फ्रेंकिंग मशीन से डाक विभाग को चूना!
Courtesy: Rajasthan Patrika, Bhilwara – 17 Feb 2012
भीलवाड़ा। सुनहरे सपने दिखाकर लाखों लोगों से अरबों रूपए ऎंठने वाली आरसीएम ने देशभर में अपने ग्राहकों के साथ पत्र व्यवहार करने के लिए फें्रंकिंग मशीन के जरिए डाक विभाग को भी लाखों रूपए का चूना लगा दिया! वर्ष 2006 से चल रहे इस खेल का खुलासा हाल ही कम्पनी के ही एक छोटे से पत्र से हुआ। इस पर विभाग ने मशीन के कुछ डिवाइस जब्त कर मामले की जांच बिठा दी है। प्रारंभिक तौर पर इसमें लाखों रूपए के घालमेल की आशंका व्यक्त की जा रही है। पूरा खुलासा जांच होने के बाद ही हो सकेगा। इस संबंध में विभाग जांच की गोपनीयता का तर्क देकर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।
ऎसे खेला खेल
आरसीएम संचालकों ने यह हथकंडा अपने ही एक रिश्तेदार बिरदीचन्द के जरिए रचा बताया। पिछले दिनों विभागीय स्तर पर ही की गई शिकायत में बताया गया कि बिरदीचन्द पूर्व में डाक विभाग में कर्मचारी था और वर्तमान में आरसीएम में कार्यरत है। आरसीएम ने वर्ष 2006 में अपने लाखों ग्राहकों तक डाक पहुंचाने के लिए डाक विभाग से ‘फ्रेंकिंग मशीन’ की सेवाएं ली। विभाग से मशीन का लाइसेंस लेकर पांच वर्षाें में लाखों की डाक देश के विभिन्न हिस्सों में भेजी गई।
लेकिन बिरदीचन्द ने कंपनी का डाक खर्च बचाने के लिए फ्रेंकिंग मशीन में छेड़छाड़ करवाई। 21 अगस्त 2011 तक मशीन का इस्तेमाल करने के बाद इसका लाइसेंस निरस्त करवा दिया। निरस्ती पत्र के साथ ही आरसीएम ने उनके खाते में जमा राशि लौटाए जाने का पत्र दिया। पत्र को लेकर डाक विभाग ने लेखों को खंगाला तो मामला खुला। सामने आया कि फ्रेंकिंग मशीन लिए जाने के बावजूद रिकॉर्ड में कंपनी की ओर से लाखों रूपए के केश राशि पर टिकट खरीदे जाना दिखाया गया है। फ्रेंकिंग मशीन होने के बाद केश में टिकट खरीदे जाने पर विभाग को संदेह हुआ कि मशीन में छेड़छाड़ की गई है। संबंधित लेखों में काफी अनियमितताएं सामने आई।
क्या है ‘फ्रेंकिंग मशीन’
फ्रेंकिंग मशीन डाक की वस्तुओं की डाक भार व डाक शुल्क की अदायगी के लिए अनुमोदित डिजाइन की डाइयों के टिकट अंकित करने का काम करती है। इसकी मान्यता के लिए मूल्य डाई व लाइसेंस डाई जरूरी है। डाक विभाग ने भीलवाड़ा में 6 सरकारी, अर्द्धसरकारी व निजी कम्पनियों को फ्रेंकिंग मशीन आवंटित कर रखी है। इसके नियम काफी कड़े हैं।
इनका कहना है
अभी मामले की जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद जानकारी उपलब्ध करवा देंगे।
केजी गोस्वामी- अधीक्षक, डाकघर भीलवाड़ा
नहीं खुला बैंक लॉकर, आज फिर मांगेंगे रिमाण्ड
Courtesy: Rajasthan Patrika, Bhilwara – 17 Feb 2012
भीलवाड़ा। अमीर बनने का ख्वाब दिखाकर लोगों से लाखों रूपए हड़पने के आरोप में गिरफ्तार मल्टीलेवल मार्केटिंग कम्पनी आरसीएम के संचालकों को शुक्रवार को न्यायालय में पेश कर पुलिस फिर रिमाण्ड लेने का प्रयास करेगी। उधर, संचालकों के बैंक लॉकर गुरूवार को नहीं खुल सके, जबकि उदयपुर के गोवर्धनविलास में गोदाम से बरामद हुए आरसीएम के उत्पाद के मामले में उदयपुर पुलिस ने संचालकों से पूछताछ की।
जोधपुर के डांगियावास क्षेत्र से गत शनिवार को गिरफ्तार हुए आरसीएम के मुख्य संचालक त्रिलोकचंद छाबड़ा, उसके भाई भागचन्द व पुत्र सौरभ छाबड़ा से पुलिस विभिन्न ठिकानों पर ले जाकर पूछताछ कर रही है। रिमाण्ड की समायवधि शुक्रवार को पूरी होने पर पुलिस तीनों को न्यायालय में पेश करेगी। कार्यवाहक पुलिस अधीक्षक राजेन्द्रसिंह चौधरी ने बताया कि अभियुक्तों से पूछताछ में पुलिस को उनके काले कारोबार के साथ अहम जानकारियां मिली हैं। अब तक हुए खुलासे के आधार पर पुलिस तथ्य जुटा रही है। तीनों अभियुक्तों को शुक्रवार को न्यायालय में पेश कर दोबारा रिमाण्ड पर लेने का प्रयास किया जाएगा।
