1,39,999 : 12%
1,40,000 to 1,74,999 : 14%
1,75,000 and above : 16%

खरीदी के बिजनस वैल्यू का कुल 36% हिस्सा ही वितरण करती है
खुद की खरीद पर : 10%
5000 to 9999 : NIL
10,000 to 19,999 : 1.5%
20,000 to 39,999 : 3%
40,000 to 69,999 : 5%
70,000 to 1,14,999 : 7%
1,15,000 to 1,69,999 : 9%
1,70,000 to 2,59,999 : 11%
2,60,000 to 3,49,999 : 13%
3,50,000 and above : 15%

6
बेंक में फॅंड ट्रांसफर
1 रुपया भी कमीशन बना हो तो भी ट्रांसफर होगा
सभी कटोती काटनें के बाद कम से कम 500 रु का कमीशन जमा हो जाये तो ही फॅंड ट्रांसफर होगा

7
स्वंय की मासिक खरीद के बी वी पर परफॉर्मेंस बोनस का %
स्‍वयं की खरीदी के बी वी का 22% एवं 16% तक टीम परफॉर्मेंस बोनस, कुल 38%
स्‍वयं की खरीदी के बी वी का 10% एवं 15% तक टीम परफॉर्मेंस बोनस, कुल 25% केवल

8
हर भुगतान पर कटौती
0 रु
30 से 300 रु तक राशि अनुसार

9
लीडरशिप बोनस
ए लेग में 135000 बी वी एवं बी लेग में केवल 40000 बी वी होने पर लीडरशिप बोनस 3 फीसदी + 2000 रुपए

ए लेग में 280000 बी वी एवं बी लेग में 70000 बी वी होने पर लीडरशिप बोनस कुल 2000 रुपए केवल

10
लीडरशिप बोनस की शर्तें
लीडरशिप बोनस की स्थति में जिस माह भी पहुँचेगा उस हर माह का दिया जाएगा

लीडरशिप बोनस की स्थति में पहुँचने के पश्चात दूसरे माह में भी उसी स्थति में बने रहने पर ही दिया जाएगा और लगातार हर माह उसी स्थति में बने रहने पर ही जारी रहेगा

11
रॉयल्टी बोनस
ए लेग में 175000 बी वी एवं बी लेग में केवल 70000 – 175000 बी वी होने पर रॉयल्टी बोनस 2 – 6 फीसदी + 4000 रुपए

ए लेग में 350000 बी वी एवं बी लेग में 115000 – 350000 बी वी होने पर रॉयल्टी बोनस 2 – 6 फीसदी + 4000 रुपए

12
रॉयल्टी बोनस की शर्तें
रॉयल्टी बोनस की स्थति में जिस माह भी पहुँचेगा उस हर माह का दिया जाएगा

रॉयल्टी बोनस की स्थति में पहुँचने के पश्चात दूसरे माह में भी उसी स्थति में बने रहने पर ही दिया जाएगा और लगातार हर माह उसी स्थति में बने रहने पर ही जारी रहेगा

13
टेक्‍नीकल बोनस
दोनों लेगो में 250000 होने पर 1%, 500000 होने पर 1.5%, 1000000 होने पर 2%, 2000000 होने पर 2.5%
+
कंपनी के कुल मासिक बिजनस वोल्यूम पर 1.5% औसत आधार पर हर टेक्नीकल अचिवर के बीच डिवाइड किया जाता हें
ये बोनस आपकी मेन लेग के बी वी में से 2.5 लाख घटा कर शेष के औसत के आधार पर निकाला जाता हे

दोनों लेगो में 500000 होने पर 1%, 1000000 होने पर 1.5%, 2200000 होने पर 2%, 4800000 होने पर 2.5%
+
कंपनी के कुल मासिक बिजनस वोल्यूम पर 1.5% औसत आधार पर हर टेक्नीकल अचिवर के बीच डिवाइड किया जाता हें
ये बोनस आपकी बी लेग के बी वी में से 5 लाख घटा कर शेष के औसत के आधार पर निकाला जाता हे