नहीं खुल सका लॉकर
तीनों अभियुक्तों ने पूछताछ में एक्सिस बैंक समेत अन्य बैंकों में खाते होने की जानकारी दी थी। इसी आधार पर एक्सिस बैंक का लॉकर खोला जाना है, लेकिन लॉकर की चाबी नहीं मिलने के साथ अन्य तकनीकी समस्याएं उभरने से गुरूवार को लॉकर नहीं खुल सका। चौधरी ने बताया कि लॉकर जल्द खोलने के साथ ही बैंक खातों की जांच भी पूरी कर ली जाएगी।
उदयपुर ले जाकर करेंगे पूछताछ
उदयपुर के गिर्वा पुलिस उपअधीक्षक अत्ताउर रहमान ने बुधवार को तीनाें अभियुक्तों से पूछताछ की। रहमान ने बताया कि गोवर्धन विलास थाना पुलिस ने क्षेत्र में आरसीएम का गोदाम सीज कर रखा है। मामले में आरोपी त्रिलोकचन्द से पूछताछ की गई, लेकिन विस्तृत जानकारी नहीं मिल सकी। आरोपी को बाद में गिरफ्तार कर उदयपुर लाया जाएगा। इसके बाद ही उससे विस्तृत पूछताछ हो सकेगी।
इनकम टैक्स टीम पुन: भीलवाड़ा पहुंची, संपत्ति की ली जानकारी तकनीकीकर्मी के चलते लॉकर नहीं खोल पाई पुलिस जयपुर पुलिस ने की छाबड़ा बंधुओं से पूछताछ
Courtesy: Dainik Bhaskar, Bhilwara – 17 Feb 2012
नगर संवाददाता. भीलवाड़ा
आरसीएम के डायरेक्टरों से गुरुवार को जयपुर पुलिस ने पूछताछ की। उदयपुर से दुबारा आई टीम ने संपत्ति का ब्यौरा लिया। स्थानीय पुलिस आज भी आरोपियों के बैंक लॉकर नहीं खोल पाई। एएसपी राजेंद्र सिंह ने बताया कि आरसीएम के खिलाफ पिछले दिनों जयपुर जिले के चौमूं थाने में करीब आधा दर्जन मुकदमे दर्ज हुए थे। इस संबंध में चौमू पुलिस भीलवाड़ा पहुंची। यहां मांडल में दर्ज मुकदमे में गिरफ्तार कंपनी के डायरेक्टर त्रिलोकचंद छाबड़ा, उसके बेटे सौरभ व भाई भागचंद से पूछताछ की। उदयपुर के इन्कम टैक्स अधिकारी दुबारा यहां आए। इन्होंने कंपनी की संपत्ति का ब्यौरा लेकर छानबीन की। उधर, छाबड़ा बंधु का एक्सिस बैंक स्थित लॉकर की तलाशी नहीं ली जा सकी। इसका कारण तकनीकी खामी बताया जा रहा है।
चुप क्यों है पुलिस
जांच को लेकर पुलिस अधिकारी चुप हैं। भीलवाड़ा पुलिस के अलावा प्रतिदिन कभी उदयपुर तो कभी जयपुर पुलिस गिरफ्तार छाबड़ा बंधुओं से घंटों तक पूछताछ कर रही है। इसके बावजूद पुलिस कोई नया खुलासा होने से इनकार कर रही है।

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Jitna jald ho iska chhanbin karne ke baad clear news dikhya jaae.
दोस्त, आप बिल्कुल सही कह रहे हें, हज़ारों पीयूसी बंद हो गयी थी क्यो? पीयूसी वाले बर्बाद हो गये थे, सिर्फ़ वही पीयूसी चल रही थी जिसका धारक अपनी नेटवर्क की कमाई भी पीयूसी में उडेल रहा था क्योंकि इतने कम मार्जिन में सभी खर्च निकालने के बाद एक पैसा भी शुद्ध लाभ नहीं हो रहा था हक़ीकत में पीयूसी संचालक को टी सी जी ने बड़ी ही सफाई से बेगारी मजदूर बना रखा था जो रात दिन काम भी करें, पूंजी भी लगाएँ और चू तक नहीं करें, और तो और लीडर लोग तो इस बात की ताक में रहते की कब वह मरणासान पीयूसी बंद हो ताकि वे किसी नये आसामी को पूरे स्टॉक के साथ पीयूसी, बाजार उस स्थान पर दिला सकें ताकि लीडरों और कंपनी की कमाई पर तो कोई आँच नहीं आये मरने वाले भलेहि मरते रहे. हज़ारों पीयूसी जो कि चालू हो कर एक वर्ष से पहले बंद हो गयी उनके तन पर लिपटा आखरी कपड़ा सिक्योरटी जमा के 10000/- रुपय भी टी सी जी को उतारने में शर्म नहीं आयी, और जो समान वापस डिपो में जमा कराया उसका रिफंड भी कई पीयूसी वालों को आज दिन तक नहीं दिया गया, कइयों का लेजर में रातों रात हज़ारों रुपयों का स्टॉक ही गायब कर दिया गया पूछने पर यह बताया गया कि वह समायोजित कर दिया गया जबकि कंपनी एक पेसे का सामान भी उधार नहीं देती थी तो किस बात का समायोजन?
दोस्त, यदि सीधे तौर पर सभी एक करोड़ पचास लाख लोगों को और इनडॅयेरेक्ट तौर पर करोड़ों लोगों को वास्तव में आरसीएम से फ़ायदा हो रहा था तो जयपुर में इन करोड़ों लोगो की तुलना में मुट्ठी भर लोग ही क्यों जुटे? जबकि इस सेमीनार में तो अंदर आने का प्रवेश शुल्क 30/- या 100/- भी नहीं लिए जा रहे थे जबकि सिस्टम का हवाला दे कर ये लीडर लोग व टीसीजी बेचारे आम डिस्ट्रीब्यूटर की इस बहाने अब तक बेहिसाब जेबे काटते आए थे, अब जब भीड़ जुटानी थी तो इनका सिस्टम-उसूल फुर्र हो गया, वजह बिल्कुल साफ हे कि फ़ायदा इन चंद मुट्ठी भर लोगों जो कि लीडर थे और टीसीजी एण्ड फेमेली को ही हो रहा था और आमजन कंपनी के द्वारा नित नये थोपें गये बिजनस प्लान, शर्तो, स्कीमों, लॉटरी व अंदर ही अंदर होने वाले षड्यंत्र एंव घोटालो के कारण लुट रहा था.
सरकार को इन लीडरों के खिलाफ भी कार्यवाही करनी चाहिए क्योकि इन्ही की वजह से आमजन गुमराह हुआ और ये लोग भी कंपनी के द्वारा हर स्तर पर की जा रही ठगी के कार्य में हिस्सेदार थे, जब ठगों के सरदार पकड़ लिए गये तो गिरोह के सदस्य खुल्ले क्यों घूम रहें हें? सरकार को भगवान सद्बुधि दे इसके लिये यग्य हवन कर रहें हें इन लोभियों को यह मालूम नहीं कि हवन की वजह से यदि सरकार को इस ठगी प्रकरण में सही सद्बुधि आ गयी तो वे भी हवालात में होंगे.
दोस्तों होली के पर्व की आपको शुभ कामनाएँ.
आज हमारे भारत देश भर में होने वाले सबसे बड़े यग्य में ठगों, घोटालेबाजों, लुटेरों, भ्रस्टाचारियों के राक्षसी ‘होलिका’ की तरह जल कर भस्म हो जाने और सच्चे, ईमानदार लोग ‘प्रहलाद’ की तरह जिंदा रह जाये की कामनाओं के साथ आहुति दे ताकि देश की आम जनता वास्तविक “आर्थिक आज़ादी” की सांस ले सके.
आपका शुभचिंतक
एस पी गहलोत
आरसीएम बिजनस 100 % इन्वेस्टमेंट चिटफंड, मनी सर्कुलेशन पिरामिड स्कीम व लोटरी सिस्टम पर आधारित था
साथियों, मुख्यत कपड़ा बुनने की कंपनी के निदेशक टी. सी. छाबड़ा ने खुद व अपने परिवार को अरबपति बनाने के लिए बड़ी ही शातिर तरीके से एक के बाद एक नित नयी स्कीमों का ऐसा ताना-बाना बुना कि उपरी तौर पर भोले-भाले ग्रामीणों को क्या पढ़े-लिखों को भी यही लगता कि कंपनी अपने साथ जुड़ने वाले मेम्बर्स को बिना बिचोलियों के वाजिब दर पर सीधा सामान बेच रही हे और यदि वे मेम्बर्स अन्य लोगो में इस बात का प्रचार कर के उन्हें भी अपने साथ कंपनी का यदि सदस्य बना दे और वे सभी कंपनी का सामान खरीदना-बेचना शरु कर दे तो कंपनी उन्हें अपने बनाये बिजनस प्लान के नियमानुसार इस कार्य का उन्हें पारिश्रमिक भी देगी इसके साथ ही उनकी स्वयं की प्रति माह होने वाली खरीद और लायी गयी नई जोइनिंगो के आधार पर स्कीम के मुताबिक पॉइंट बनेंगे और हर 10 पॉइंट हो जाने पर जो 1000 /- रुपये का कमीशन सामान्यत इस स्कीम से पहले बनता था उसमे से 250/- रुपये (बाद में इसे भी 500/- कर दिया गया) “लोयल्टी बोनस” फंड के लिए काट कर शेष 750/- रुपयों (बाद में इसे भी 500/- कर दिया गया) का नियमानुसार कटोतिया कर उसके आरसीएम बिजनस एकाउंट में और तत्पश्चात इस एकाउंट में कुल 500/- रुपये हो जाने पर अगले माह तक उसके बेंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जायेगा.