14
टेक्‍नीकल बोनस की शर्तें
टेक्‍नीकल बोनस की स्थति में जिस माह भी पहुँचेगा उस हर माह का दिया जाएगा

कम से कम 2 माह किसी रॉयल्टी लेवल पर रहना हे, उसके पश्चात 1 माह 6% लेवल रॉयल्टी पर, व उसके पश्चात 1 माह में 5-5 लाख या इससे ज़्यादा का बी वी दोनो लेगो में होना चाहिये, और इन चारो माह का लक्ष्य 6 माह की अवधि मे पूर्ण हो जाना चाहिये या जब भी किसी भी 6 माह या उससे कम अवधि में ये चारों लक्ष्य पूरे होने पर ही उसकी टेक्निकल बोनस की पात्रता मानी जाएगी.

15
दुर्घटना म्रत्यु अनुदान
1000 रु. या ज़्यादा की खरीद प्रति माह करने पर
नॉमिनी को 2.51 लाख की अनुदान राशि प्रदान की जाएगी
हर सक्रिय डिस्ट्रीब्यूटर को कंपनी अपने परिवार का सदस्य मानती हे और किंतु-परंतु के शर्तों के जाल में नहीं उलझाती, यानी की जिस माह भी उसकी 1000 रु की खरीद होगी उस माह के लिए वह इसका पात्र होगा

नॉमिनी को 2 लाख की अनुदान राशि प्रदान की जाएगी
इसकी पात्रता लगातार 3 माह तक खरीद करने के पश्चात 4 माह से मानी जाएगी और पात्रता को जारी रखने के लिये लगातार हर माह खरीद जारी रहनी चाहिये, यदि किसी माह 1000 रु. की खरीद छूट जाती हे तो वापस 3 माह तक खरीद करने के पश्चात 4 माह से ही मानी जा सकेगी.

16
खरीद प्रोत्साहन राशि
1000 रु. या ज़्यादा की खरीद प्रति माह करने पर
कंपनी अपने इस तरह के सक्रिय, समर्पित सदस्‍य को 5100 रुपए की गारंटिड प्रोत्‍साहन राशि के लिए चुनती है, जो “प्रथम आओ, प्रथम पाओ” की स्लेब के आधार पर गारंटेड हर सक्रिय सदस्य को प्राथमिकता के आधार पर मिलता ही हे

कंपनी अपने इस तरह के डिस्ट्रीब्यूटर को 11000, 5000, 1000 रुपए की प्रोत्‍साहन राशि के लिए चुनती है, जो कि कंपनी के कुल मासिक खरीद टर्न ओवर के 4% राशि जिसमे से भी दुर्घटना म्रत्यु अनुदान में देय राशि को घटा कर शेष राशि से क्रमश 1% – 1% – 2% राशि का वितरण ड्रा (लॉटरी) आधार पर करती हे.
(वर्षो से अपने नंबर आने का इंतजार करने वाले मेहनती सदस्य तो इस सिस्टम में इंतजार ही करते रह जाते हे और कल परसों आने वाले का नंबर ड्रा में आ जाता हे)

17
खरीद प्रोत्साहन राशि की शर्तें
“प्रथम आओ, प्रथम पाओ” की स्लेब के आधार पर गारंटेड हर सक्रिय सदस्य को प्राथमिकता के आधार पर मिलता ही हे
उल-जुलुल शर्तें नहीं थोपी जाती हें

इसकी पात्रता लगातार 3 माह तक खरीद करने के पश्चात 4 माह से मानी जाएगी और पात्रता को जारी रखने के लिये लगातार हर माह खरीद जारी रहनी चाहिये, यदि किसी माह 1000 रु. की खरीद छूट जाती हे तो वापस 3 माह तक खरीद करने के पश्चात 4 माह से ही मानी जा सकेगी

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