कंपनी ने जब यह “लोयल्टी बोनस” का फंडा बनाया तब मुख्यतः यह कहा गया कि एक निर्धारित तिथि तक कंपनी में जितनी भी “लोयल्टी बोनस” आइडिये आ जाएगी उनकी लाटरी निकाल कर वरीयता सूची बनायीं जाएगी और इस सूची में हर क्लब सदस्य के डाउन में निम्न सदस्यों की संख्या होने पर उन्हें उस फंड में से उनके लेवल अनुसार निम्न प्रकार से भुगतान किया जायेगा :-
1 लेवल – नीचे 4 सदस्य हो जाने पर – 250/- रूपए
२ लेवल – 4 के नीचे 16 सदस्य हो जाने पर – 750/- रूपए
३ लेवल – 16 के नीचे 64 सदस्य हो जाने पर – 5000/- रूपए
४ लेवल – 64 के नीचे 256 सदस्य हो जाने पर – 51000/- रूपए
और यह वरीयता सूची तय हो जाने के बाद क्लब सदस्य को इस “लोयल्टी बोनस” की अपनी सदस्यता बरक़रार रखने के लिए हर माह कम से कम 1000/- रुपयों का सामान अनिवार्य रूप से खरीदना पड़ेगा जिस पर फिर पॉइंट बनेगे और फिर 10 पॉइंट हो जाने पर जो 1000 /- रुपये का कमीशन बनेगा जिसमे से 500/- रुपये “लोयल्टी बोनस” फंड के लिए काट कर शेष 500/- रुपयों का नियमानुसार कटोतिया कर उसके आरसीएम बिजनस एकाउंट में और तत्पश्चात इस एकाउंट में कुल 500/- रुपये हो जाने पर अगले माह तक उसके बेंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जायेगा व जिस माह उपरोक्त टेबल के अनुसार सदस्यों की संख्या उसकी जिस “लोयल्टी बोनस” आई डी के डाउन में हो जाएगी उस पर सदस्यों की संख्यानुसार बनने वाली “लोयल्टी बोनस” राशी का भुगतान भी किया जायेगा साथ ही मीटिंगों में कंपनी के कर्ताधर्ताओं एवं लीडरों द्वारा यह प्रचार भी किया गया कि इस “लोयल्टी बोनस” सिस्टम से जुड़ने वाले हर क्लब सदस्य को शीघ्र ही ये सभी लाभ प्राप्त हो जायेंगे.
यह कंपनी के द्वारा जारी कि गयी मुख्य “लोयल्टी बोनस” स्कीम थी जिसमें बाद में समय-समय पर कंपनी ने अपने फायदे के लिए इसमें कई नियम-उपनियम थोंपे एंव निश्चित संख्या हो जाने पर भुगतान करने वाली अपनी बात को गोल करके एक लोटरी सिस्टम ईजाद किया गया एंव इस “लोयल्टी बोनस” फंड में से लोटरी के भाग्यशाली क्लब विजेताओं को तीन तरह से क्रमश 51000/-, 5000/-, व् 1000/- रुपयों का लाभ देना शरु किया गया वरीयता से लाभ देने की बात को ठन्डे बस्ते में डाल दिया गया. फिर कुछ समय बाद कंपनी के निरंकुश कर्ताधर्ताओं ने इस लोटरी योजना के भुगतान को “लोयल्टी बोनस” फंड से देने की बजाय कंपनी के मासिक बिजनस वाल्लयुम के 5% फंड से जोड़ दिया जिसमे इंश्योरेंस और नयी जोइनिंग का बिजनस वाल्लयुम सम्मलित नहीं था, कंपनी ने अपने प्लान चेंज करने का सफ़र जारी रखा और लोटरी का प्रथम पुरस्कार की राशी को 51000/- से घटा कर 11000/- कर दिया यही नहीं मासिक बिजनस वाल्लयुम के 5% फंड को भी घटा कर 4- 3% तक कर दिया गया.
इस तरह मुख्य “लोयल्टी बोनस” स्कीम में इन्वेस्टमेंट* पर निश्चित तौर पर कम समय में लाभ मिलेगा का आधार, भरोसा दिला कर कंपनी ने लाखों की संख्या में नए सदस्य और “लोयल्टी बोनस” सदस्य बनाये बाद में पूरी तरह से स्कीम को चेंज कर के उन लाखों लोगो के साथ धोखाधडी व ठगी की हे.
* स्कीम में इन्वेस्टमेंट :- किसी भी व्यक्ति या सदस्य को उसको दी जाने वाली भुगतान योग्य धनराशी में से जबरदस्ती कुछ या आधी राशी कंपनी की स्कीम के लिए काट कर भुगतान करना में काटी गयी धनराशी एक तरह से कंपनी द्वारा अपनी स्कीम में उस व्यक्ति से कराया गया इन्वेस्टमेंट ही था और छल से कराया गया एसा इन्वेस्टमेंट जिसमें उस व्यक्ति की इक्छा-अनिक्छा का कोई महत्व ही नहीं था क्योकि उसके द्वारा कंपनी के बिजनस प्लान के अनुसार लाभ लेने के लिए हर माह खरीददारी करनी अनिवार्य थी और खरीददारी करने पर एक न एक दिन 10 पॉइंट बनने ही थे अंत “लोयल्टी क्लब” में उसका इन्वेस्टमेंट होना ही था, उसके चाहने न चाहने का कोई विकल्प कंपनी ने रखा ही नहीं था. इस तरह से आरसीएम बिजनस 100 % इन्वेस्टमेंट चिटफंड, मनी सर्कुलेशन पिरामिड स्कीम व लोटरी सिस्टम पर आधारित हो गया था जो की गेर क़ानूनी हे.
उपरोक्त बातें सारांश में लिखी गयी हे इसके विस्तृत प्रमाण के लिए हम आरसीएम कंपनी के निदेशक टी. सी. छाबड़ा और अधिकारीयों के द्वारा लिखे गए सभी “सेवक संवाद” को ऑन लाइन शीघ्र ही जारी कर रहें हे, कंपनी की उपरोक्त स्कीम से किस प्रकार लाखों की संख्या में लोग ठगे गए और यह कंपनी शुरू से ही हर तरह से हर स्तर पर आम अवाम जन को किस प्रकार ठग रही थी इस बात के भी शीघ्र और भी कई खुलासे किये जायेंगे ताकि आमजन लीडरों के बहकावे में नहीं आये और उन्हें क्या करना हे इस बात का सही निर्णय लेवे.
धन्यवाद
सोजन्य से :- सत्य प्रकाश
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रोजगार सृजन में अहम हो सकती हैं डायरेक्ट सेलिंग कंपनियां
Courtesy: Dainik Jagran, Delhi – 19 March 2011
सरकार ने कहा है कि वर्ष 2022 तक देश में रोजगार के 50 करोड़ नए अवसर पैदा करने के लक्ष्य में डायरेक्ट सेलिंग कंपनियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। फिलहाल इस क्षेत्र में काम कर रहे कर्मचारियों में 70 फीसदी महिलाएं हैं। यह उद्योग इस समय 49,400 करोड़ रुपये का है। वर्ष 2013 तक इसके 71,500 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। योजना और संसदीय राज्य मंत्री अश्विनी कुमार ने भारत में डायरेक्ट सेलिंग उद्योग पर शुक्रवार को एक रिपोर्ट जारी की। इसे इक्रियर (आइसीआरआइईआर) और इंडियन सेलिंग एसोसिएशन द्वारा तैयार किया गया है। सीधी बिक्री का समाजिक और आर्थिक प्रभाव :एक प्रोत्साहन नीति की जरूरत रिपोर्ट को जारी करते हुए कुमार ने कहा डायरेक्ट सेलिंग इस क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं को सशक्त कर रहा है। यह क्षेत्र सरकार के लिए 50 करोड़ रोजगार के अवसरों के सृजन के राष्ट्रीय लक्ष्य की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में अधिक लोगों की जरूरत होती है। इसलिए यह समावेशी विकास और समृद्धि के ऊपर से नीचे की ओर जाने के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में सीधी बिक्री का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2003 से 2010 के दौरान इसमें 60 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। ऐसे में इस उद्योग की वृद्धि दर को बरकरार रखने के लिए सरकारी हस्तक्षेप की जरूरत है। इसके लिए एक अलग मंत्रालय बनाया जाना चाहिए और कानून के जरिए इसकी निगरानी की जानी चाहिए। वर्ष 2001-02 में इस क्षेत्र में दस लाख लोग कार्यरत थे जो वर्ष 2009-10 में 30 लाख हो गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में डायरेक्ट सेलिंग का वर्गीकरण अभी भी अस्पष्ट है। इसकी परिभाषा स्पष्ट करने की जरूरत है ताकि इस क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रवाह हो सके। रपट के मुताबिक इस क्षेत्र को 43 प्रतिशत आमदनी प्रथम श्रेणी के शहरों से होती है। मगर कंपनियां अब नए ग्राहकों की खोज में छोटे शहरों और गांवों की ओर रुख कर रही हैं। देश में इस समय एमवे इंडिया, ओरीफ्लेम, टप्परवेयर, एवन ब्यूटी प्रॉडक्ट्स, के-लिंक हेल्थकेयर, 4लाइफ ट्रेडिंग इंडिया, मैक्स न्यूयार्क लाइफ इंश्योरेंस, मोदीकेयर जैसी कंपनियां डायरेक्ट सेलिंग कारोबार में सक्रिय हैं। विश्व स्तर पर सीधी बिक्री क्षेत्र का उदय 20वीं सदी की शुरुआत में हुई लेकिन इसने 1980 के दशक में रफ्तार पकड़ी। वहीं भारत में यह क्षेत्र 1980 के दशक में शुरू हुआ और 1990 में विदेशी कंपनियों के भारत में प्रवेश के साथ इस क्षेत्र में गति आई|
दोस्तों,
देनिक जागरण द्वारा दी गयी उपरोक्त खबर आज के सन्दर्भ में बड़ी ही महत्वपूर्ण हे, हमारे देश के तेजी से विकास एवं हर बालिग़ को न्यायप्रद रोजगार देने के लिए अच्छी, मजबूत एवं कानून सम्मत “डायरेक्ट सेलिंग उद्योग कंपनियों” की आज सख्त जरुरत हे.
ऐसी कम्पनियाँ जो कि “एक सबके लिए, सब एक के लिए” के सहकारिता के मानद सिद्धांत पर कार्य करती हो एवं इसी सिद्धांत को ध्यान में रख कर कानूनन रजिस्टर्ड हो एवं जिनके द्वारा निर्मित, विक्रय किये जाने वाले उत्पाद की क्वालिटी उपभोक्ताओं के हित के लिए बनायी गयी तृतीय पक्ष संस्थाओं से प्रमाणित हो और वे वास्तव में सभी सदस्यों को उनके कार्यानुसार प्रतिफल, लाभ देने के लिए वचनबद्ध हो.
ऐसी कंपनियों का बिजनस प्लान भाई-भाई को आपस में लड़ाने, बांटने वाला न हो बल्कि पूरे देश में आपसी सोहाद्र बढाने का सचमुच में योगदान करता हो, हरेक सदस्य के द्वारा कभी भी पूरी न की जा सकने वाली शर्तो से उलझाया हुआ न हो, जिसमे बेईमानी, ठगी, भ्रष्टाचार का कंही नामो-निशान भी न हो, उत्पादों का विक्रय मूल्य लागत से बहुत ज्यादा न हो कर वाजिब दाम पर हो.
साथियों, आज नेटवर्किंग का कार्य हमारे लिए नया नहीं हे और प्राय हम सबने इस तरह की कई कंपनियों का कार्य कर के खट्टे-मीठे अनुभव भी प्राप्त किये हे. आय में लाभ-हानि हो सकती हे लेकिन अपने-अपने कार्य शेत्र विशेष, स्थान विशेष में प्राप्त अनुभव, ज्ञान अनमोल होते हे जो कभी नष्ट नहीं होते हे.
आप अपने अनुभवों के आधार पर एक अच्छी डायरेक्ट सेलिंग नेटवर्किंग कंपनी, संस्था के बिजनस प्लान में क्या-क्या जरुरी चीजे और केसे होनी चाहिए के बारे में अपने सुझाव, सलाह संषेप या विस्तार में यदि इस मंच की इस पोस्ट पेज (सर्वे हिताय सर्वे सुखाय कंपनी) के कॉमेंट बॉक्स में देंगे तो एक “सर्वे हिताय, सर्वे सुखाय” को ध्यान में रख कर एक नयी कंपनी की सरंचना, स्थापना आसानी से की जा सकेगी जो कानून सम्मत भी हो और आप सभी को सर्वमान्य भी हो.
आशा हे की देश हित में आप अपने सुझाव, विचार इस पोस्ट के पेज “सर्वे हिताय सर्वे सुखाय कंपनी” पर जरुर कॉमेंट करेंगे.
कॉमेंट करने के लिए शीघ्र विजिट करें :- rcmmanch.blogspot.com
आपका हितेषी
सत्य प्रकाश
Homko saahia aasli sochchai . Aami roi aaso antim somoyoloi.
jiski jaisi soch uski utani asliyat.aap sabhi se nibedan hai ki news ko dene wale jhoothi va bakwash kori khabar ko na dikhaye aaj kal to media walo se jyada bhrast to koi nahi hai.kyoki aaj ke jamane me media apna astitva aur garima ko bechkar dhan ugahi ke chakkar me rahti hai.07376979096
chomu se case darj karne wale log khud dusri co. me kaam karte h.kuch govt service bhi karte h, enko case hi karn tha to 60 daya ka intjar kyo kiya,yah baat kuch samj me nahi aati?
kya kise ka dabav tha ?
ya” kuch meelne ki ummid “h.
ya koi purani dushmani h ?
PULISIYA KARWAI AISE HOTI HAI MUJHE TO AAJ PATA LAGA HAI, EK PARIWAAR RCM-PARWAAR PAR ITNE DAANAW KA NAJAR THA HAM LOGO KO PATA HI NAHI THA. US SAMAY ME KUMBH KARAN 6 MAHINA SOTA THA RAJ STHAN KA KUMBHKARAN 11 SAAL SE SOYA HUA THA, WAH RE HAMARI SARKAAR EK COMPANY JO ABHI 11 SAAL KA BACHHA CHALNA SIKHA HAI ITANE DUSMAN??????. SAARKAAR NAHI CHAHTI IS DESH KI TARAKKI, SIRF APNI TARAKKI SE MATLAB HAI, KARORO RUPYE HAM TAX DETE HAI SARM AA RAHI HAI SARKAAR KO KI HAM IMNDAR HO GAYE MAIN PURE DESH KI BAAT KARTE HAIN RCM DISTRIBUTOR KO CHOD KAR KITNE LOG RASAN KHARIDNE PER TAX DETE HAI AUR IMANDARI SE INCOME TAX DETE HAI .
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Kanhaiya choudhary
Darbhanga.
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यह भारत हे यहाँ ठगी में हिस्सा पाने वाले गिरोह के सदस्य अपने गिरफ्तार हुए सरदार को छुड़ाने के लिए आमरण अनशन भी कर सकते हें, क्योकि आख़िर सरदार छूटेगा तभी तो उनको ठगी में हिस्सा मिलना वापस शरु हो पाएगा, उन नादानो को क्या पता क़ि जिसे वे रोज़गार समज रहें हें वह हक़ीकत में लाखों लोगों को ठग कर ठगी की कुछ रकम चंद लोगों में बाँटने का खेल था ताकि वे लोग सरदार की वा-वा करते रहें और चंद रुपयो के लालच में सरदार के सेवक बन कर नित नये भोले लोगो, ग्रामीणों को सरदार की एसी नित नयी स्कीमों में फाँसते रहें जिनकी शर्तें एसी कि न तो नौ मॅन तेल हो न राधा नाचें, और वह बेचारे यदि किसी तरह शर्त पूरी करने की स्थति तक पहुँचने वाले ही हो कि सरदार पुरानी स्कीम को बंद कर के नयी स्कीम लागू कर दे, यदि कोई बोलने की हिमाकत करे तो सरदार उसकी आईडी ही टर्मिनेट करदे, आख़िर सरदार की सल्तनत हे तो नियम कायदे सरदार के ही तो होंगे, उन्हे चुनी हुई सरकार के नियम-अधिनियम की क्या परवाह? जिसमें ये सरदार लोग उनकी भावनाओं और मासूमियत को अब भी लूट रहे हें, अगर सरदार पाक-साफ थे तो न्याय व्यवस्था से भागते क्यों फिर रहे थे? और अब जब पकड़े गये तो इतने स्वार्थी निकले क़ि खुद को छुड़वाने के लिये न्यालय में अपने को निर्दोष साबित करने के बजाया मासूमों को धरने और आमरण अनशन करने का आदेश दे रहें हे. कुछ समय पहले तक देश की भलाई सोचने का ढोंग करने वाले सरदार अब गिरफ्तार होने पर पूरे देश में अराजगता फेलाना चाहते हें क्या इससे उनकी अपने देश के प्रति वास्तविक सोच उजागर नहीं होती हे? इस बात को आमजन को भी समजना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति अपने व्यापार से नियमानुसार कर आदि चुका कर प्राप्त हुई शुद्ध आय से अधिक की संपति यदि बनाता हे तो अधिक वाला पेसा क्या हे? और कहाँ से? केसे आया? उसे एक न एक दिन दुनिया को बताना पड़ेगा ही और यह तो सभी जानते ही हे कि भगवान के घर देर हें अंधेर नहीं और उसकी लाठी आवाज़ भी नहीं करती.
रोजगार सृजन में अहम हो सकती हैं डायरेक्ट सेलिंग कंपनियां
Courtesy: Dainik Jagran, Delhi – 19 March 2011
सरकार ने कहा है कि वर्ष 2022 तक देश में रोजगार के 50 करोड़ नए अवसर पैदा करने के लक्ष्य में डायरेक्ट सेलिंग कंपनियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। फिलहाल इस क्षेत्र में काम कर रहे कर्मचारियों में 70 फीसदी महिलाएं हैं। यह उद्योग इस समय 49,400 करोड़ रुपये का है। वर्ष 2013 तक इसके 71,500 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। योजना और संसदीय राज्य मंत्री अश्विनी कुमार ने भारत में डायरेक्ट सेलिंग उद्योग पर शुक्रवार को एक रिपोर्ट जारी की। इसे इक्रियर (आइसीआरआइईआर) और इंडियन सेलिंग एसोसिएशन द्वारा तैयार किया गया है। सीधी बिक्री का समाजिक और आर्थिक प्रभाव :एक प्रोत्साहन नीति की जरूरत रिपोर्ट को जारी करते हुए कुमार ने कहा डायरेक्ट सेलिंग इस क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं को सशक्त कर रहा है। यह क्षेत्र सरकार के लिए 50 करोड़ रोजगार के अवसरों के सृजन के राष्ट्रीय लक्ष्य की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में अधिक लोगों की जरूरत होती है। इसलिए यह समावेशी विकास और समृद्धि के ऊपर से नीचे की ओर जाने के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में सीधी बिक्री का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2003 से 2010 के दौरान इसमें 60 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। ऐसे में इस उद्योग की वृद्धि दर को बरकरार रखने के लिए सरकारी हस्तक्षेप की जरूरत है। इसके लिए एक अलग मंत्रालय बनाया जाना चाहिए और कानून के जरिए इसकी निगरानी की जानी चाहिए। वर्ष 2001-02 में इस क्षेत्र में दस लाख लोग कार्यरत थे जो वर्ष 2009-10 में 30 लाख हो गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में डायरेक्ट सेलिंग का वर्गीकरण अभी भी अस्पष्ट है। इसकी परिभाषा स्पष्ट करने की जरूरत है ताकि इस क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रवाह हो सके। रपट के मुताबिक इस क्षेत्र को 43 प्रतिशत आमदनी प्रथम श्रेणी के शहरों से होती है। मगर कंपनियां अब नए ग्राहकों की खोज में छोटे शहरों और गांवों की ओर रुख कर रही हैं। देश में इस समय एमवे इंडिया, ओरीफ्लेम, टप्परवेयर, एवन ब्यूटी प्रॉडक्ट्स, के-लिंक हेल्थकेयर, 4लाइफ ट्रेडिंग इंडिया, मैक्स न्यूयार्क लाइफ इंश्योरेंस, मोदीकेयर जैसी कंपनियां डायरेक्ट सेलिंग कारोबार में सक्रिय हैं। विश्व स्तर पर सीधी बिक्री क्षेत्र का उदय 20वीं सदी की शुरुआत में हुई लेकिन इसने 1980 के दशक में रफ्तार पकड़ी। वहीं भारत में यह क्षेत्र 1980 के दशक में शुरू हुआ और 1990 में विदेशी कंपनियों के भारत में प्रवेश के साथ इस क्षेत्र में गति आई|
दोस्तों,
देनिक जागरण द्वारा दी गयी उपरोक्त खबर आज के सन्दर्भ में बड़ी ही महत्वपूर्ण हे, हमारे देश के तेजी से विकास एवं हर बालिग़ को न्यायप्रद रोजगार देने के लिए अच्छी, मजबूत एवं कानून सम्मत “डायरेक्ट सेलिंग उद्योग कंपनियों” की आज सख्त जरुरत हे.
ऐसी कम्पनियाँ जो कि “एक सबके लिए, सब एक के लिए” के सहकारिता के मानद सिद्धांत पर कार्य करती हो एवं इसी सिद्धांत को ध्यान में रख कर कानूनन रजिस्टर्ड हो एवं जिनके द्वारा निर्मित, विक्रय किये जाने वाले उत्पाद की क्वालिटी उपभोक्ताओं के हित के लिए बनायी गयी तृतीय पक्ष संस्थाओं से प्रमाणित हो और वे वास्तव में सभी सदस्यों को उनके कार्यानुसार प्रतिफल, लाभ देने के लिए वचनबद्ध हो.
ऐसी कंपनियों का बिजनस प्लान भाई-भाई को आपस में लड़ाने, बांटने वाला न हो बल्कि पूरे देश में आपसी सोहाद्र बढाने का सचमुच में योगदान करता हो, हरेक सदस्य के द्वारा कभी भी पूरी न की जा सकने वाली शर्तो से उलझाया हुआ न हो, जिसमे बेईमानी, ठगी, भ्रष्टाचार का कंही नामो-निशान भी न हो, उत्पादों का विक्रय मूल्य लागत से बहुत ज्यादा न हो कर वाजिब दाम पर हो.
साथियों, आज नेटवर्किंग का कार्य हमारे लिए नया नहीं हे और प्राय हम सबने इस तरह की कई कंपनियों का कार्य कर के खट्टे-मीठे अनुभव भी प्राप्त किये हे. आय में लाभ-हानि हो सकती हे लेकिन अपने-अपने कार्य शेत्र विशेष, स्थान विशेष में प्राप्त अनुभव, ज्ञान अनमोल होते हे जो कभी नष्ट नहीं होते हे.
आप अपने अनुभवों के आधार पर एक अच्छी डायरेक्ट सेलिंग नेटवर्किंग कंपनी, संस्था के बिजनस प्लान में क्या-क्या जरुरी चीजे और केसे होनी चाहिए के बारे में अपने सुझाव, सलाह संषेप या विस्तार में यदि इस मंच की इस पोस्ट पेज (सर्वे हिताय सर्वे सुखाय कंपनी) के कॉमेंट बॉक्स में देंगे तो एक “सर्वे हिताय, सर्वे सुखाय” को ध्यान में रख कर एक नयी कंपनी की सरंचना, स्थापना आसानी से की जा सकेगी जो कानून सम्मत भी हो और आप सभी को सर्वमान्य भी हो.
आशा हे की देश हित में आप अपने सुझाव, विचार इस पोस्ट के पेज “सर्वे हिताय सर्वे सुखाय कंपनी” पर जरुर कॉमेंट करेंगे.
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आपका हितेषी
सत्य प्रकाश
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